क्या Trump की मंज़ूरी रुकने से US-Iran ceasefire डील टूट जाएगी? क्या Strait of Hormuz फिर बंद होकर दुनिया में तेल संकट पैदा करेगा? ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच क्या मध्य पूर्व नए युद्ध की ओर बढ़ रहा है? क्या ईरान का परमाणु मुद्दा वैश्विक टकराव की नई चिंगारी बनेगा?

Donald Trump Iran Deal: मध्य पूर्व एक बार फिर उस बारूद के ढेर पर खड़ा है, जहाँ कूटनीति की एक छोटी सी चिंगारी या तो शांति का रास्ता दिखाएगी या फिर पूरी दुनिया को एक विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध में झोंक देगी। अमेरिका और ईरान के बीच होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने और 60 दिनों के संघर्ष विराम को लेकर पर्दे के पीछे एक बड़ी बिसात बिछाई जा रही है। लेकिन इस गुप्त समझौते की भनक लगते ही वैश्विक बाज़ारों और सैन्य गलियारों में सस्पेंस गहरा गया है। सवाल यह है कि क्या यह सचमुच शांति की सुबह है या किसी बड़े महायुद्ध से पहले का सन्नाटा?

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 महाशक्तियों का सीक्रेट गेम: क्या दांव पर लगी है दुनिया की धड़कन?

सूत्रों की मानें तो वाशिंगटन और तेहरान के बीच एक बेहद गोपनीय समझौते का मसौदा तैयार हो चुका है। इस डील का सबसे संवेदनशील हिस्सा है दुनिया की लाइफलाइन-होरमुज़ जलडमरूमध्य। प्रस्ताव के मुताबिक, अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी में ढील देगा और ईरान के तेल निर्यात पर लगे कड़े प्रतिबंधों को आंशिक रूप से हटाएगा। लेकिन इसके बदले ईरान को जो करना है, उसने रणनीतिकारों की सांसें अटका दी हैं। ईरान को महज 30 दिनों के भीतर इस समुद्री मार्ग में बिछाई गई अपनी घातक बारूदी सुरंगों (Naval Mines) को साफ करना होगा। यह वही रास्ता है जहाँ से पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। अगर यहाँ एक भी चूक हुई, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था ताश के पत्तों की तरह ढह जाएगी।

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ट्रंप की रहस्यमयी 'खामोशी' और तेहरान का खौफनाक सस्पेंस

इस पूरी बातचीत के बीच सबसे बड़ा सस्पेंस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का रुख बना हुआ है। व्हाइट हाउस के भीतर से आ रही खबरें बताती हैं कि ट्रंप इस शुरुआती डील से बिल्कुल संतुष्ट नहीं हैं। वह किसी भी ऐसे समझौते पर दस्तखत करने के मूड में नहीं हैं जो 2015 की परमाणु डील (JCPOA) से ज्यादा सख्त और आक्रामक न दिखे। उधर तेहरान ने भी अपने पत्ते नहीं खोले हैं। ईरानी कमांडरों का साफ कहना है कि जब तक प्रतिबंध पूरी तरह नहीं हटते, तब तक कागज़ के इन टुकड़ों की कोई कीमत नहीं है। दोनों देशों के राष्ट्रध्यक्षों की यह तनातनी इस समझौते को बेहद नाजुक मोड़ पर ले आई है।

कागज़ पर दस्तखत, आसमान में बारूद: युद्धविराम के बीच किसने दागी मिसाइलें?

सबसे चौंकाने वाला विरोधाभास ज़मीन पर देखने को मिल रहा है। एक तरफ कूटनीतिज्ञ न्यू यॉर्क और जिनेवा में हाथ मिला रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बंदर अब्बास के पास ईरान के पांच खोजी ड्रोन्स को मार गिराया है। इसके जवाब में जो हुआ, उसने मध्य पूर्व को हिलाकर रख दिया।

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कुवैत के आसमान में अचानक सायरन गूंज उठे जब वहां एक बैलिस्टिक मिसाइल को इंटरसेप्ट किया गया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने खुलेआम इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया कि उन्होंने उस अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया है जहाँ से उनके ड्रोन्स पर हमले हुए थे। कुवैत ने इसे "आपराधिक ईरानी कार्रवाई" करार दिया है, जिसने इस तथाकथित शांति वार्ता की धज्जियाँ उड़ा दी हैं।

विनाश का काउंटडाउन: क्या ये सिर्फ तूफान से पहले की खामोशी है?

इस खूनी लुकाछिपी ने यह साबित कर दिया है कि दोनों शक्तियों के बीच भरोसे का पैमाना शून्य पर है। होरमुज़ जलडमरूमध्य इस समय बारूद के ऐसे ढेर पर है जहाँ किसी भी एक सैनिक की उंगली अगर ट्रिगर पर कांपी, तो वह तीसरे विश्व युद्ध का बटन दबा देगी। दुनिया की निगाहें अब वॉशिंगटन और तेहरान के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या यह 60 दिनों की मोहलत तबाही को टाल पाएगी, या फिर यह आने वाले भयानक तूफान का सिर्फ एक खामोश आगाज़ है?