Diwali 2022 : दिवाली पर क्यों दी जाती है उल्लू की बलि, क्या कानून देता है इसकी इजाजत?

Published : Oct 24, 2022, 01:52 PM IST
Diwali 2022 : दिवाली पर क्यों दी जाती है उल्लू की बलि, क्या कानून देता है इसकी इजाजत?

सार

विश्व वन्यजीवन कोष यानी WWF ने उल्लू पक्षी को बचाने के लिए जागरुकता और इसकी तस्करी, व्यापार को पूरी तरह रोकने की जरूरत पर जोर दिया है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों है? आखिर दिवाली पर ही इसकी चर्चा क्यों हो रही है?

करियर डेस्क : आज भारत ही नहीं पूरी दुनिया में दीपोत्सव का त्योहार दिवाली (Diwali 2022) बड़े ही धूमधाम से मनाई जा रही है। घर सज गए हैं। रात में दीप जलाए जाएंगे, पटाखें फोड़े जाएंगे। पूजा-पाठ किया जाता है। दिवाली को लेकर कई तरह की प्रथा है, जिसे हर कोई निभाता है। इस दिन मिठाई, पटाखे, सोना, चांदी और नए कपड़ों के साथ ही कई चीजों का महत्व होता है। उल्लू (Owl) एक ऐसा जीव है, जिसका दिवाली पर जिक्र होता है। क्या आप जानते हैं दिवाली पर उल्लू के जिक्र होने के पीछे की वजह? आइए जानते हैं..

अंधविश्ववास की बलि चढ़ता है उल्लू 
दिवाली के खास मौके पर कुछ लोगों का अंधविश्वास भी हावी रहता है। यही कारण है कि ऐसे लोगों का मानना है कि दिवाली पर उल्लू की बलि देने से सुख-समृद्धि, धन-संपदा में बढ़ोतरी होती है। इसी अंधविश्वास के चलते इस पक्षी की बलि दे दी जाती है। इसी कारण से हर साल दिवाली के बाद उल्लू की प्रजाति में काफी कमी देखने को मिलती है। उल्लुओं को इसी बलि से बचाने के लिए विश्व वन्यजीवन कोष (WWF) ने उनके संरक्षण का फैसला किया है।

भारत में उल्लुओं की 36 प्रजातियां
अब अगर देश में उल्लुओं की बात करें तो भारत में उल्लू की 36 प्रजातियां मौजूद हैं। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wild Life Protection Act 1972) के तहत इन प्रजातियों का शिकार, कारोबार या उत्पीड़न पर पाबंदी है। उन्हें इसके लिए संरक्षण दिया जाता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पाई जाने वाली उल्लू की 36 प्रजातियों में से 16 की अवैध तस्करी और व्यापार होता है। इनमें खेत- खलिहानों में मिलने वाले उल्लू, कॉलर वाला उल्लू, काला उल्लू, पूर्वी घास वाला उल्लू, ब्राउन फिश उल्लू, ब्राउन हॉक उल्लू, जंगली उल्लू, धब्बेदार उल्लू, पूर्वी एशियाई उल्लू, चितला उल्लू जैसी प्रजातियां शामिल हैं।

उल्लुओं को बचाने क्या है कानून 
देश में वन्य जीवों को बचाने के लिए वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 लागू है। इसके तहत ही देश के अंदर पाए जाने वाले वन्यजीवों की सुरक्षा की जाती है। उन्हें अवैध शिकार, अवैध तस्करी (Illegal Smuggling) और अवैध व्यापार से बचाया जाता है। अब अगर इस कानून की बात करें तो इसमें 66 धाराएं और 6 अनुसूचियां रखी गई हैं। अलग-अलग अनुसूचियों में अलग-अलग सजा का प्रावधान किया गया है। इन अपराधों में लिप्ट अपराधियों को 10,000 रुपए के जुर्माना से 10 साल की जेल का प्रावधान है।

इसे भी पढ़ें
एक फुलझड़ी से 472 सिगरेट, एक चकरी से 431 सिगरेट जितना निकलता है 'धुआं', जानें कौन सा पटाखा, कितना खतरनाक

Surya Grahan: बड़ा रोचक है सूर्यग्रहण का इतिहास, पहली बार कब और कहां हुई थी यह घटना

PREV

Education News: Read about the Latest Board Exam News, School & Colleges News, Admission news in hindi, Cut-off list news - Asianet Hindi

Read more Articles on

Recommended Stories

Exam stress? पीएम मोदी ने स्टूडेंट्स को दिया एकदम सिंपल और प्रैक्टिकल सॉल्यूशन
NEET UG 2026 रजिस्ट्रेशन शुरू, 8 मार्च तक करें आवेदन, एग्जाम डेट से फीस तक जानिए पूरी डिटेल