गुजरात की 25 सीटों पर कैसी है मौजूदा स्थिति: सरकार बचाने BJP ने लगाई पूरी ताकत, आप-कांग्रेस से मिल रही चुनौती

Published : Nov 03, 2022, 05:39 PM ISTUpdated : Nov 03, 2022, 05:56 PM IST
गुजरात की 25 सीटों पर कैसी है मौजूदा स्थिति: सरकार बचाने BJP ने लगाई पूरी ताकत, आप-कांग्रेस से मिल रही चुनौती

सार

गुजरात विधानसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा हो गई है। भाजपा राज्य में अपनी सरकार बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। जानिए मणिनगर से लेकर लिम्बायत तक 25 सीटों पर कैसी स्थिति है।

अहमदाबाद। गुजरात विधानसभा चुनाव के तारीखों की घोषणा हो गई है। भाजपा राज्य में अपनी सरकार बचाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। वहीं, कांग्रेस और आप द्वारा भी उसे कड़ी चुनौती दी जा रही है। भाजपा जहां विकास के मुद्दे पर वोटरों को अपने साथ एकजुट रखने की कोशिश में है। वहीं, आप और कांग्रेस की कोशिश एंटी इनकम्बेंसी का इस्तेमाल अपने पक्ष में करने की है। मणिनगर से लेकर लिम्बायत तक 25 सीटों पर कैसी स्थिति जानें...

1. मणिनगर: मणिनगर अहमदाबाद शहर का निर्वाचन क्षेत्र है। यह भाजपा का गढ़ रहा है। 1990 के दशक से यहां भाजपा की अच्छी पकड़ रही है। इस सीट से नरेंद्र मोदी 2002, 2007 और 2014 में चुनाव जीते थे। इस सीट से वर्तमान विधायक भाजपा के सुरेश पटेल हैं।

2. घाटलोदिया: घाटलोदिया अहमदाबाद शहर की सीट है। इस विधानसभा क्षेत्र में पाटीदार मतदाताओं की एक बड़ी संख्या है। यहां से गुजरात के वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और पूर्व सीएम आनंदीबेन पटेल ने चुनाव लड़ा था। भाजपा ने 2017 में भूपेंद्र पटेल को यहां से टिकट दिया था। हार्दिक पटेल के नेतृत्व वाले आरक्षण आंदोलन के बाद भी भूपेंद्र पटेल ने यहां 1.17 लाख वोटों के अंतर से जीत पायी थी।

3. मोरबी: पुल हादसे में 135 लोगों की मौत से मोरबी इन दिनों चर्चा में है। इस विधानसभा क्षेत्र में पाटीदार समाज के लोगों की बहुलता है। यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर रही है। पाटीदार आरक्षण आंदोलन के प्रभाव के चलते पांच बार के विधायक भाजपा के कांति अमृतिया 2017 में चुनाव हार गए थे। कांग्रेस के बृजेश मेरजा को जीत मिली थी। हालांकि बाद में मेरजा कांग्रेस छोड़कर भाजपा में सामिल हो गए। 2020 के उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर उन्हें जीत मिली। वह राज्य मंत्रिमंडल में मंत्री हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि पुल हादसे का यहां के चुनाव पर कितना असर पड़ता है।

4. राजकोट पश्चिम: राजकोट पश्चिम सीट पर भाजपा का दबदबा रहा है। अक्टूबर 2001 में पहली बार सीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने फरवरी 2002 में इस सीट से जीत हासिल की। यहां से भाजपा के दिग्गज वजुभाई वाला 1980 और 2007 के बीच छह बार विधायक चुने गए। 2002 में उन्होंने मोदी के लिए सीट खाली कर दिया था। 2017 के चुनाव में यहां से भाजपा के विजय रूपानी को जीत मिली थी। यहां से पिछले चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले इंद्रनील राजगुरु आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए हैं।

5. गांधीनगर उत्तर: गुजरात की राजधानी गांधीनगर शहर में कोई विशिष्ट जाति समीकरण नहीं है। यहां के अधिकांश वोटर राज्य सरकार के कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य हैं। गांधीनगर उत्तर निर्वाचन क्षेत्र 2008 में बनाया गया था। पिछले चुनावों में यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली है। 2012 में भाजपा के अशोक पटेल को 4,000 से अधिक वोट के अंतर से जीत मिली थी। वहीं, 2017 में कांग्रेस के सी जे चावड़ा ने अशोक पटेल को 4,700 मतों से हरा दिया था। 

