
लखनऊ. सुनने में थोड़ा अजीब लग रहा होगा, लेकिन यह सच है। यूपी बोर्ड की परीक्षा में घर में बैठकर तैयारी करने वाले जितने छात्र पास हुए हैं, उससे ज्यादा जेल (prison) में पढ़ाई कर परीक्षा देने वाले बंदी पास हुए हैं। दोनों के पासिंग परसेंट में बहुत अंतर है। बता दें कि 10वीं और 12वीं की परीक्षा में शामिल हुए परीक्षार्थियों (Examinees) की तुलना में जेल में बंद कैदियों (Prisoners) की संख्या बहुत छोटी है लेकिन उनका पासिंग परसेंट सामान्य छात्रों से काफी अधिक रहा है।
आपको बता दें कि आज दोपहर बाद यूपी के डिप्टी सीएम डॉ. केपी मौर्या ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षा का परिणाम (UP Board results 2020) जारी किया। 10वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थी अपना रिजल्ट यूपी बोर्ड की ऑफिशियल वेबसाइट upresult.nic.in पर जाकर देख सकते हैं।
200 से ज्यादा कैदियों ने दी थी परीक्षा
हाईस्कूल की परीक्षा में 17 जिलों में निरुद्ध दसवीं के कुल 114 बंदियों ने अपना पंजीकरण कराया था, जिसमें से 93 ने परीक्षा दी थी। इनमें से 86 हाईस्कूल की परीक्षा पास कर गए। यानी पासिंग प्रतिशत 92.47 फ़ीसदी है। इसी तरह 22 जिलों के जेलों में निरुद्ध कुल 97 परीक्षार्थियों ने इंटरमीडिएट के लिए पंजीकरण कराया था। इसमें से 75 परीक्षा में शामिल हुए थे और 63 सफल हुए हैं यानी पासिंग परसेंट 83.56 फीसदी है।
गौरतलब है कि इस साल यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में 56 लाख 11 हजार 72 परीक्षार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से 4 लाख 80 हजार 591 परीक्षार्थी बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हुए थे। 12वीं की परीक्षा जहां 15 दिनों में पूरी हुई, वहीं मैट्रिक परीक्षा महज 12 दिनों में समाप्त हो गई।
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