
Why is Maharishi Patanjali called Father of Yoga: हर साल 21 जून को दुनिया भर में करोड़ों लोग अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाते हैं। योग आज सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हेल्दी लाइफस्टाइल का अहम हिस्सा बन चुका है। साल 2026 में 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया जाएगा, जिसकी थीम "Yoga for Healthy Ageing" यानी स्वस्थ और सक्रिय उम्र बढ़ाने के लिए योग रखी गई है। इस बार मुख्य आयोजन कोलकाता में होगा। वैसे तो आज के समय में हर कोई योग से रूबरू है। लेकिन क्या आप जानते हैं महर्षि पतंजलि को योग का जनक (Father of Yoga) कहा जाता है? जानिए महर्षि पतंजलि को योग का पिता क्यों कहते हैं और उनकी सबसे बड़ी देन क्या है?
योग की परंपरा भारत में हजारों साल पुरानी मानी जाती है। हालांकि, प्राचीन समय में योग का ज्ञान गुरु-शिष्य परंपरा के जरिए मौखिक रूप से आगे बढ़ता था। इसे किसी एक व्यवस्थित ग्रंथ में नहीं लिखा गया था। यहीं पर महर्षि पतंजलि का योगदान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने बिखरे हुए योग ज्ञान को एक सूत्र में पिरोकर ‘योग सूत्र’ नामक ग्रंथ की रचना की। इसी कारण उन्हें दुनिया भर में ‘योग का जनक’ कहा जाता है।
महर्षि पतंजलि द्वारा लिखे गए योग सूत्र में 196 सूत्र हैं, जिनमें योग के सिद्धांतों और अभ्यास को विस्तार से समझाया गया है। उन्होंने योग को केवल शरीर को फिट रखने का माध्यम नहीं माना, बल्कि मन, बुद्धि और आत्मा के संतुलन का मार्ग बताया। उनके द्वारा बताए गए अष्टांग योग यानी योग के आठ चरण आज भी योग शिक्षा की नींव माने जाते हैं। ये सिद्धांत व्यक्ति के संपूर्ण विकास और मानसिक शांति पर जोर देते हैं।
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव, चिंता और अनियमित दिनचर्या आम समस्या बन चुकी है। ऐसे में योग लोगों के लिए एक आसान और प्रभावी उपाय बनकर उभरा है। नियमित योगाभ्यास से शरीर लचीला और मजबूत बनता है। वहीं प्राणायाम और श्वास संबंधी अभ्यास फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के साथ मानसिक तनाव को कम करने में मदद करते हैं। कई शोधों में यह सामने आया है कि योग चिंता और तनाव के स्तर को कम करने में सकारात्मक भूमिका निभाता है।
योग को वैश्विक पहचान दिलाने में महर्षि पतंजलि की भूमिका बेहद अहम रही है। उन्होंने योग को एक व्यवस्थित स्वरूप देकर आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान का ऐसा खजाना तैयार किया, जो आज भी करोड़ों लोगों को स्वस्थ, संतुलित और शांत जीवन जीने की प्रेरणा देता है। इसलिए जब भी योग के इतिहास की बात होती है, महर्षि पतंजलि का नाम सबसे पहले लिया जाता है।
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