
नई दिल्ली. केरल सरकार ने पूर्व इसरो (Isro) वैज्ञानिक नंबी नारायणन को मुआवजे के रूप में 1.3 करोड़ रुपये मुआवजा देने का फैसला किया है। नारायण को 1994 के जासूसी मामले में झूठा फंसाया गया था। 77 साल के नारायणन को ये मुआवजा सरकार के खिलाफ दायर एक मामले के तहत दिया गया है जिसमें उन्होंने अपनी अवैध गिरफ्तारी और उत्पीड़न के लिए हर्जाने की मांग की थी। नंबी नारायणन को सुप्रीम कोर्ट ने साल 2018 में जासूसी के आरोप से बरी कर दिया था।
ये मुआवजा सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर पूर्व वैज्ञानिक को सरकार द्वारा प्रदान किए गए 50 लाख रुपये और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा अनुशंसित 10 लाख रुपये से भी ज्यादा है।
कौन हैं नंबी नारायण-
नारायणन इसरो के टॉप वैज्ञानिक और क्रायोजनिक प्रॉजेक्ट के डायरेक्टर रहे हैं। उन्हें दो वैज्ञानिकों डी शशिकुमारन और डेप्युटी डायरेक्टर के चंद्रशेखर के साथ जासूसी के आरोप में नवंबर 1994 में अरेस्ट किया गया था। केरल पुलिस ने दावा किया था कि उन्होंने कुछ गुप्त दस्तावेज पाकिस्तान को दिए थे। जांच के बाद सीबीआई ने कहा था कि ये आरोप झूठे हैं। हालांकि फिर से जांच के आदेश दिए गए पर 1998 में सुप्रीम कोर्ट ने मामले को रद्द कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने किया बरी-
इसके बाद नारायणन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पहुंचे, जहां से 10 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया गया। हालांकि वह संतुष्ट नहीं हुए और सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए थे। अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इस केस में वैज्ञानिक एस. नंबी नारायणन को 24 साल पहले केरल पुलिस द्वारा बेवजह गिरफ्तार किया गया था। उन्हें (नारायणन) परेशान किया गया और मानसिक प्रताड़ना दी गई। शीर्ष अदालत ने इसरो वैज्ञानिक को 50 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया था।
पद्म भूषण से सम्मानित-
पद्म पुरस्कार पाने वाले लोगों की सूची में एस. नंबी नारायणन का भी नाम शामिल है। नंबी नारायणन को पद्म भूषण से नवाजा गया है।
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