CBSE English Paper: बढ़ते विवाद के बीच CBSE ने वापस लिया सवाल, संसद में सोनिया ने उठाया था मुद्दा

Published : Dec 13, 2021, 02:35 PM ISTUpdated : Dec 13, 2021, 03:08 PM IST
CBSE English Paper: बढ़ते विवाद के बीच CBSE ने वापस लिया सवाल, संसद में सोनिया ने उठाया था मुद्दा

सार

कांग्रेस (Congress) की अंतरिम अध्यक्ष  सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने सीबीएसई की 10वीं कक्षा की परीक्षा के एक प्रश्नपत्र में आए एक गद्यांश का मामला लोकसभा में उठाया।

करियर डेस्क.  केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) के 10वीं कक्षा के अंग्रेजी (English Paper) के पेपर को लेकर मचे हंगामे के बीच सीबीएसई ने इस प्रश्न को वापस ले लिया है। न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, CBSE ने 10वीं की बोर्ड परीक्षा के इंग्लिश लैंग्वेज एंड लिटरेचर के पेपर में पूछे गए आपत्तिजनक सवाल को हटा दिया है। CBSE की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 11 दिसंबर को हुए एग्जाम में पूछा गया सवाल हमारी गाइडलाइन के मुताबिक नहीं था। इस पर उठ रहे सवालों को कमेटी का पास भेजा गया। कमेटी ने इस सवाल को हटाने और इस पैसेज के लिए सभी छात्रों को पूरा नंबर देने का फैसला लिया।

 


सोनिया ने संसद में उठाया था मुद्दा
कांग्रेस (Congress) की अंतरिम अध्यक्ष  सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) ने सीबीएसई की 10वीं कक्षा की परीक्षा के एक प्रश्नपत्र में आए एक गद्यांश का मामला लोकसभा में उठाया। उन्होंने इस गद्यांश को महिला-विरोधी बताते हुए बोर्ड से प्रश्नपत्र को वापस लेने और शिक्षा मंत्रालय से माफी मांगने की मांग की। सोनिया गांधी ने लोकसभा में सीबीएसई की 10वीं कक्षा की परीक्षा के एक प्रश्नपत्र में आए महिला विरोधी एक गद्यांश के मुद्दे को उठाते हुए कहा कि शिक्षा मंत्रालय को महिलाओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीबीएसई के सिलेबस में महिलाओं को लेकर जो भी आपत्तिजनक कंटेट है, उसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। महिलाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस मामले में सीबीएसई और शिक्षा मंत्रालय महिलाओं का अपमान करने के लिए माफी मांगे।

क्या है मामला
बता दें कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं कक्षा के अंग्रेजी के प्रश्नपत्र के अंशों में 'लैंगिक रूढ़िवादिता' को कथित तौर पर बढ़ावा दिए जाने और 'प्रतिगामी धारणाओं' का समर्थन करने संबंधी आरोपों के बाद विवाद खड़ा हो गया है। इसके चलते बोर्ड ने रविवार को इस मामले को विषय के विशेषज्ञों के पास भेज दिया।


क्या है उस प्रश्न में, जिसे लेकर शुरू हुआ विवाद 
दरअसल, इस पैसेज में टीनएजर्स (13 से 19 वर्ष की आयु) के जीवन शैली के बारे में बताया गया है कि कैसे वह अपनी ही दुनिया में जब जीने लगते हैं। जब परिवार में महिला अपनी इच्छा से समाज में आगे बढ़कर अपना करियर चुनती है और समाज में एक नाम-पहचान हासिल करती है। तब परिवार में माता-पिता का बच्चों पर से अधिकार कम होने लगता है। बच्चे यह फैसला नहीं कर पाते हैं कि वह दोनों में किस की सुने। महिलाओं को परिवार में अनुशासन बनाए रखने के लिए अपने पति की आज्ञा का पालन करना चाहिए।

साथ ही एक महिला, मां होते हुए अपने पति के तरीके को स्वीकार करेगी, तभी उसके छोटे बच्चे अपनी मां की आज्ञा का पालन करेंगे। महिला उद्धार ने बच्चों पर माता-पिता के अधिकार को खत्म कर दिया है। इस तरह के कई वाक्य इंग्लिश के इस पेपर में मौजूद हैं, जो इस तरह की व्याख्याएं करते हैं। इस पैसेज में पिछली सदी के विचारों का उल्लेख किया गया है, साथ में 20वीं सदी में महिलावादी विद्रोह होने के बाद से परिस्थितियों में बदलाव की व्याख्याओं के संदर्भ में इसे बच्चों पर माता-पिता के अधिकार को कम करने की बात कही गई है।

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