
CBSE Revaluation 2026 Process: सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2026 के बाद शुरू हुआ विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। बोर्ड आज से रिवैल्यूएशन और वेरिफिकेशन के लिए विंडो खोल रहा है, लेकिन इस बार मामला सिर्फ मार्क्स का नहीं है बल्कि पूरी इवैल्यूएशन सिस्टम की पारदर्शिता पर उठे सवालों का भी है। इस साल पहली बार लागू हुए On-Screen Marking (OSM) सिस्टम ने जहां डिजिटल इवैल्यूएशन की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा था, वहीं रिजल्ट के बाद सामने आई शिकायतों ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लाखों छात्र अपने स्कोर को दोबारा जांचने के लिए प्रक्रिया में शामिल हो रहे हैं। जानिए री वैल्यूएशन फीस, प्रोसेस समेत जरूरी डिटेल।
CBSE के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस बार प्रक्रिया का पैमाना बेहद बड़ा है। कुल 4,04,319 छात्रों ने अपनी आंसर शीट देखने के लिए आवेदन किया। 11,31,961 आंसर बुक्स की रिक्वेस्ट की गई है। 8,98,214 से ज्यादा आंसर शीट्स पहले ही डिजिटल रूप में उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि इस बार छात्रों के बीच न सिर्फ उत्सुकता, बल्कि असंतोष और शक भी काफी ज्यादा है।
CBSE ने इस साल पहली बार OSM सिस्टम लागू किया, जिसमें कॉपियों की जांच फिजिकल नहीं बल्कि स्कैन की गई डिजिटल शीट्स पर की गई। बोर्ड ने इसे तेज और पारदर्शी प्रक्रिया बताया था, लेकिन रिजल्ट के बाद सोशल मीडिया पर कई तरह की शिकायतें सामने आने लगीं। जिसमें कम मार्क्स मिलने की शिकायतें, कुछ आंसर बिना चेक किए होने के आरोप, ब्लर या अधूरी स्कैन कॉपियों की समस्या, पोर्टल क्रैश और लॉगिन दिक्कतें। कुछ मामलों में छात्रों ने यह भी दावा किया कि उनकी आंसर शीट्स में मार्किंग अधूरी या मिसमैच्ड दिख रही थी।
बढ़ते विवाद के बीच CBSE ने पोस्ट-रिजल्ट सर्विसेज की फीस में बड़ा बदलाव किया है। नई फीस स्ट्रक्चर के अनुसार-
छात्रों के लिए पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है। स्टेप्स इस तरह हैं-
1. पहले आंसर शीट डाउनलोड करें- छात्रों को अपनी डिजिटल कॉपी डाउनलोड करनी होगी।
2. ध्यान से जांच करें-
3. वेरिफिकेशन के लिए आवेदन
4. रिवैल्यूएशन का विकल्प
इस बार CBSE का पूरा डिजिटल इवैल्यूएशन सिस्टम लगभग 17 लाख छात्रों और 98 लाख आंसर शीट्स तक फैला हुआ है। बताया जा रहा है कि करीब 40 करोड़ पेज स्कैन किए गए हैं। हालांकि तकनीकी साझेदारी IIT कानपुर, IIT मद्रास और कुछ PSU बैंकों के साथ की गई थी, फिर भी सिस्टम को लेकर छात्रों और अभिभावकों में भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है। इसी दौरान कुछ साइबर सुरक्षा दावों और पोर्टल से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ियों ने विवाद को और बढ़ा दिया।
29 मई 2026 से शुरू हुआ यह रिवैल्यूएशन विंडो आने वाले दिनों में तय करेगा कि कितने छात्र सिर्फ आंसर शीट देखकर रुक जाते हैं और कितने लोग आगे जाकर मार्क्स में बदलाव की मांग करते हैं। शिक्षा मंत्री के हालिया अनुमान के मुताबिक करीब 20% छात्र रिवैल्यूएशन तक जा सकते हैं, लेकिन असली आंकड़ा आने वाले दिनों में ही साफ होगा।
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