
NCERT Textbook Controversy 2025: देश के स्कूली बच्चों को पढ़ाई जाने वाली किताबों में बदलाव के बाद अब NCERT (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) के सामने कई सवाल खड़े हो गए हैं। अलग-अलग राज्यों के लोगों और इतिहासकारों ने कुछ किताबों में दिए गए तथ्यों पर आपत्ति जताई है। इसे लेकर NCERT ने अब एक अहम कदम उठाते हुए विशेषज्ञों की एक कमेटी गठित की है, जो इन सभी फीडबैक और शिकायतों की जांच करेगी।
NCERT ने हाल ही में कक्षा 1 से 12 तक की किताबों को नए पाठ्यक्रम के अनुसार अपडेट किया है। क्लास 8 तक की किताबें पहले ही आ चुकी हैं और 9 से 12वीं की किताबें साल के आखिर तक आने वाली हैं। लेकिन जैसे-जैसे नई किताबें आईं, वैसे-वैसे कई हिस्सों को लेकर सवाल उठने लगे। एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार इनमें से कुछ बड़ी आपत्तियां हैं, जिसमें- राजस्थान के जैसलमेर को कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब में मराठा साम्राज्य का हिस्सा बताया गया है। असम के अहोम साम्राज्य से जुड़ी जानकारी को लेकर भी विवाद हुआ है। वहीं, ओडिशा के 1817 के पाइका विद्रोह को किताब से हटाने पर भी कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है।
जैसलमेर के पूर्व शाही परिवार के वंशज चैतन्य राज सिंह ने किताब में जैसलमेर को मराठा साम्राज्य का हिस्सा दिखाने को इतिहास से छेड़छाड़ बताया है। उन्होंने इसे गलत, भ्रामक और एजेंडा-प्रेरित बताते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इसमें सुधार की मांग की है।
ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने 1817 के पाइका विद्रोह को इतिहास की किताब से हटाने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यह ओडिशा के इतिहास में एक बड़ा मोड़ था और इसे नजरअंदाज करना पाइका योद्धाओं की कुर्बानी को कम करना है।
अभिनेता आर. माधवन ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय दी है। उन्होंने कहा कि किताबों में मुगल और ब्रिटिश शासन को तो खूब जगह दी गई है, लेकिन दक्षिण भारत के चोल, पांड्य, पल्लव और चेर वंश को बहुत कम महत्व मिला है।
इस पूरे मामले की जांच के लिए NCERT के डिपार्टमेंट ऑफ करिकुलम स्टडीज एंड डवलपमेंट की प्रमुख प्रोफेसर रंजना अरोड़ा की अगुवाई में एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी तमाम फीडबैक और ऐतिहासिक फैक्ट्स की समीक्षा करेगी और फिर अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द NCERT को सौंपेगी।
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NCERT ने साफ किया है कि जब भी किसी किताब की सामग्री को लेकर व्यापक प्रतिक्रिया मिलती है, तो उसकी समीक्षा करना उनकी नीति का हिस्सा होता है। अगर किसी हिस्से में सुधार की जरूरत पाई जाती है, तो उस पर उचित कार्रवाई की जाती है। फिलहाल समिति इन बिंदुओं पर ध्यान दे रही है-
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