यहां भी PAK पीछे: पाकिस्तान में 32% बच्चे नहीं जा पाते हैं स्कूल, भारत से 17% कम है लिटरेसी रेट

Published : May 25, 2021, 10:47 AM IST
यहां भी PAK पीछे: पाकिस्तान में 32% बच्चे नहीं जा पाते हैं  स्कूल, भारत से 17% कम है लिटरेसी रेट

सार

पाकिस्तान में 5 से 16 साल तक की उम्र के 32 प्रतिशत बच्चे इस समय स्कूल नहीं जाते हैं। स्कूल न जाने वाले बच्चों में सबसे ज्यादा 47 प्रतिशत बलूचिस्तान के हैं और सबसे कम 26 प्रतिशत पंजाब में।

इस्लामाबाद. पाकिस्तान की लिटरेसी रेट (literacy rate) 60 फीसदी है। पाकिस्तान सोशल एंड लीविंग  स्टैंडर्ड की रिपोर्ट (Pakistan's Social and Living Standard Measurement) के अनुसार, 2014-15 की तुलना में 2019-20 में पाकिस्तान की लिटरेसी रेट 10 साल और उससे अधिक के उम्र के बच्चों का 60 फीसदी पर स्थिर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2019-20 में पाकिस्तान के जिलों में कुल 14 प्रतिशत परिवारों में खाने की मीडियम इनसिक्योरिटी है। जबकि 2 प्रतिशत ने देश में गंभीर फूड इनसिक्योरिटी है।

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कई जिलों में स्थिति ठीक नहीं
PSLM की रिपोर्ट के अनुसार, पंजाब प्रांत में स्थिति ठीक है लेकिन अधिकांश जिलों में स्थिति खराब है। सर्वेक्षण के अनुसार, पाकिस्तान के ज्यादातर प्रांतों में लिटरेसी रेट या तो स्थिर है या फिर कम हुआ है। पंजाब प्रांत में लिटरेसी रेट सबसे अच्छा है तो दूसरी तरफ बलूचिस्तान में सबसे कम है। इस सर्वे में 6,500 ब्लॉक और 19,500 घरों से सैंपल लिए गए हैं। 

बलूचिस्तान के बच्चे शिक्षा से दूर
पाकिस्तान में 5 से 16 साल तक की उम्र के 32 प्रतिशत बच्चे इस समय स्कूल नहीं जाते हैं। स्कूल न जाने वाले बच्चों में सबसे ज्यादा 47 प्रतिशत बलूचिस्तान के हैं और सबसे कम 26 प्रतिशत पंजाब में। पीएसएलएम की रिपोर्ट में पाकिस्तान ने अन्य सामाजिक-आर्थिक मुद्दों पर भी खराब परिणाम दिखाए गए हैं। प्रांतों में प्राथमिक, मध्य और मैट्रिक स्तर पर शुद्ध नामांकन या तो स्थिर रहा है या उनमें घटते रुझान को दिखाया गया है। पंजाब में राजनपुर, सिंध में थट्टा, के-पी और हरनाई में कोहिस्तान और बजूर, किला अब्दुल्ला और जियारत (बलूचिस्तान में) अपने-अपने प्रांतों में शिक्षा संकेतकों में सबसे नीचे हैं।

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भारत का लिटरेसी रेट
2020 की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की लिटरेसी रेट 77.7 फीसदी है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के आंकड़ों के अनुसार भारत में साक्षरता दर 77.7 फीसदी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण इलाकों में 73.5 फीसदी जबकि शहरी इलाके में यह 87.7 फीसदी लिटरेसी रेट है।

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