इस बिहारी गरीब माता-पिता ने बेटे की पढ़ाई के लिए गिरवी रख दी जमीन, अब बेटा इसरो में करेगा कमाल

Published : Jan 08, 2024, 05:28 PM ISTUpdated : Jan 09, 2024, 10:12 AM IST
Tapeshwar Kumar isro

सार

बिहार के रहने वाले तपेश्वर को पढ़ाई के दौरान आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ा, लेकिन अपने माता-पिता के सपोर्ट ने उनकी हिम्मत को टूटने नहीं दिया। जानिए

बिहार के बरगाही के साधारण गांव से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में टेक्निकल असिस्टेंट बनने तक तपेश्वर कुमार की सफलता की कहानी दृढ़ संकल्प और विपरीत परिस्थितियों में भी सकारात्मक दृष्टिकोण का प्रमाण है। तपेश्वर के माता-पिता, श्याम बिहारी कुशवाहा और चंद्रावती देवी आर्थिक रूप से कमजोर थे। अपने बेटे को शिक्षा देने के लिए उन्हें कई चुनौतियों का सामना किया। एक दिन ऐसा भी आया जब इस गरीब माता-पिता ने अपने बेटे तपेश्वर के सपनों को पूरा करने के लिए अपनी जमीन गिरवी रख दी।

बिहिया हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की

तपेश्वर ने अपनी स्कूली पढ़ाई बरगाही गांव के सरकारी स्कूल से पूरी की। 2018 में बिहिया हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास की। फिर उन्होंने पटना न्यू गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में अपना डिप्लोमा पूरा किया।

टीचर ने यूट्यूब पर अपोलो मिशन के वीडियो से परिचित कराया

जब तपेश्वर 9वीं कक्षा में थे उनके जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ आया। उनके एक शिक्षक ने उन्हें यूट्यूब पर अपोलो मिशन के वीडियो के बारे में बताया। इससे तपेश्वर की स्पेस साइंस में गहरी रुचि जगी और वह स्पेस प्रोग्राम के मामले में भारत के टॉप संस्थान इसरो में शामिल होने का सपना देखने लगे।

मुफ्त ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प चुना

आर्थिक परेशानियों का सामना करते हुए, तपेश्वर ने दृढ़ संकल्प के साथ मुफ्त ऑनलाइन शिक्षा का विकल्प चुना जिससे उन्हें अंततः सफलता मिली। उनके माता-पिता ने गांव में 10 कट्ठा जमीन गिरवी रख दी, जिससे उन्हें 40,000 रुपये मिले और इस पैसे से तपेश्वर की एक साल तक पढ़ाई चलती रही। अपने सपने को पूरा करने के लिए, तपेश्वर ने इसरो के लिए टीसीएस परीक्षा दी। कोलकाता में एक लिखित परीक्षा और तमिलनाडु के नागरकोइल में एक स्किल टेस्ट के बाद, उन्हें टेक्निकल असिस्टेंट के रूप में चुना गया। 22 दिसंबर को फाइनल रिजल्ट में उन्हें सफलता मिली।

माता-पिता के अटूट समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया

तपेश्वर ने अपने माता-पिता के अटूट सपोर्ट के लिए उनका आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके चाचा, नंद जी महतो ने भी उन्हें आर्थिक रूप से पूरी मदद की तपेश्वर की निरंतर शिक्षा सुनिश्चित हो सके इसके लिए जरूरत पड़ने पर उन्होंने भी अपनी जमीन गिरवी रख दी। तपेश्वर कुमार जनवरी के अंत तक इसरो में टेक्निकल असिस्टेंट के रूप में अपनी जर्नी शुरू करते हुए श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश में योगदान देने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।

ये भी पढ़ें

कौन है 10 साल की लड़की Ju Ae, किम जोंग उन से ले रही Kingship ट्रेनिंग

बिना पासपोर्ट, 14,000 रुपये में BTS से मिलने निकली ये 3 स्कूली लड़कियां, दक्षिण कोरिया पहुंचने का बनाया अनोखा प्लान

PREV

Education News: Read about the Latest Board Exam News, School & Colleges News, Admission news in hindi, Cut-off list news - Asianet Hindi

AT
About the Author

Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...

Recommended Stories

JEE Main 2026 Session 1 Result Date: इस दिन आएगा रिजल्ट, NTA ने जारी किया नोटिस
CBSE Exam Guidelines 2026: रिपोर्टिंग टाइम से लेकर ड्रेस कोड तक सख्ती, छात्रों को दी गई ये खास चेतावनी