बांग्लादेश पर जीत के बाद भी सामने आई भारत की पांच कमजोरियां, नहीं किया सुधार तो कभी भी हार सकती है टीम इंडिया

Published : Nov 16, 2019, 07:28 PM IST
बांग्लादेश पर जीत के बाद भी सामने आई भारत की पांच कमजोरियां, नहीं किया सुधार तो कभी भी हार सकती है टीम इंडिया

सार

बांग्लादेश के खिलाफ भारत ने शानदार जीत दर्ज करते हुए भले ही सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली हो, पर भारतीय टीम को इन पांच पहलुओं में काम करने की जरूरत है। जीत के बावजूद इस मैच में भारतीय टीम की कई कमजोरियां सामने आई हैं।

इंदौर. बांग्लादेश के खिलाफ भारत ने शानदार जीत दर्ज करते हुए भले ही सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली हो, पर भारतीय टीम को इन पांच पहलुओं में काम करने की जरूरत है। जीत के बावजूद इस मैच में भारतीय टीम की कई कमजोरियां सामने आई हैं। टीम की कई परेशानियां तो लंबे समय से चली आ रही हैं, अगर भारतीय टीम ने इन पहलुओं में काम नहीं किया तो कभी भी भारतीय टीम को हार का सामना करना पड़ सकता है। 

1.शून्य पर आउट हुए कप्तान कोहली 
भारत के कप्तान इस मैच में बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गए। भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ कहे जाने वाले कोहली ने महज दो गेंदें ही खेली। साउथ अफ्रीका के खिलाफ दोहरा शतक लगाए कोहली को महीना भर से अधिक का समय हो गया है। उन्होंने बांग्लादेश की खिलाफ T-20 सीरीज से भी रेस्ट लिया था और वापसी करने के बाद कोहली खाता भी नहीं खोल पाए। इससे पहले साउथ अफ्रीका के खिलाफ भी कोहली सिर्फ 12 रनों पर आउट हो गए थे। ऐसे में भारतीय कप्तान की फॉर्म पर सवाल उठना भी लाजिमी है। कोहली जैसे दिग्गज बल्लेबाज की फार्म खत्म होने के लिए भी महीने भर का समय काफी है। 

2. स्लिप में छोड़े कैच 
बांग्लादेश के खिलाफ पूरे मैच में भारत की स्लिप में फील्डिंग बहुत ही खराब रही। भारतीय कप्तान कोहली से लेकर रहाणे तक सभी ने स्लिप में कैच टपकाए। बांग्लादेश की टीम बाकी टीमों की तुलना में कमजोर है और उसके बल्लेबाज इन मौकों का फायदा नहीं उठा सके, पर किसी भी बड़ी टीम के बल्लेबाज ऐसे मौके नहीं छोड़ेंगे और जीवनदान मिलने पर पूरा मैच पलट सकते हैं। भारत के मयंक अग्रवाल को ही बांग्लादेश ने एक मौका दिया था और फिर मयंक ने 243 रन ठोक दिए। 

3. जडेजा को नहीं मिला कोई विकेट 
एशिया महाद्रीप की पिचों पर कहीं भी मैच हो रहा हो, स्पिनर ही भारत के ट्रंप कार्ड होते हैं। स्पिन पिचों पर हमेशा ही अश्विन और जड़ेजा पर विकेट चटकाने की जिम्मेदारी होती है। विदेशी पिचों पर भी जडेजा ही भारत के एकमात्र स्पिन गेंदबाज के रूप में खेलते हैं, पर जडेजा ने पूरे मैच में एक भी विकेट नहीं लिया। दोनों पारियों में मिलाकर जड़ेजा ने कुव 17 ओवर डाले पर एक भी विकेट नहीं निकाल सके। इस दौरान जडेजा की इकॉनमी भी 3 से ऊपर की रही। 

4. साहा की बल्लेबाजी पर भरोसा नहीं 
आज के दौर में हर टीम के विकेटकीपर बल्लेबाजी में भी खासा योगदान देते हैं। कीपिंग के अलावा भी क्विंटन डिकॉक से लेकर जोश बटलर तक हर खिलाड़ी बल्लेबाजी में भी पूरा योगदान देता है, पर भारत के विकटकीपर साहा का बल्लेबाजी में योगदान न के बराबर रहा है। 36 टेस्ट मैचों में साहा ने 1221 रन बनाए हैं। उनका औसत तो 30 से भी कम है। हालांकि ये सही बात है कि साहा को बल्लेबाजी कम मिलती है, पर जब मुश्किल हालातों में साहा की बल्लेबाजी आएगी तब साहा से अच्छे प्रदर्शन की कोई उम्मीद भी नहीं है। 

5. बल्लेबाजी में नहीं है गहराई 
भारतीय टीम फिलहाल 5 गेंदबाज और 5 बल्लेबाजों के साथ खेल रही है। ऐसे में यदि भारत को किसी मैच में शुरुआती झटके लगे तो टीम निश्चित रूप से मुश्किल में आ सकती है। टीम के ऑलराउंडर पांड्या चोटिल हैं और टीम से बाहर हैं। पांड्या की गैरमौजूदगी में भारतीय टीम की बल्लेबाजी में कोई गहराई नहीं है। इसके अलावा पारी घोषित करने से पहले यदि भारत को तेजी से रन बनाने हों तो जडेजा के अलावा टीम में कोई तेज गति से रन बनाने वाला ऑलराउंडर भी नहीं है और न ही हमारे गेंदबाज ऑस्ट्रेलिया की तरह काबिल हैं।   

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