
करियर डेस्क। अब ग्रामीण पृष्ठभूमि से आए कैंडिडेट भी सिविल सर्विस एग्जाम में सफलता हासिल कर उदारहण पेश कर रहे हैं। मध्य प्रदेश की सुरभि को सिविल सर्विस एग्जाम में पहले ही प्रयास में सफलता हासिल हुई। बता दें कि सुरभि के दोस्त अंग्रेजी ठीक से नहीं बोल पाने के कारण उनका मजाक उड़ाते थे। सुरभि बचपन से ही पढ़ने में तेज थीं। 12वीं करने के बाद उन्होंने राज्य इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा दी और उसमें सफल रहीं। 10वीं और 12वीं की परीक्षा में भी वे अव्वल रही थीं और 90 प्रतिशत अंक हासिल किए थे। वे मध्य प्रदेश के सतना जिले के अमदरा गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता सतना सिविल कोर्ट में वकील और मां शिक्षिका हैं।
इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा में सफलता पाने के बाद उन्होंने भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक्स और दूरसंचार में इंजीनियरिंग की डिग्री ली और करीब एक साल तक भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर में काम किया। उन्होंने GATE, ISRO, SAIL, MPPSC PCS, SSC और CGL में भी सफल रहीं। साल 2013 में सुरभि ने IES एग्जाम में भी पहली रैंक हासिल की। लेकिन शुरू से उनका सपना सिविल सर्विस में आने का था।
अपने पूरे करियर में लगातार सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने सिविल सर्विस की परीक्षा दी और 2016 में पहले प्रयास में ही सफल रहीं। उन्हें 50वीं रैंक मिली। सुरभि का कहना है कि सिविल सर्विस एग्जाम में सफलता के लिए सामान्य ज्ञान के साथ मुख्य विषय पर अच्छी पकड़ होनी चाहिए। इसके साथ ही इंटरव्यू के लिए भी तैयारी खास मायने रखती है। कई कैंडिडेट मुख्य परीक्षा में सफलता पाने के बावजूद इंटरव्यू में ही मात खा जाते हैं, क्योंकि वे घबराहट के शिकार हो जाते हैं। इंटरव्यू में मुख्य रूप से कैंडिडेट के व्यक्तित्व का परीक्षण होता है। इसके लिए आत्मविश्वास का मजबूत होना जरूरी है। इंटरव्यू में अगर किसी सवाल का उत्तर नहीं जानते हैं तो कभी घबराना नहीं चाहिए। ऐसी स्थिति में कैंडिडेट को साफ कह देना चाहिए कि उसे इसके बारे में नहीं पता। सुरभि कहती हैं कि उन्हें सिविल सर्विस परीक्षा में सफलता हासिल करने का पूरा भरोसा था।
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