A फॉर अर्जुन, B फॉर बलराम...बच्चों को हिंदू माइथोलॉजी सिखाने का गजब तरीका, ऐसा है A To Z

Published : Nov 01, 2022, 01:01 PM ISTUpdated : Nov 01, 2022, 03:12 PM IST
A फॉर अर्जुन, B फॉर बलराम...बच्चों को हिंदू माइथोलॉजी सिखाने का गजब तरीका, ऐसा है A To Z

सार

यूपी के एक वकील ने छोटे बच्चों को हिंदी पौराणिक कथाओं और इतिहास को समझाने एक अनूठा तरीका निकाला है। कई पब्लिशर्स ने भी इसमें अपनी दिलचस्पी दिखाई है। इसका पीडीएफ सोशल मीडिया पर उपलब्ध है। सबकुछ सही रहा तो जल्द ही यह पब्लिश भी हो जाएगा।

करियर डेस्क: अब तक आपने A फ़ॉर एप्पल, B फ़ॉर बॉल पढ़ा होगा, लेकिन अब A फ़ॉर अर्जुन और B फ़ॉर बलराम पढ़िए। जी हां, बच्चों को हिंदू माइथोलोजी (Hindu Mythology) सिखाने के लिए उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के एक वकील ने गजब का तरीका निकाला है। सीतापुर (Sitapur) के रहने वाले वकील ने बच्चों को अंग्रेजी सिखाने के लिए यह तरीका निकाला है। उनका मकसद है बच्चों को वर्णमाला और हिंदू पौराणिक कथाओं के साथ भारतीय इतिहास से जुड़े शब्दों को सिखाना। उन्होंने इसका बाकायदा एक भी चार्ट तैयार किया है। 

पब्लिशर्स ने दिखाया इंट्रेस्ट
कथित तौर पर यह भी कहा जा रहा है कि पब्लिशर्स ने भी इसमें इंट्रेस्ट दिखाया है। सब कुछ सही रहा तो जल्द ही ये चार्ट आपके सामने होगा। वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ शिक्षकों का कहना है कि यह बच्चों के लिए एक अलग अनुभव होगा और इससे वे बचपन से ही भारतीय संस्कृति से परिचित हो सकेंगे। बता दें कि इस अंग्रेजी वर्णमाला की पीडीएफ फाइल सोशल मीडिया पर उपलब्ध है।

पौराणिक कथाओं से लिए गए वर्ण
आमतौर पर घर या स्कूल में बच्चे अंग्रेजी वर्णमाला में A फॉर एप्पल और B फ़ॉर बॉल पढ़ते हैं। लेकिन अब, बच्चे A फॉर अर्जुन और B फ़ॉर बलराम पढ़ सकते हैं, जो भारतीय पौराणिक कथाओं से जुड़े चेहरे हैं। सोशल मीडिया पर कई शिक्षक इसके बारें में बता रहे हैं। इसमें भारतीय पौराणिक संस्कृति और इतिहास से A से Z तक के शब्द लिए गए हैं।

हिंदी की ऐसी ही शब्दावली
एक मीडिया हाउस से बातचीत में अमीनाबाद इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल एसएल मिश्रा ने बताया कि वकील मीडिया के सामने नहीं आना चाहते हैं। उन्होंने एक शानदार शब्दावली तैयार की है। मिश्रा ने कहा कि इसे बनाने वाले अधिवक्ता हिंदी वर्णमाला के लिए भी कुछ इसी तरह की शब्दावली (Vocabulary) तैयार कर रहे हैं। यह भी जल्द ही सामने आ जाएगा। ऐसे करने से बच्चों का जुड़ाव भारतीय संस्कृति और इतिहास से होगा। पौराणिक कथाओं में उनकी रूचि जगेगी।

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