क्या आप जानते हैं "हाथ कंगन को आरसी क्या" का मतलब?

Published : Oct 01, 2024, 10:06 AM IST
Interesting muhavare

सार

Muhavare: मुहावरे हमारी भाषा को रोचक और अर्थपूर्ण बनाते हैं। 'नानी याद आना' से लेकर 'बांछें खिलना' तक, ये मुहावरे हमारे दैनिक जीवन में रंग भरते हैं। आइए, इनके पीछे छिपे गहरे अर्थ और सांस्कृतिक संदर्भों को समझें।

Muhavare: मुहावरे हमारी भाषा की सुंदरता और गहराई को बयां करते हैं। इनका इस्तेमाल न सिर्फ हमारी बातों में रोचकता लाता है, बल्कि उनके पीछे छिपे गहरे अर्थ हमारे भावों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करते हैं। हर मुहावरा अपने आप में एक छोटी सी कहानी कहता है, जो सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भों से जुड़ी होती है। आइए, कुछ मजेदार और अनोखे मुहावरों को विस्तार से समझें, ताकि आप भी इनका सही मौके पर इस्तेमाल कर अपनी बातों को और भी दिलचस्प बना सकें।

मुहावरा- "नानी याद आना"

मुहावरे का अर्थ: बहुत अधिक कष्ट या परेशानी में होना। जब कोई व्यक्ति अत्यधिक कठिनाई या दर्द में होता है, तब उसे यह मुहावरा कहा जाता है, जैसे कष्ट इतना गहरा हो कि नानी की देखभाल और प्यार याद आने लगे।

मुहावरा- "खून पसीना एक करना"

मुहावरे का अर्थ: बहुत मेहनत करना। जब कोई व्यक्ति पूरी ताकत और मेहनत से किसी काम में जुटा हो, तो उसे कहा जाता है कि उसने ‘खून पसीना एक कर दिया’। इसका मतलब होता है कि उस काम के लिए उन्होंने अत्यधिक परिश्रम किया।

मुहावरा- "सांप सूंघ जाना"

मुहावरे का अर्थ: अचानक से चुप हो जाना। जब कोई व्यक्ति किसी कारणवश अचानक चुप हो जाता है, जैसे उसे कोई जवाब न मिले या डर से बोलने की हिम्मत न हो, तो उसे कहा जाता है कि उसे ‘सांप सूंघ गया’।

मुहावरा- "दाल में काला होना"

मुहावरे का अर्थ: किसी काम में धोखाधड़ी या गड़बड़ी होना। जब किसी काम या घटना में कुछ संदिग्ध या छिपा हुआ हो, तो इसे ‘दाल में काला’ कहा जाता है। यह संकेत करता है कि सतह पर सब कुछ ठीक नहीं है।

मुहावरा- "हाथ कंगन को आरसी क्या"

मुहावरे का अर्थ: स्पष्ट चीज को प्रमाणित करने की जरूरत नहीं। यह मुहावरा तब इस्तेमाल होता है जब किसी बात को प्रमाणित करने की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि वह स्वयं स्पष्ट होती है, जैसे कि हाथ में कंगन को देखने के लिए किसी आरसी (दर्पण) की आवश्यकता नहीं होती।

मुहावरा- "बांछें खिलना"

मुहावरे का अर्थ: अत्यधिक प्रसन्नता होना। जब किसी के चेहरे पर अत्यधिक खुशी और संतोष दिखाई देता है, तब कहा जाता है कि उसकी ‘बांछें खिल गईं’। यह मुहावरा किसी अच्छी खबर या उपलब्धि से जुड़ी खुशी को दर्शाता है।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...

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