क्या 75% से कम अंक पाने वाले JEE Advanced 2026 क्वालिफ़ायर भी IIT सीट हासिल कर सकते हैं? IIT Roorkee ने अचानक काउंसलिंग से बाहर होने का खतरा क्यों टाल दिया? 56,880 सफल उम्मीदवारों के बीच 15 जुलाई की डेडलाइन क्यों बनी सबसे बड़ा सस्पेंस? क्या CBSE मार्किंग विवाद हजारों छात्रों की IIT पात्रता बदल सकता है?
नई दिल्ली/रुड़की: देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों (IITs) में दाखिले की उम्मीद लगाए बैठे हज़ारों छात्रों के लिए एक ऐसी खबर आई है, जिसने सस्पेंस और राहत का एक नया अध्याय लिख दिया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) के मार्किंग सिस्टम से उपजे विवाद के बीच, इस साल JEE एडवांस्ड 2026 आयोजित कर रहे IIT रुड़की ने अचानक एक बड़ा फैसला सुनाया है। संस्थान ने 12वीं कक्षा में 75% अंकों की अनिवार्य शर्त को लेकर चल रहे तनाव के बीच छात्रों को जीवनदान दे दिया है।

बोर्ड नतीजों का खौफ: जब ऑन-स्क्रीन मार्किंग ने छीनी छात्रों की नींद
इस साल की शुरुआत इंजीनियरिंग के उम्मीदवारों के लिए किसी बुरे सपने जैसी रही। परीक्षा में शानदार रैंक हासिल करने के बावजूद, हज़ारों छात्र उस वक्त गहरे डिप्रेशन में चले गए जब CBSE के नए ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम के नतीजे सामने आए। इस तकनीकी व्यवस्था के चलते कई होनहार छात्रों के मार्क्स उम्मीद से बेहद कम रह गए।
नतीजतन, जिन छात्रों ने देश की सबसे कठिन परीक्षा 'JEE एडवांस्ड' को क्रैक कर लिया था, वे अपनी 12वीं की पात्रता (Eligibility Criterion) खोने के कगार पर पहुंच गए थे। हर तरफ ग्रेस मार्क्स की मांग उठ रही थी और आईआईटी में एडमिशन की उम्मीदें धुंधली होती दिख रही थीं। तभी, जॉइंट एडमिशन बोर्ड (JAB) और IIT रुड़की ने हस्तक्षेप करने का फैसला किया।
आखिर क्यों बढ़ा था इतना बड़ा विवाद?
इस वर्ष CBSE के ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन सिस्टम को लेकर कई छात्रों और अभिभावकों ने सवाल उठाए। अनेक विद्यार्थियों का दावा था कि उन्हें अपेक्षा से काफी कम अंक मिले हैं। इसके बाद ग्रेस मार्क्स और पुनर्मूल्यांकन की मांग तेज हो गई। यही कारण था कि हजारों JEE क्वालिफ़ायर छात्रों के सामने एक विचित्र स्थिति बन गई थी। उन्होंने देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की, लेकिन बोर्ड अंकों के कारण उनका भविष्य अधर में दिखाई देने लगा था।
आधी रात का फरमान: 75% की शर्त में ढील या सिर्फ एक समय सीमा?
सस्पेंस को खत्म करते हुए, IIT रुड़की ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'X' पर एक ऐसा नोटिस जारी किया जिसने काउंसलिंग की पूरी बाजी पलट दी। संस्थान ने साफ किया कि जिन उम्मीदवारों के कक्षा 12 में $75\%$ (सामान्य/OBC-NCL/EWS) या $65\%$ (SC/ST/PwD) से कम अंक हैं, उन्हें काउंसलिंग प्रक्रिया से तुरंत बाहर नहीं किया जाएगा।
IIT रुड़की का आधिकारिक बयान: "आप अभी अपनी पसंद (Choice Filling) भरने के पूरी तरह पात्र हैं और आपकी रैंक के आधार पर आपको सीटें आवंटित की जाएंगी। हालांकि, यह राहत हमेशा के लिए नहीं है।" संस्थान ने छात्रों के सिर पर एक समय सीमा (Deadline) की तलवार भी लटका दी है। उम्मीदवारों को अपनी पात्रता साबित करने के लिए 15 जुलाई, 2026 तक का समय दिया गया है। इस तारीख तक छात्रों को अपना संशोधित (Revised) स्कोरकार्ड ईमेल के जरिए जमा करना होगा, जिसके बाद ही चौथे राउंड के अंत में मिली सीट पर उनका एडमिशन कन्फर्म माना जाएगा।
आंकड़ों में छिपी बड़ी कहानी
इस साल JEE एडवांस्ड 2026 का मुकाबला वैसे भी बेहद कड़ा था। इस बार कुल 56,880 उम्मीदवारों ने परीक्षा पास की है, जो इस क्षेत्र में बढ़ती गलाकाट प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है। लेकिन असली चौंकाने वाले आंकड़े महिला उम्मीदवारों की तरफ से आए हैं। इस साल कुल 10,107 महिला उम्मीदवारों ने सफलता का परचम लहराया है। यदि साल 2019 के आंकड़ों से इसकी तुलना की जाए, तो यह लगभग $89\%$ की एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व बढ़ोतरी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और संस्थानों द्वारा इंजीनियरिंग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए शुरू की गई विशेष पहलों और सुपरन्यूमरेरी सीटों का यह सीधा और सुखद परिणाम है।