6. अमरेली: गुजरात के पहले मुख्यमंत्री जीवराज मेहता 1962 में सौराष्ट्र क्षेत्र के अमरेली से चुने गए थे। 1985 से 2002 तक अमरेली से भाजपा उम्मीदवार जीते थे। कभी भाजपा के गढ़ रहे इस विधानसभा सीट पर कांग्रेस की स्थिति बहुत मजबूत है। 2002 में कांग्रेस के परेश धनानी ने भाजपा प्रत्याशी को हरा दिया था। 2007 में भाजपा के दिलीप संघानी ने परेश धनानी को हराया। वहीं, 2012 में कांग्रेस के परेश धनानी ने भाजपा प्रत्याशी को हराया। 2017 के चुनाव में भी उन्हें जीत मिली थी।

7. पोरबंदर: पोरबंदर विधानसभा क्षेत्र में मेर और कोली मतदाताओं का दबदबा है। यहां लंबे समय से भाजपा के बाबू बोखिरिया और कांग्रेस के अर्जुन मोढवाडिया के बीच कड़ी टक्कर हो रही है। 2017 में बोखिरिया ने विपक्ष के पूर्व नेता और पूर्व राज्य कांग्रेस प्रमुख मोढवाडिया को 1,855 वोटों से हराया था।

8. कुटियाना: गुजरात में शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के पास यह एकमात्र सीट है। गैंगस्टर दिवंगत संतोकबेन जडेजा के बेटे कंधल जडेजा ने 2012 और 2017 में इस सीट पर बीजेपी को हराया था। हालांकि अब कंधल जडेजा बीजेपी के करीब आ गए हैं। उन्होंने राज्यसभा चुनाव के दौरान बीजेपी उम्मीदवार को वोट दिया था। इसके चलते एनसीपी नेतृत्व ने उन्हें नोटिस दिया था।

9. गोंडल: इस विधानसभा क्षेत्र में पटेल और राजपूत समाज के लोगों की अच्छी संख्या है। यहां दोनों समुदायों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता है। इस सीट से वर्तमान विधायक भाजपा की गीताबेन जडेजा हैं। वह पूर्व विधायक जयराजसिंह जडेजा की पत्नी हैं। जयराजसिंह हत्या के मामले में जमानत पर बाहर हैं।

10. मेहसाणा: मेहसाणा सीट पर पाटीदारों की बहुलता है। 1990 से यह सीट भाजपा का गढ़ रहा है। बीजेपी नेता नितिन पटेल 2012 और 2017 में यहां से जीते थे। मेहसाणा शहर में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान हिंसक विरोध प्रदर्शन हुआ था। इसके चलते 2017 के चुनाव में नितिन पटेल को यहां कड़ी चुनौती मिली थी। वह 7,100 से अधिक वोट के अंतर से चुनाव जीत पाए थे।

11. वराछा: वराछा विधानसभा क्षेत्र सूरत शहर में है। यह पाटीदार बहुल सीट है। 2017 के चुनावों से पहले पाटीदार आरक्षण आंदोलन के दौरान यहां हिंसा हुई थी। इस सीट से गुजरात के पूर्व मंत्री किशोर कनानी 2012 में बीजेपी के टिकट पर जीते थे। 2017 के चुनाव में वह अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे थे। 

12. झगड़िया: झगड़िया विधानसभा सीट आदिवासी बहुल है। भारतीय ट्राइबल पार्टी के संस्थापक छोटू वसावा इस सीट से 1990 से जीत रहे हैं। 

13. आनंद: आनंद विधानसभा क्षेत्र में पटेल और ओबीसी मतदाताओं की मिली जुली आबादी है। यहां कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर है। 2017 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कांति सोधा परमार को यहां जीत मिली थी। वह 2012 और 2014 के उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवारों से हार गए थे।

14. पावी जेतपुर (एसटी): पावी जेतपुर एसटी के लिए रिजर्व सीट है। 2017 के चुनाव में यहां से कांग्रेस के नेता प्रतिपक्ष सुखराम राठवा को जीत मिली थी। 

