क्या होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिका-ईरान टकराव बड़े युद्ध का संकेत है? क्या चार ड्रोन गिराए जाने के बाद रडार ठिकानों पर हमला तनाव को और बढ़ाएगा? क्या दुनिया की तेल और गैस सप्लाई अब नए खतरे के साए में है? क्या खाड़ी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियां वैश्विक बाजारों को झटका देने वाली हैं?

Strait of Hormuz Crisis: दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक रूप से अहम समुद्री रास्ते, होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी सेना ने ईरानी सीमा के भीतर घुसकर उसके तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर भीषण हमले किए हैं। इस सैन्य कार्रवाई के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हड़कंप मच गया है।

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आसमान में मंडराता काल: चार आत्मघाती ड्रोन और अमेरिकी एक्शन

इस हाई-वोल्टेज ड्रामे की शुरुआत तब हुई जब ईरान की ओर से एक के बाद एक, चार वन-वे (आत्मघाती) अटैक ड्रोन आसमान में उड़ते दिखाई दिए। इन ड्रोनों का रुख सीधे होर्मुज़ जलडमरूमध्य की ओर था, जहाँ से दुनिया का एक-तिहाई कच्चे तेल का व्यापार गुजरता है। अमेरिकी खुफिया तंत्र और राडार ने इन ड्रोनों को ट्रैक किया। CENTCOM के अनुसार, ये ड्रोन अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन और समुद्री यातायात के लिए "तत्काल और गंभीर खतरा" बन चुके थे। इससे पहले कि ये ड्रोन अपने लक्ष्य को भेद पाते, अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने जवाबी कार्रवाई करते हुए चारों आत्मघाती ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया। लेकिन, कहानी यहीं खत्म नहीं हुई; यह तो बस एक बड़े सैन्य टकराव की शुरुआत थी।

सर्जिकल स्ट्राइक: गोरुक और केशम द्वीप पर अमेरिकी बमबारी

ड्रोनों को आसमान में तबाह करने के ठीक बाद, वॉशिंगटन से हरी झंडी मिलते ही अमेरिकी सेना ने अपनी आक्रामक रणनीति बदल दी। अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के तटीय रडार नेटवर्क को पंगु बनाने के लिए सीधे ईरानी सरजमीं को निशाना बनाया। अमेरिकी सेना ने ईरान के गोरुक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'केशम द्वीप' (Qeshm Island) पर स्थित तटीय निगरानी रडार ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए। CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक आधिकारिक बयान जारी कर इस ऑपरेशन की पुष्टि की। अमेरिकी कमान ने इसे पूरी तरह से एक "बचाव का कदम" बताया है। वॉशिंगटन का तर्क है कि इन रडार ठिकानों को नष्ट करना बेहद जरूरी था ताकि भविष्य में होने वाले ड्रोन हमलों को रोका जा सके और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में नेविगेशन की आज़ादी की रक्षा की जा सके।

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ईरान का 'वार्निंग शॉट्स' और पर्दे के पीछे की कहानी

इस भीषण अमेरिकी हमले से ठीक पहले खाड़ी के पानी में हलचल बेहद तेज हो गई थी। ईरानी मीडिया और वहां की अर्ध-सरकारी 'मेहर समाचार एजेंसी' ने खबर दी थी कि ईरानी सेना ने शनिवार को होर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास कई 'चेतावनी वाले शॉट' (Warning Shots) दागे थे। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि अमेरिकी नौसेना के जहाजों ने इस संकरे जलमार्ग में अपनी पोजीशन बदलने की कोशिश की थी, जिसके जवाब में ईरान को यह कदम उठाना पड़ा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के ये वॉर्निंग शॉट्स और उसके बाद भेजे गए चार अटैक ड्रोन, अमेरिका को अपनी ताकत दिखाने की एक सोची-समझी कोशिश थी, जो उल्टी पड़ गई।

क्या थम जाएगी दुनिया की धड़कन? वैश्विक बाजारों पर मंडराया संकट

होर्मुज़ जलडमरूमध्य को दुनिया का सबसे बड़ा 'ऊर्जा चोकपॉइंट' माना जाता है। वैश्विक अर्थव्यवस्था की रगों में दौड़ने वाले तेल और गैस का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। यहां होने वाली एक भी चिंगारी पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा सकती है। CENTCOM ने साफ कर दिया है कि वे सतर्क हैं और ईरान की किसी भी "अनुचित आक्रामकता" का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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क्या खाड़ी क्षेत्र किसी बड़े संघर्ष की ओर बढ़ रहा है?

अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी सेनाओं और सहयोगियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा। दूसरी ओर, ईरान भी क्षेत्र में अपनी सैन्य उपस्थिति और गतिविधियों को कम करने के संकेत नहीं दे रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह घटना केवल एक सीमित सैन्य मुठभेड़ है या फिर आने वाले दिनों में खाड़ी क्षेत्र किसी बड़े भू-राजनीतिक संकट का केंद्र बनने वाला है? फिलहाल दोनों देशों के बीच अविश्वास गहराता दिखाई दे रहा है, जबकि पूरी दुनिया इस तनावपूर्ण घटनाक्रम के अगले अध्याय का इंतजार कर रही है।