IIMC में संवाद कार्यक्रम, भारतीय भाषाओं के विकास में तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण

Published : Dec 17, 2021, 05:00 PM IST
IIMC में संवाद कार्यक्रम, भारतीय भाषाओं के विकास में तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण

सार

'न्यू मीडिया : भारतीय भाषाओं में उभरती संभावनाएं' विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए बालेन्दु शर्मा दाधीच ने कहा कि प्रौद्योगिकी का एक रूप है यूनिकोड।

करियर डेस्क.  'माइक्रोसॉफ्ट इंडिया' के निदेशक (भारतीय भाषाएं एवं सुगम्यता) बालेन्दु शर्मा दाधीच ने भारतीय भाषाओं (Indian languages) के विकास में तकनीक की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया है। दाधीच के अनुसार तकनीक के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलू हैं। यह हमारी जिम्मेदारी है कि तकनीक के सही प्रयोग से भारतीय भाषाओं को ज्यादा सक्षम बनाया जाए। दाधीच शुक्रवार को भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) द्वारा आयोजित कार्यक्रम 'शुक्रवार संवाद' को संबोधित कर रहे थे।

'न्यू मीडिया : भारतीय भाषाओं में उभरती संभावनाएं' विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुए बालेन्दु शर्मा दाधीच ने कहा कि प्रौद्योगिकी का एक रूप है यूनिकोड। यूनिकोड ने दुनिया की 154 भाषाओं को आपके मोबाइल और कंप्यूटर पर काम करने में सक्षम बनाया है। यह भारतीय भाषाओं को जोड़ने वाली शक्ति हैं। अगर आज यूनिकोड नहीं होता, तो न तो आप न्यूज वेबसाइट पढ़ पाते और न ही अपनी भाषा में संदेश लोगों को भेज पाते। उन्होंने कहा कि यूनिकोड ने लिपियों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाई है। आज भारतीय भाषाओं के इंटरफेस के साथ स्मार्टफोन आ रहे हैं। अनेक भाषाओं में ऑपरेटिंग सिस्टम का प्रयोग बढ़ा है। ई-कॉमर्स और ई-गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में भारतीय भाषाओं का दखल बढ़ रहा है।

दाधीच के अनुसार न्यू मीडिया ने आज अनेक संभावनाओं के द्वारा खोले हैं, लेकिन हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि हम तकनीक पर इतने आश्रित तो नहीं हो रहे हैं कि हमारी सोचने की क्षमता इससे प्रभावित होने लगे। उन्होंने कहा कि आज लोगों की पसंद 'लांग फॉर्म कंटेंट' नहीं है। अब छोटे-छोटे टुकड़ों में लोग ज्ञान अर्जित कर रहे हैं। आज 6 या 7 शब्दों की कहानियां लिखने का चलन बढ़ने लगा है। दाधीच ने कहा कि संक्षेप में रचनाकर्म करना भी अभिव्यक्ति की एक कला है। इंटरनेट के प्रभाव से ये कलाएं समाज में लोकप्रिय हो रही हैं।

दाधीच ने बताया कि भाषाई क्षेत्र में आ रही नई तकनीकें आज उम्मीद जगा रही हैं। अगर हम इन तकनीकों का सार्थक इस्तेमाल कर सकें, तो बहुत सारी भाषाएं, जिनका अस्तित्व आज संकट में दिखता है, बचाई जा सकेंगी। साउंड प्रोसेसिंग और ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन (ओसीआर) जैसी सुविधाओं से भाषाई सामग्री के डिजिटलीकरण, संरक्षण और प्रसार का मार्ग आसान हुआ है। मशीन अनुवाद ने भाषाओं के बीच दूरियां घटाने का काम किया है।

इसे भी पढ़ें- Government Job: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में 41 हजार से ज्यादा पोस्ट खाली, जानें किस बैंक में कितनी वैंकेसी

Maharashtra Board: ऑफलाइन होंगी 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं, शिक्षा मंत्री ने घोषित किया टाइम टेबल

PREV

Education News: Read about the Latest Board Exam News, School & Colleges News, Admission news in hindi, Cut-off list news - Asianet Hindi

Recommended Stories

ट्रेन का हॉर्न vs शेर की दहाड़: कौन ज्यादा दूर तक सुनाई देती है, जवाब जान दंग रह जाएंगे
CBSE Counseling 2026: बोर्ड छात्रों के लिए IVRS और टेली-काउंसलिंग सर्विस शुरू, जानें कैसे लें मदद