Toxic Work Culture: 13 घंटे काम-वीकेंड पर भी छुट्टी नहीं! फ्रेशर की पोस्ट पर मचा बवाल

Published : Apr 01, 2026, 12:18 PM IST
Toxic Work Culture: 13 घंटे काम-वीकेंड पर भी छुट्टी नहीं! फ्रेशर की पोस्ट पर मचा बवाल

सार

एक नए कर्मचारी ने रेडिट पर अपने 13-घंटे के वर्क शेड्यूल पर सवाल उठाया है। उसे वीकेंड पर भी काम करना पड़ता है और महीने में सिर्फ 2 दिन की छुट्टी मिलती है। यह पोस्ट वायरल हो गई है, जिसमें लोग इसे शोषण बता रहे हैं और इस पर बहस कर रहे हैं।

एक नए कर्मचारी ने अपने 13 घंटे के थका देने वाले वर्क शेड्यूल को लेकर रेडिट पर एक पोस्ट किया है, जिस पर खूब बहस हो रही है। यूजर ने दावा किया कि उसे सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक ऑफिस में और फिर शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक घर से काम करना पड़ता है। उसने सवाल उठाया कि क्या यह सामान्य है या उसका शोषण हो रहा है, क्योंकि उसे वीकेंड पर भी काम करना पड़ता है और महीने में सिर्फ दो दिन की छुट्टी मिलती है।

कर्मचारी ने रेडिट पर लिखा, "क्या यह वर्क शेड्यूल कानूनी भी है या मेरा शोषण हो रहा है?" उसने आगे लिखा, "मैं यह समझना चाहता था कि मेरी मौजूदा नौकरी की उम्मीदें वाजिब हैं या मेरा फायदा उठाया जा रहा है। मेरे काम करने का ऑफिशियल समय है: सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक ऑफिस से काम। शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक घर से काम। तो, असल में मैं दिन में 13 घंटे काम कर रहा हूं। इसके अलावा, हमसे शनिवार और रविवार को भी काम करने की उम्मीद की जाती है (घर से)।"

कर्मचारी ने कहा, "वीकेंड पर ऑफिस बंद रहता है, फिर भी काम करना पड़ता है। हमें हर महीने सिर्फ दो दिन की छुट्टी मिलती है। कोई असली वीकली ऑफ नहीं है, और मुझे लगता है कि मैं बिना आराम या रिकवरी के लगातार काम कर रहा हूं। क्या यह नॉर्मल है? यह मेरी पहली नौकरी है।"

देखिए वायरल रेडिट पोस्ट

 

 

रेडिट पोस्ट में कंपनी के ह्यूमन रिसोर्स (HR) डिपार्टमेंट के एक मैसेज का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया गया। इसमें साफ लिखा था कि अगर कर्मचारी वीकेंड पर कोच्चि से बाहर जाना चाहते हैं तो उन्हें ऑफिस को इसकी जानकारी देनी होगी।

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

यह पोस्ट वायरल हो गई और यूजर्स इस मुद्दे पर अपनी राय देने लगे। एक यूजर ने कमेंट किया, "भाई, ये कंपनी छोड़ दो। उन्हें यह जानने का कोई हक नहीं है कि तुम वीकेंड पर कहां हो। अगर वे वीकेंड पर काम करने के लिए कह रहे हैं, तो यह उनकी खराब प्लानिंग को दिखाता है। मैनेजमेंट की गलतियों की कीमत कर्मचारियों को नहीं चुकानी चाहिए!"

एक अन्य यूजर ने लिखा: “तुरंत एचआर डिपार्टमेंट से संपर्क करो और अपना इस्तीफा सौंप दो। इस कंपनी का गुलाम बनने से तो अच्छा है कि मैं बेरोजगार रहूं। और हां, जब तुम्हारा फुल एंड फाइनल सेटलमेंट हो जाए, तो लेबर डिपार्टमेंट में उनकी शिकायत करना और सोशल मीडिया और ग्लासडोर पर उन्हें बदनाम कर देना।”

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About the Author

Anita Tanvi

अनीता तन्वी। मीडिया जगत में 15 साल से ज्यादा का अनुभव। मौजूदा समय में ये एशियानेट न्यूज हिंदी के साथ जुड़कर एजुकेशन सेगमेंट संभाल रही हैं। इन्होंने जुलाई 2010 में मीडिया इंडस्ट्री में कदम रखा और अपने करियर की शुरुआत प्रभात खबर से की। पहले 6 सालों में, प्रभात खबर, न्यूज विंग और दैनिक भास्कर जैसे प्रमुख प्रिंट मीडिया संस्थानों में राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय, ह्यूमन एंगल और फीचर रिपोर्टिंग पर काम किया। इसके बाद, डिजिटल मीडिया की दिशा में कदम बढ़ाया। इन्हें प्रभात खबर.कॉम में एजुकेशन-जॉब/करियर सेक्शन के साथ-साथ, लाइफस्टाइल, हेल्थ और रीलिजन सेक्शन को भी लीड करने का अनुभव है। इसके अलावा, फोकस और हमारा टीवी चैनलों में इंटरव्यू और न्यूज एंकर के तौर पर भी काम किया है।Read More...
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