
नई दिल्ली। आटा, दाल, चावल, गेंहू आदि के कीमतों में बढ़ोत्तरी ने एक बार फिर महंगाई बढ़ा दी है। अगस्त महीने में खुदरा मुद्रास्फीति 7 प्रतिशत हो गई है जोकि इसके पहले की तिमाही में 6.7 प्रतिशत ही थी। जबकि पिछले साल अगस्त में रिटेल मुद्रास्फीति महज 5.30 प्रतिशत रही थी। खाद्य कीमतों में बढ़ोत्तरी ने अर्थव्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाला है, यह दर आरबीआई के कीमतों में बढ़ोत्तरी को रोकने के प्रयास की विफलता को भी दर्शा रहे हैं। सोमवार को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) आधारित रिटेल महंगाई दर के आंकड़े जारी किए गए।
इस साल अगस्त में फूड इन्फ्लेशन 7.62%
राष्ट्रीय सांख्यिकी ऑफिस के आंकड़ों के अनुसार इस साल अगस्त में फूड इन्फ्लेशन 7.62% हो गई जो जुलाई में 6.69% थी। जून में 7.75% रही थी। मई में यह 7.97% और अप्रैल में 8.38% थी। रिटेल महंगाई दर लगातार 8 महीनों से RBI की 6% की ऊपरी लिमिट या टॉलरेंस बैंड के पार बनी हुई है। इसका मतलब यह कि इस साल हर महीने महंगाई दर आरबीआई के 2-6 फीसदी के टॉलरेंस बैंड से ऊपर बनी हुई है। जनवरी 2022 में रिटेल महंगाई दर 6.01%, फरवरी में 6.07%, मार्च में 6.95%, अप्रैल में 7.79%, मई में 7.04% और जून में 7.01% दर्ज की गई थी। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) बास्केट का आधा से अधिक हिस्सा खाद्य मुद्रास्फीति की है। गेंहू, चावल, दाल, सब्जियों की कीमतों में काफी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। यह खाद्य मुद्रास्फीति को बढ़ाई ही है, घरेलू बजट को भी गड़बड़ कर दिया है।
अभी कीमतों में और होगी बढ़ोत्तरी
इस बार पूरे देश में अनियमित मानसून पैटर्न रहा। इससे फसलों को काफी नुकसान हुआ है। मानसून की वजह से आने वाले महीनों में खाद्य कीमतों में और तेजी आएगी। इससे सितंबर से नवम्बर तक महंगाई और बढ़ेगी। हालांकि, सरकार ने देश में असमान बारिश की वजह से फसलों को हुए नुकसान को देखते हुए गेहूं, चीनी, चावल के निर्यात पर रोक लगा दिया है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि मुद्रास्फीति की दर 7 प्रतिशत तक पहुंचने से यह साफ है कि आने वाले दिनों में भी महंगाई से निजात नहीं मिलने वाला है।
अगले साल तक नहीं मिलने वाली महंगाई से निजात
खाद्य तेलों में हाल के दिनों में गिरावट दर्ज की गई है। लेकिन इसका सकारात्मक प्रभाव अभी नहीं दिखा है। खाद्य और ईंधन की कीमतों में वृद्धि से घरेलू बजट को भारी नुकसान हुआ है। आरबीआई के अनुमानों में साफ है कि 2023 की शुरुआत तक मुद्रास्फीति 6 प्रतिशत के टॉलरेंस बैंड के ऊपर रहेगी।
अगले साल की दूसरी तिमाही में मिल सकती राहत
आरबीआई गवर्नर ने इस महीने की शुरूआत में संभावना जताई है कि मुद्रास्फीति अगले साल की अप्रैल-जून तिमाही तक लगभग 5 प्रतिशत तक कम हो सकती है।
रिटेल महंगाई की दर कैसे तय होती है?
रिटेल महंगाई दर तय करने में कच्चे तेल, कमोडिटी की कीमतों, मैन्युफैक्चर्ड कॉस्ट के अलावा कई अन्य चीजें की अहम भूमिका होती है। करीब 299 सामान ऐसे हैं जिनकी कीमतों के आधार पर रिटेल महंगाई का रेट तय होता है।
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