सुप्रीम कोर्ट ने हॉस्टल नियमावली में संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर JNU से मांगा जवाब

Published : Jan 24, 2020, 04:00 PM ISTUpdated : Jan 24, 2020, 04:03 PM IST
सुप्रीम कोर्ट ने हॉस्टल नियमावली में संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर JNU से मांगा जवाब

सार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने छात्रावास की नियमावली में संशोधन के फैसले को चुनौती देने वाली जेएनयू छात्र संघ की याचिका पर विश्वविद्यालय से जवाब मांगा।

नई दिल्ली. दिल्ली उच्च न्यायालय ने छात्रावास की नियमावली में संशोधन के फैसले को चुनौती देने वाली जेएनयू छात्र संघ की याचिका पर विश्वविद्यालय से जवाब मांगा और कहा कि नए अकादमिक वर्ष के लिए अभी तक पंजीकरण नहीं कराने वाले जेएनयू के छात्र पुरानी छात्रावास नियमावली के तहत पंजीकरण करा सकते हैं।

न्यायमूर्ति राजीव शकधर की पीठ ने मामले में पक्षकार मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी को भी नोटिस जारी किए।

छात्र संघ के पदाधिकारियों  ने की थी याचिका दाखिल 

जेएनयूएसयू अध्यक्ष आइशी घोष और छात्र संघ के अन्य पदाधिकारियों साकेत मून, सतीश चंद्र यादव और मोहम्मद दानिश ने याचिका दाखिल की थी। याचिका में पिछले साल 28 अक्टूबर को जारी आईएचए की कार्यवाही के विवरण और 24 नवंबर को गठित उच्च स्तरीय समिति के अधिकार क्षेत्र और उसकी सिफारिशों पर सवाल उठाए गए हैं।

याचिका में मसौदा छात्रावास नियमावली रद्द करने के लिए निर्देश की मांग करते हुए आईएचए के फैसले को दुर्भावनापूर्ण, मनमाना, अवैध और छात्रों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला बताया गया है ।

याचिका में दावा किया गया है कि छात्रावास नियमावली में संशोधन जेएनयू कानून, 1966 , अध्यादेश और छात्रावास नियमावली के प्रावधानों के विपरीत है ।

(ये खबर न्यूज एजेंसी पीटीआई/भाषा की है। एशियानेट न्यूज हिन्दी ने सिर्फ हेडिंग में बदलाव किया है।)

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