DU Political Science सिलेबस से इस्लाम-पाकिस्तान-चीन पर कोर्स हटे, प्रोफेसर्स में मतभेद, जानें पूरा मामला

Published : Jun 26, 2025, 10:38 AM ISTUpdated : Jun 26, 2025, 10:39 AM IST
Delhi University

सार

DU Syllabus Change: दिल्ली यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल साइंस के सिलेबस से पाकिस्तान और चीन से जुड़े विषय हटाए जाने पर विवाद बढ़ रहा है। शिक्षकों में इस फैसले को लेकर अलग-अलग मत है, कुछ इसे 'शैक्षणिक सेंसरशिप' तो कुछ 'राष्ट्रहित' बता रहे हैं। जानिए

DU Syllabus Controversy: दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में पोस्टग्रेजुएट पॉलिटिकल साइंस के कुछ इंपोर्टेंट ऑप्शनल सब्जेक्ट्स को हटाने के फैसले ने एक नई बहस को जन्म दे दिया है। यूनिवर्सिटी की स्टैंडिंग कमेटी फॉर एकेडमिक मैटर्स की बैठक में ‘इस्लाम एंड इंटरनेशनल रिलेशंस’, ‘पाकिस्तान एंड द वर्ल्ड’, ‘चाइना इन द कंटेम्पररी वर्ल्ड’ और ‘स्टेट एंड सोसाइटी इन पाकिस्तान’ जैसे चार महत्वपूर्ण विषयों को हटाने का प्रस्ताव पास कर दिया गया है। वहीं, एक और पेपर ‘रिलिजियस नेशनलिज्म एंड पॉलिटिकल वायलेंस’ पर अगली बैठक 1 जुलाई को होगी, जिसमें फैसला होगा। इस बदलाव पर शिक्षकों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे "शैक्षणिक सेंसरशिप" बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे "राष्ट्रहित में जरूरी बदलाव" मान रहे हैं।

पाकिस्तान-चीन को हटाना अकादमिक दृष्टि से गलत: प्रोफेसर मोनामी सिन्हा

कमेटी की सदस्य और प्रोफेसर मोनामी सिन्हा ने इस फैसले पर खुलकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और चीन जैसे देशों का अध्ययन आज की भू-राजनीतिक स्थिति को समझने के लिए बेहद जरूरी है। अगर हम अपने पड़ोसी देशों को पढ़ाना ही बंद कर देंगे, तो छात्रों की सोच संकीर्ण हो जाएगी। इस तरह के बदलाव आलोचनात्मक सोच को खत्म कर सकते हैं। सिन्हा ने यह भी कहा कि सोशलॉजी और जियोग्राफी के सिलेबस में भी जाति, सांप्रदायिक हिंसा और समलैंगिक संबंधों जैसे मुद्दों को हटा दिया गया है, जो बेहद चिंता का विषय है।

भारत-केंद्रित सिलेबस होना चाहिए: प्रोफेसर हरेंद्र तिवारी का पक्ष

वहीं, कमेटी के ही एक अन्य सदस्य प्रोफेसर हरेंद्र तिवारी ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा कि सिलेबस को अब भारत-प्रथम दृष्टिकोण से तैयार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिर्फ इस्लाम और इंटरनेशनल रिलेशंस पर पेपर क्यों? हिंदू धर्म या सिख धर्म पर क्यों नहीं? हम ऐसा कोर्स चाहते हैं जो छात्रों के साथ-साथ देश के हित में भी हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक हटाए गए पेपर्स में संतुलित और राष्ट्रहित से जुड़ा कंटेंट नहीं जोड़ा जाता, तब तक उन्हें वापस नहीं लाया जाएगा।

1 जुलाई को अगली बैठक, शिक्षा की दिशा पर फिर होगा मंथन

अगली बैठक 1 जुलाई को होनी है, जिसमें ‘धार्मिक राष्ट्रवाद और राजनीतिक हिंसा’ विषय को लेकर चर्चा की जाएगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि शिक्षा नीति में बदलाव का यह दौर छात्रों के ज्ञान को और समृद्ध करता है या महत्वपूर्ण मुद्दों से उनकी दूरी बढ़ाता है।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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