
करियर डेस्क। भर्ती प्रक्रिया कारोबार से जुड़ा ऐसा फंक्शन है, जिसमें थोड़ा भी बदलाव व्यवसाय या फिर अर्थव्यवस्था को तुरंत प्रभावित करता है। महामारी के करीब दो साल बाद भी बिजनेस को सुचारू होने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अनुभव और स्किल्स यानी कौशल से जुड़े कई मसले ऐसे हैं, जिस पर कारोबार प्रभावित होता दिख रहा है। हर महीने अच्छे अभ्यर्थियों की डिमांड बढ़ रही है। ऐसे में रिक्रूटमेंट यानी भर्ती प्रक्रिया को कम करके नहीं आंका जा सकता। नई तकनीक और लॉन्ग टर्म विजन को देखते हुए कोई भी कारोबारी संगठन अनुभव और कौशल से समझौता नहीं करना चाहते।
खासकर, भारत में हर साल की शुरुआत में यह चर्चा रहती है कि सर्दियों में धीमी आर्थिक वृद्धि होती है और इस वजह से कारोबारी संगठन भर्ती प्रक्रिया में फंडिंग को रोक देते हैं या फिर कम कर देते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ इसे सच नहीं मानते। फिर भी, क्या 2023 में भी 2022 की ही तरह भर्ती प्रक्रिया तेज रफ्तार में रहेंगी और कुछ बेहतर परिणाम हासिल करेंगी या अफवाहें सच साबित होंगी। आइए रिक्रूटमेंट्स से जुड़े ट्रेंड्स पर एक नजर डालें, जो आने वाले नए साल के लिए हॉयरिंग इंडस्ट्री यानी भर्ती उद्योग को नया आकार और बूस्ट दे सकती है।
जॉब सेक्टर में बेहतर कल..
रिमोट रिक्रूटमेंट
दुनियाभर में कोरोना महामारी के एक बार फिर बढ़ते प्रकोप ने कारोबारी संस्थाओं को वर्क फ्रॉम होम के ऑप्शन पर सोचने के लिए मजबूर किया है। इसमें दूर बैठकर काम को कैसे सही तरीके से हैंडल किया जाता है और तकनीकों का सही इस्तेमाल किस तरह हो। साथ ही, राइट कैंडिडेट का सेलेक्शन करना बड़ी चुनौती होती है। कंपनियां योग्य उम्मीदवारों की भर्ती के लिए कई तरह के ऑप्शन पर विचार कर रही हैं। इसमें वर्चुअल जॉब फेयर, टेस्ट एंड रिक्रूटमेंट ऑटोमेशन और इंटरव्यू की बढ़ती लोकप्रियता के जरिए भी भर्ती से जुड़ी दिक्कतों को दूर किया जा सकेगा।
पैसिव कैंडिडेट
पैसिव जॉब्स की संभावनाएं मुश्किल से आती हैं। यह कंपनियों के लिए भी मुश्किल टास्क होता है। ऐसे में कंपनियां पैसिव कैंडिंडेट्स को तलाशने के लिए कई अपग्रेड चैनल्स का इस्तेमाल करती हैं। इसमें हेड हंटर्स, इम्प्लायी रेफरल प्रोग्राम और सोशल मीडिया रिक्रूटमेंट भी शामिल है। एक्सपर्ट की मानें तो 2023 में पैसिव जॉब्स और कैंडिडेट्स की बहार होगी।
एनालिटिक्स
चीन और अमरीका में जिस तरह कोविड-19 का प्रकोप एक बार फिर बढ़ा है, ऐसे में यह भारत के लिए भी अभी से खतरे की घंटी है। माना जा रहा है कि नए साल में बहुत सी कंपनियां एक बार फिर वर्क फ्रॉम होम के प्रॉसेस में जा सकती हैं। इस बार वे पुराने अनुभवों से सबक लेकर आगे बढ़ना चाहेंगे। यही नहीं, कंपनियों को यह तय करने की जरूरत भी होगी कि वे नई अराजक परिस्थिति के अनुकूल खुद को जल्द से जल्द ढाल सकें, क्योंकि अगले साल अर्थव्यवस्था भी काफी उतार-चढ़ाव वाली होगी। इस वजह से मैनपॉवर स्कीम महत्वपूर्ण साबित होगी और यह मौजूदा रिक्रूटमेंट प्रॉसेस में भी शामिल होगी।
इंप्लायी एक्सपीरियंस
इस कांसेप्ट पर हर इंप्लायर यानी नियोक्ता फोकस करना चाहेगा, क्योंकि रिक्रूटमेंट प्रॉसेस में यह ट्रेंड में देखा जा रहा है। ऐसे कारोबार जो कर्मचारियों की व्यस्तता को बढ़ाने पर फोकस करेंगे और यह उनके कंप्टीटर्स यानी प्रतिद्वंद्वियों की अपेक्षा रेवेन्यू जेनरेशन में ढाई गुना तक बढ़ोतरी करने में मददगार साबित होंगे। हालांकि, रिमोट एन्वायर्नमेंट में कनेक्टिविटी और जुड़ाव बहुत काम आता है और इसके लिए एक्सपीरियंस्ड कैंडिडेट फायदेमंद साबित होंगे।
इंप्लायी वैल्यू प्रपोजिशन
यह कांसेप्ट 'हमारे लोग हमारी सबसे बड़ी संपत्ति' जैसे क्लिच के इस्तेमाल को पूरा करने के लिए लाया गया। हालांकि, कई एक्सपर्ट इसे आज के दौर में ज्यादा प्रभावी नहीं मानते हैं, मगर कंप्टिशन से अलग दिखने के लिए कंपनियां अपने इन्फरमेशन सिस्टम का उपयोग कर इस सिद्धांत को आपकी फर्म, कल्चर, एन्वायर्नमेंट, इंप्लायी प्रॉफिट बेटर करियर ऑप्शन को फोकस कर रहे हैं।
कम ओपनिंग
वैसे तो एक्सपर्ट्स का मानना है कि बाजार में अगले साल भी तेजी और मजबूती रहेगी। हालांकि, सभी इस बात का इंतजार करना चाहेंगे कि शुरुआत कैसी होती है और ऐसे में कंपनियां भर्ती प्रक्रिया को थोड़ा टाल सकती हैं या इसमें देरी कर सकती हैं। वैसे कुछ सेक्टर ऐसे होंगे, जिनमें नौकरी के अवसर लगातार बने रहेंगे और बढ़ते रहेंगे। संभवत: ऐसा भी हो सकता है कि एक या दो भर्ती की जगह अब यह पांच से छह पर पहुंच जाए।
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