
नई दिल्ली. लॉकडाउन के कारण देश में स्कूल-कॉलेज सब बंद हैं। ऐसे में अभिभावकों की मांग थी कि स्कूल बच्चों की फीस तीन महीने की जगह एक-एक महीने की फीस ले। जिसके बाद केंद्र सरकार ने स्कूलों से अपील की थी कि वे इस बारे में सोचे। अब ज्यादातर निजी स्कूलों ने एक साथ तीन महीने तक की फिस नहीं लेने का फैसला किया है। वार्षिक फीस नहीं बढ़ाने पर भी विचार कर रहा है।
पोखरियाल ने निजी स्कूलों से की थी अपील
इस मामले पर मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा, मैंने मौजूदा हालात को देखते हुए निजी स्कूलों से फीस नहीं बढ़ाने की अपील की थी। मुझे खुशी है कि हर राज्य के शिक्षा विभाग अभिभावकों और स्कूलों के हितों की रक्षा के लिए लगन से काम कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, 'स्कूलों के लिए संविदाकर्मियों समेत अपने सभी कर्मचारियों को वेतन देना अनिवार्य है। अगर उनके पास धन की कमी है, तो वे अपने मूल संगठन से धन की मांग कर सकते हैं।'
यूनिवर्सिटियों में शैक्षणिक सत्र सितंबर से शूरू करने की सिफारिश
इस बीच, यूजीसी की एक कमेटी ने कोरोना संकट को देखते हुए विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक सत्र जुलाई की जगह सितंबर से शुरू करने की सिफारिश की है। यूजीसी ने शैक्षणिक सत्र पर सुझाव देने के लिए इस कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, अब अगले हफ्ते यूजीसी सिफारिशों पर फैसला करेगा।
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