CDS Bipin Rawat: क्या होता है राजकीय सम्मान, तिरंगे से क्यों ढका जाता है शहीद का शव

Published : Dec 10, 2021, 12:34 PM ISTUpdated : Dec 10, 2021, 03:31 PM IST
CDS Bipin Rawat: क्या होता है राजकीय सम्मान, तिरंगे से क्यों ढका जाता है शहीद का शव

सार

जब कोई जवान शहीद होता है तो उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाता है। जिस जगह में जवान शहीद होता है उसके बाद शहीद के पार्थिव शरीर उनके स्थानीय आवास पर भेजा जाता है इस दौरान साथ में सेना के जवान भी होते हैं। 

करियर डेस्क. तमिलनाडु हेलिकॉप्टर क्रैश (TamilNadu helicopter crash) में देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल बिपिन रावत (General Bipin Rawat) का निधन हो गया है। शुक्रार को उनका अंतिम संस्कार (Funeral) होगा। देश के लिए जान देने वाले शहीदों का अंतिम संस्कार भी खास तरीके से होता है। उन्हें राजकीय सम्मान (state honor) के साथ अंतिम विदाई दी जाती है। आइए जानते हैं एक शहीद का अंतिम संस्कार कैसे होता है। 

जब कोई जवान शहीद होता है तो उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया जाता है। जिस जगह में जवान शहीद होता है उसके बाद शहीद के पार्थिव शरीर उनके स्थानीय आवास पर भेजा जाता है इस दौरान साथ में सेना के जवान भी होते हैं। राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि के दौरान पार्थिव शरीर को तिरंगे में लपेटा जाता है। भारतीय झंडा संहिता 2002 के अनुसार, राष्ट्रीय ध्वज को सिर्फ सैनिकों या राजकीय सम्मान के वक्त शव को लपेटने के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके लिए अलावा कभी भी झंडे को मृतक के नहीं लपेटा जा सकता है।

क्या होता है झंड़ा लगाने का नियम
इसी के साथ ही पार्थिव शरीर पर झंडे लगाने का भी एक नियम होता है। झंडे को शव पेटिका पर रखा जाता है और झंडे का केसरिया भाग शव पेटिका के आगे वाले हिस्से की तरफ होता है। यानी इसे सीधा रखा जाता है। चादर की तरह ओढाया नहीं जाता है। झंडे को कब्र में दफनाया या चिता में जलाया नहीं जाता है। अंतिम संस्कार से पहले ही यह झंडा निकालकर शहीद के घरवालों को दे दिया जाता है। झंडे को समेटने के समय इस बात का ध्यान दिया जाता है कि झंडे का अशोक चक्र सबसे ऊपर होता है।

अंतिम संस्कार के दौरान मिलिट्री बैंड की ओर से ‘शोक संगीत’ बजाया जाता है और इसके बाद बंदूकों की सलामी दी जाती है। बंदूकों की सलामी का भी एक एक खास तरीका होता है और जिसमें बंदूक खास तरीके से बंदूक झुकाई और उठाई जाती है। देश के लिए शहीद हुए जवानों को सम्मान देने के लिए उनका पार्थिव शरीर राष्ट्रध्वज में लपेटा जाता है। इस दौरान केसरिया पट्टी को सिर की तरफ और हरी पट्टी को पैरों की तरफ रखा जाता है। शहीद के अंतिम संस्कार से पहले तिरंगे को पार्थिव शरीर से उतार लिया जाता है।

क्या होता है राजकीय सम्मान का मतलब
राजकीय सम्मान का मतलब है कि इसका सारा इंतज़ाम राज्य सरकार की तरफ़ से किया गया था, जिसमें पुलिस बंदोबस्त पूरा था। शव को तिरंगे में लपेटने के अलावा उन्हें बंदूकों से सलामी भी दी जाती है। जिस व्यक्ति को राजकीय सम्मान देने का फ़ैसला किया जाता है उनके अंतिम सफ़र का इंतज़ाम राज्य या केंद्र सरकार की तरफ़ से किया जाता है। 

किसे दिया जाता है राजकीय सम्मान
राजकीय सम्मान देने का फैसला राज्य सरकार या केन्द्र सरकार के विवेक पर निर्भर करता है। वो इस बात का फ़ैसला करती है कि व्यक्ति विशेष का क़द क्या है और इसी हिसाब से तय किया जाता है कि राजकीय सम्मान दिया जाना है या नहीं।

इसे भी पढ़ें- Bipin Rawat Died in Chopper Crash: पीएचडी से लेकर एमफिल तक थी डिग्री, जानें कहां से पढ़े थे बिपिन रावत
'जंग का एक ही उसूल है वो है...' CDS Bipin Rawat के 10 बयान, जो भर देते हैं जोश

PREV

Education News: Read about the Latest Board Exam News, School & Colleges News, Admission news in hindi, Cut-off list news - Asianet Hindi

Recommended Stories

CBSE Counseling 2026: बोर्ड छात्रों के लिए IVRS और टेली-काउंसलिंग सर्विस शुरू, जानें कैसे लें मदद
Anil Agarwal Daughter: अनिल अग्रवाल की बेटी प्रिया अग्रवाल हेब्बार कौन है, जानिए क्या करती है