
Anushka Kale Cambridge Union President 2025: भारतीय मूल की 20 वर्षीय अनुष्का काले ने अपने नाम एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। वे दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटियों में से एक, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी की कैंब्रिज यूनियन सोसाइटी की अध्यक्ष चुनी गई हैं। इस ऐतिहासिक जीत के साथ अनुष्का ने न केवल अपने परिवार बल्कि भारतीय समुदाय का भी नाम रोशन किया है।
अनुष्का ने यह चुनाव बिना किसी विरोध के जीता। यह कैंब्रिज यूनियन सोसाइटी के इतिहास में सिर्फ चौथी बार हुआ है, जब किसी उम्मीदवार ने बिना मुकाबले जीत हासिल की। उन्होंने 126 वोट हासिल किए और अपने चुनावी अभियान में विविधता और पहुंच (Diversity and Access) को मुख्य मुद्दा बनाया।
अनुष्का कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के सिडनी ससेक्स कॉलेज में अंग्रेजी साहित्य की छात्रा हैं। फिलहाल, वे यूनियन सोसाइटी में डिबेटिंग ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। वे इस अनुभव को अध्यक्ष के रूप में अपने कार्यकाल में उपयोग करते हुए यूनियन के सांस्कृतिक और सामाजिक जुड़ाव को और मजबूत करने का इरादा रखती हैं।
अनुष्का ने अपने चुनावी अभियान में छात्रों के हितों को प्राथमिकता दी। उनके कुछ प्रमुख वादे थे:
विविधता को बढ़ावा: यूनियन में अलग-अलग पृष्ठभूमि के छात्रों को अधिक प्रतिनिधित्व देना।
सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करना: यूनिवर्सिटी के सांस्कृतिक और एक्सेस-आधारित सोसाइटियों के साथ बेहतर तालमेल बनाना।
सदस्यों के लिए सस्ती टिकट: यूनियन की गतिविधियों में भाग लेने के लिए किफायती टिकट की व्यवस्था।
अपनी जीत पर खुशी व्यक्त करते हुए अनुष्का ने कहा- "कैंब्रिज यूनियन सोसाइटी की अध्यक्ष चुने जाने पर मैं गर्व महसूस कर रही हूं। मेरे कार्यकाल का उद्देश्य विविधता और समावेशिता को बढ़ाना और सांस्कृतिक संगठनों के साथ बेहतर संबंध बनाना होगा।"
कैंब्रिज यूनियन सोसाइटी दुनिया की सबसे पुरानी और प्रतिष्ठित डिबेटिंग सोसाइटियों में से एक है। यह स्वतंत्र विचार और अभिव्यक्ति के लिए जानी जाती है। इसके पूर्व अध्यक्षों में महान अर्थशास्त्री जॉन मेनार्ड केन्स, लेखक रॉबर्ट हैरिस और भारतीय मूल के उद्यमी करन बिलिमोरिया जैसे दिग्गज शामिल रहे हैं। इस मंच पर थियोडोर रूजवेल्ट, रॉनल्ड रीगन, विंस्टन चर्चिल, मार्गरेट थैचर, स्टीफन हॉकिंग, और दलाई लामा जैसी हस्तियां अपने विचार शेयर कर चुकी हैं।
अनुष्का काले की यह उपलब्धि भारतीय समुदाय के लिए गर्व का विषय है। उनकी यह सफलता न केवल उनके नेतृत्व कौशल को दर्शाती है बल्कि कैंब्रिज यूनिवर्सिटी में भारतीय मूल के छात्रों की बढ़ती उपस्थिति और प्रभाव को भी दिखाती है।
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