
करियर डेस्क। एक रिपोर्ट से खुलासा हुआ है देश में हर 4 में से 1 बच्चा कम उम्र में ही कक्षा -1 में एडमिशन ले लेता है। इसका असर उनकी पढ़ाई और आगे के विकास पर अच्छा नहीं पड़ता। बता दें कि 'राइट टू एजुकेशन एक्ट, 2009' में कहा गया है कि कक्षा -1 में एडमिशन लेने के लिए बच्चे की उम्र कम से कम 6 साल होनी चाहिए, लेकिन रिपोर्ट से खुलासा हुआ है कि 5 साल के बच्चे कक्षा-1 या उससे ऊपर पढ़ाई कर रहे हैं और 4 साल के बच्चे भी कक्षा -1 में नामांकन करवा रहे हैं। बताया जा रहा है कि कम उम्र में ऊंची कक्षा में नामांकन कराने से बच्चे का सही तरीके से विकास नहीं हो पाता। वह पढ़ाई में तो पिछड़ जाता ही है, उसके व्यक्तित्व के विकास से जुड़ी कई समस्याएं पैदा होने लगती हैं।
क्या है रिपोर्ट में
एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (रूरल) 2019 में कहा गया है कि इसमें बच्चे की पढ़ाई के शुरुआती वर्षों पर ध्यान दिया गया है। इसमें 4 से 8 साल के बच्चे की पढ़ाई से संबंधित प्रगति को समझने की कोशिश की गई है। इस स्टडी में 24 राज्यों के 26 जिलों के 36, 930 बच्चों का सर्वे किया गया जो सरकारी स्कूलों, आंगनवाड़ी स्कूलों और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ रहे थे।
क्या पता चला सर्वे में
5 साल के बच्चों के सर्वे से पता चला कि इस एज ग्रुप के 26.1 प्रतिशत बच्चे कक्षा -1 या इससे ऊपर के दर्जे में पढ़ाई कर रहे हैं, वहीं 4 साल के 8.1 प्रतिशत बच्चे भी कक्षा -1 और ऊपर के दर्जों में हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि कम उम्र में इन कक्षाओं में नामांकन करा लेने से बच्चे पाठ्यक्रम को समझ पाने में समर्थ नहीं हो पाते और और उनका संज्ञानात्मक विकास सही तरीके से नहीं हो पाता।
क्या कहा रिपोर्ट के बारे में डायरेक्टर ने
इस रिपोर्ट के बारे में एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (रूरल) सेंटर के डायरेक्टर डॉक्टर विलिमा वाधवा ने कहा कि उम्र का पढ़ाई से गहरा रिश्ता है, क्योंकि संज्ञानात्मक विकास के साथ सामाजिक और भावनात्मक विकास उम्र से जुड़ा होता है। इसलिए 6 साल से कम उम्र के बच्चे का पहली कक्षा में नामांकन नहीं किया जाना चाहिए। बाल शिक्षा के दूसरे विशेषज्ञों का भी यही कहना था कि कम उम्र में ऊंची कक्षा में बच्चे का दाखिला कराने से उसके शैक्षणिक व व्यक्तित्व संबंधी विकास पर बढ़िया असर नहीं पड़ता।
राज्यवार आंकड़े दिए हैं रिपोर्ट में
इस रिपोर्ट में बच्चों की शिक्षा को लेकर राज्यवार आंकड़े दिए गए हैं, जिससे देश में प्रारंभिक शिक्षा की स्थिति की एक रूपरेखा सामने आती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि लड़के और लड़कियों के बीच शिक्षा हासिल करने के अवसरों को लेकर भेदभाव भी बचपन में ही सामने आ जाते हैं। इससे संबंधित आंकड़े भी रिपोर्ट में दिए गए हैं।
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