LIFT के अंदर क्यों लगा होता है शीशा? जानिए इसके पीछे का साइंस

Published : Dec 20, 2025, 04:21 PM IST
mirror in lift

सार

लिफ्ट में शीशे सिर्फ सजावट के लिए नहीं होते। ये व्हीलचेयर वालों की मदद, बंद जगह के डर को कम करने और सुरक्षा बढ़ाने जैसे कई महत्वपूर्ण काम करते हैं। शीशे लिफ्ट को बड़ा और रोशन दिखाकर सफर को आरामदायक बनाते हैं।

चाहे ऑफिस हो, मॉल हो, अस्पताल हो या होटल, हर लिफ्ट में एक चीज कॉमन होती है - वहां हमेशा एक शीशा लगा होता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि लोगों को एक मंजिल से दूसरी मंजिल तक ले जाने वाली इस लिफ्ट में शीशे का क्या काम है? अगर आपको लगता है कि यह सिर्फ सजावट का हिस्सा है, तो आप गलत हैं। जी हां, लिफ्ट में शीशा होने के पीछे एक गहरी सोच और वैज्ञानिक वजह है। आइए, इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

व्हीलचेयर वालों के लिए सुविधा

व्हीलचेयर इस्तेमाल करने वालों के लिए लिफ्ट के अंदर मुड़ना या पीछे की ओर निकलना एक चुनौती हो सकती है। छोटे से केबिन में जगह बहुत कम होती है। ऐसे में शीशे बहुत मददगार साबित होते हैं। शीशे से पीछे का साफ नजारा दिखता है, जिससे लिफ्ट से बाहर निकलना या मुड़ना आसान हो जाता है। इस तरह, शीशे सुरक्षित रूप से आने-जाने में मदद करते हैं।

डर को कम करता है

लिफ्ट के अंदर बंद और छोटी जगह कई लोगों को बेचैन कर सकती है। कुछ लोगों को क्लॉस्ट्रोफोबिया (बंद जगह का डर) महसूस हो सकता है। ऐसे में शीशा लिफ्ट को देखने में बड़ा दिखाता है। जब जगह बड़ी महसूस होती है, तो घुटन और घबराहट अपने आप कम हो जाती है। अगर आप थोड़ा घबरा भी रहे हों, तो अपनी परछाई को देखने से एक अपनेपन का एहसास होता है और मन शांत होता है। यही वजह है कि ज्यादातर लोगों को कांच वाली लिफ्ट में सफर करना ज्यादा आरामदायक लगता है।

सुरक्षा बढ़ाने में भी बड़ी भूमिका

लिफ्ट में लगा शीशा सिर्फ दिखावे के लिए नहीं है, यह एक सुरक्षा उपाय भी है। इससे केबिन का हर कोना दिखाई देता है। आप आसानी से देख सकते हैं कि आपके पीछे कौन खड़ा है या दरवाजे के पास कौन आ रहा है। यह जागरूकता किसी भी अजीब या असुरक्षित स्थिति को रोकने में मदद करती है। जब लोग एक-दूसरे को साफ-साफ देख पाते हैं, तो माहौल ज्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद लगता है, खासकर रात में या कम भीड़ वाली इमारतों में।

समय लंबा नहीं लगता

लिफ्ट का सफर कुछ ही सेकंड का होता है, लेकिन कभी-कभी यह बहुत लंबा लगने लगता है। खाली दीवारों को घूरते रहने से समय और धीरे कटता है। लेकिन शीशे इस बोरियत को तोड़ते हैं। लोग अनजाने में ही अपनी परछाई देखने लगते हैं, जिससे उनका ध्यान बंट जाता है और कुछ सेकंड का सफर आराम से कट जाता है।

सजावट और रोशनी दोनों बढ़ाता है

शीशे रोशनी को रिफ्लेक्ट करते हैं, जिससे छोटा सा केबिन भी ज्यादा रोशन और बड़ा दिखता है। यह लिफ्ट के पूरे लुक को एक मॉडर्न और साफ-सुथरा एहसास देता है। पुरानी इमारतों में भी, एक शीशा लगाने से लिफ्ट का पूरा माहौल बेहतर हो सकता है, जिससे वह आकर्षक और वेलकमिंग लगती है।

कई काम आसान बनाता है

लोग अक्सर लिफ्ट में चढ़ते समय अपने कपड़े ठीक करते हैं, बाल संवारते हैं या खुद को एक नजर देख लेते हैं। यह छोटी सी सुविधा कई लोगों के लिए रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। इसके अलावा, जब पूरी लिफ्ट दिखाई देती है, तो लोगों के एक-दूसरे से टकराने या धक्का-मुक्की होने की संभावना भी कम हो जाती है।

PREV

Education News: Read about the Latest Board Exam News, School & Colleges News, Admission news in hindi, Cut-off list news - Asianet Hindi

AT
About the Author

Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
Read more Articles on

Recommended Stories

CBSE Counseling 2026: बोर्ड छात्रों के लिए IVRS और टेली-काउंसलिंग सर्विस शुरू, जानें कैसे लें मदद
Anil Agarwal Daughter: अनिल अग्रवाल की बेटी प्रिया अग्रवाल हेब्बार कौन है, जानिए क्या करती है