
गांधीनगर। Gujarat Assembly Election 2022: गुजरात विधानसभा चुनाव में अरावली जिले की बायड विधानसभा सीट पर भी इस बार सभी की नजर है। इस सीट पर स्थानीय मुद्दे और 27 साल से भाजपा के सत्ता में होने पर सत्ता विरोधी लहर यानी एंटी इंकम्बेंसी के साथ-साथ कुछ और चीजें भी हैं, जो मायने रख सकती है। इनमें दलबदल नेताओं के प्रभाव भी शामिल हैं।
दरअसल, बायड अरावली जिले की तीन विधानसभा सीटों में से एक है। इन सभी विधानसभा सीट पर 2017 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की थी। यहां करीब दो लाख 30 हजार वोटर हैं। इनमें 56 प्रतिशत ठाकोर समुदाय से हैं। वहीं, 7 प्रतिशत वोटर अनुसूचित जाति यानी एससी हैं। इसके अलावा आदिवासी यानी अनुसूचित जनजाति के दो प्रतिशत वोटर है। बाकी मतदाता पटेल समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। इस जिले में 89 प्रतिशत वोटर ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं और वे खेती-किसानी के साथ-साथ छोटे-मोटे व्यवसाय भी करते हैं।
शंकर सिंह वाघेला के बेटे महेंद्र कांग्रेस से उम्मीदवार
इस सीट पर 2012 के विधानसभा चुनाव में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला के बेटे महेंद्र सिंह वाघेला कांग्रेस के टिकट पर जीते थे। हालांकि, बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए। इस बार वे फिर कांग्रेस में शामिल हुए हैं और अब पार्टी के टिकट पर भाजपा के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं। यह सीट उत्तर गुजरात में कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। यहां दूसरे चरण में वोटिंग होगी।
धवल सिंह दे सकते हैं भाजपा-कांग्रेस को टक्कर
इस बार बायड सीट पर मुख्य मुकाबला वैसे तो कांग्रेस उम्मीदवार महेंद्र सिंह वाघेला और भाजपा उम्मीदवार भीखीबेन परमान के बीच है, मगर एक निर्दलीय उम्मीदवार और है, जो प्रभावशाली साबित हो रहा है और राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो बड़ा उलटफेर भी कर सकता है। इनका नाम है धवल सिंह झाला और ये इस बार बायड में काफी सुर्खियां बटोर रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार, ये अंतिम परिणाम में महत्वपूर्ण साबित होंगे।
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