कौन थी महारानी येसूबाई भोसले, संभाजी महाराज ने जिनके साथ शेयर की थी सत्ता

Published : Jan 24, 2025, 05:17 PM ISTUpdated : Jan 24, 2025, 05:19 PM IST
Maharani Yesubai Bhosale

सार

Maharani Yesubai Bhosale: छावा में रश्मिका मंदाना द्वारा अभिनीत महारानी येसूबाई आखिर कौन थीं। जिन्होंने एक कुशल प्रशासक और योद्धा के रूप में स्वराज्य की रक्षा में अहम भूमिका निभाई। जानिए

Maharani Yesubai Bhosale: विक्की कौशल की बहुप्रतीक्षित पीरियड ड्रामा, छावा, अपने ट्रेलर के रिलीज होने के बाद से ही सोशल मीडिया पर धूम मचा रही है। फिल्म में विक्की छत्रपति संभाजी महाराज की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि रश्मिका मंदाना महारानी येसुबाई की भूमिका निभा रही हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महारानी येसुबाई आखिर कौन थी, जो छत्रपति संभाजी महाराज के युद्ध के मैदान में जाने पर सत्ता और पूरा राज्य बखूबी संभालती थीं।

महारानी येसूबाई भोसले कौन थीं?

महारानी येसूबाई भोसले का नाम मराठा इतिहास में साहस, नेतृत्व और त्याग के लिए अमर है। वह छत्रपति संभाजी महाराज की पत्नी थीं और मराठा साम्राज्य की दूसरी आधिकारिक रूप से राज्याभिषेकित छत्रपति महारानी। उनकी पहचान सिर्फ एक रानी के रूप में नहीं, बल्कि स्वराज्य के प्रशासन और राजनीति में प्रभावी भूमिका निभाने वाली प्रमुख महिला के रूप में भी की जाती है।

संभाजी महाराज के साथ सत्ता साझेदारी

महारानी येसूबाई को संभाजी महाराज ने स्वराज्य की राजनीतिक निर्णय लेने की पूरी आजादी दी थी। जब संभाजी महाराज युद्ध के कारण राजधानी से दूर होते थे, तो येसूबाई सभी बड़े राजनीतिक फैसले खुद लेती थीं। उन्हें "कुलमुख्तियार" की उपाधि दी गई थी, जिसका मतलब था कि वह न्याय और प्रशासन से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप कर सकती थीं। संभाजी महाराज ने उन्हें उनकी खुद की राजमुद्रा (श्री सखी राण्ये जयति) प्रदान की थी, जो उनके अधिकार और स्वतंत्रता का प्रतीक थी।

स्वराज्य की रक्षा में निभाई भूमिका

संभाजी महाराज की मृत्यु के बाद येसूबाई ने स्वराज्य की रक्षा की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। उन्होंने रायगढ़ किले को 7-8 महीने तक मुगलों से बचाए रखा। हालांकि, हालात ऐसे बने कि उन्हें मुगलों के साथ कुछ शर्तों के तहत किला सौंपना पड़ा। इन शर्तों में शाही परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की गई थी, जिसे मुगल शहजादी जिनातुन्निसा के साथ समझौते के रूप में तय किया गया।

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मुगल कैद में बिताए 29 साल

संभाजी महाराज की मृत्यु के बाद, मुगलों ने महारानी येसूबाई और उनके बेटे छत्रपति शाहू महाराज को बंदी बना लिया। येसूबाई ने कुल 29 साल तक मुगलों की कैद में कठिन परिस्थितियों का सामना किया। इनमें से 17 साल उन्होंने महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों में और 12 साल दिल्ली के लाल किले में बिताए। कैद के दौरान भी येसूबाई ने अपने बेटे शाहू महाराज के साथ गुप्त पत्रों के माध्यम से संवाद बनाए रखा।

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येसूबाई की रिहाई और मराठा साम्राज्य की पुनर्स्थापना

1719 में, जब मराठा साम्राज्य छत्रपति शाहू महाराज और पेशवा बालाजी विश्वनाथ के नेतृत्व में फिर से मजबूत हुआ, तब येसूबाई को रिहा किया गया। उनकी रिहाई मराठों के सामरिक और राजनीतिक कौशल का परिणाम थी। येसूबाई का जीवन संघर्ष, नेतृत्व और कुर्बानी का आदर्श उदाहरण है। उन्होंने न केवल एक पत्नी और मां के रूप में अपनी भूमिका निभाई, बल्कि एक मजबूत राजनेता और स्वराज्य की संरक्षक के रूप में भी अपनी छवि बनाई। उनका योगदान मराठा इतिहास में अमूल्य है और वह हमेशा एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व के रूप में याद की जाएंगी। महारानी येसूबाई न केवल एक नाम हैं, बल्कि मराठा इतिहास का ऐसा अध्याय हैं, जो साहस और समर्पण की गाथा को हमेशा जीवित रखेगा।

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Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...

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