15. जसदान: जसदान में कांग्रेस की पकड़ मजबूत रही है। 2017 के चुनाव में यहां से कांग्रेस नेता कुंवरजी बावलिया को जीत मिली थी। वह यहां से पांच बार विधायक रहे थे। गुजरात के सबसे बड़े कोली नेताओं में से एक बावलिया ने 2017 के चुनाव में जीत मिलने के बाद पाला बदल लिया था। वह वर्तमान में जसदान से भाजपा विधायक हैं।

16. दरियापुर: दरियापुर विधानसभा सीट अहमदाबाद शहर में है। मुस्लिम बहुल यह सीट 2012 में अस्तित्व में आई थी। 2012 से यहां से कांग्रेस के गयासुद्दीन शेख जीत रहे हैं। एआईएमआईएम के मैदान में आने के साथ ही इस सीट पर भाजपा, कांग्रेस, आप और एआईएमआईएम के बीच चौतरफा मुकाबला होगा।

17. जमालपुर-खड़िया: जमालपुर-खड़िया भी अहमदाबाद स्थित एक मुस्लिम बहुल सीट है। यह 2012 में बनी थी। 2012 के चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार साबिर काबलीवाला और कांग्रेस प्रत्याशी के बीच मुस्लिम वोटों के बंटवारे के चलते यहां भाजपा को जीत मिली थी। 2017 में कांग्रेस को इस सीट पर जीत मिली थी। साबिर काबलीवाला अब एआईएमआईएम के गुजरात अध्यक्ष हैं। चुनाव में यहां एआईएमआईएम, कांग्रेस,भाजपा और आप के बीच मुकाबला होगा। 

18. छोटा उदयपुर (एसटी) : रिजर्व सीट छोटा उदयपुर कांग्रेस का गढ़ रही है। यहां से कांग्रेस के दिग्गज नेता और 11 बार के विधायक मोहनसिंह राठवा 2012 से जीत रहे हैं। राठवा ने संन्यास का ऐलान किया है। वह अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे हैं। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद नारन राठवा भी अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे हैं। 

19. भरूच: भरूच विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या है। बीजेपी 1990 से यहां से चुनाव जीत रही है।

20. गोधरा: गोधरा विधानसभा सीट मुस्लिम बहुल है। 2007 और 2012 के चुनाव में यहां से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सी के राउलजी को जीत मिली थी। 2017 में भाजपा प्रत्याशी ने कांग्रेस उम्मीदवार को सिर्फ 258 वोटों से हरा दिया था। 

21. भावनगर ग्रामीण: भावनगर ग्रामीण को भाजपा का गढ़ माना जाता है। यहां से भाजपा के कद्दावर कोली नेता पुरुषोत्तम सोलंकी 2012 से चुनाव जीत रहे हैं। बिगड़ते स्वास्थ्य के चलते इस बार उनका टिकट कट सकता है। 

22. वडगाम (एससी): रिजर्व सीट वडगाम में बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर है। 2017 के चुनाव में यहां से युवा दलित नेता जिग्नेश मेवाणी को जीत मिली थी। वह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे थे। कांग्रेस ने उन्हें समर्थन दिया था। 

23. उंझा : उंझा मेहसाणा जिले में स्थित विधानसभा सीट है। पीएम नरेंद्र मोदी का गृहनगर वडनगर इसी निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है।  उंझा कड़वा-पाटीदार समुदाय की संरक्षक देवी मां उमिया के उमियाधाम मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। 2017 के चुनाव में कांग्रेस की आशा पटेल ने भाजपा के नारायण पटेल को हरा दिया था। इसके बाद वह भाजपा में शामिल हो गईं थी। उन्होंने 2019 में उपचुनाव जीत लिया था। डेंगू के कारण आशा पटेल की दिसंबर 2021 में मौत हो गई थी, जिसके बाद यह सीट खाली हो गई थी।

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24. राधनपुर: राधनपुर में कांग्रेस और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर होती रही है। 2017 के चुनाव में यहां से कांग्रेस के टिकट पर 
ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर को जीत मिली थी। 2019 में वह इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गए थे, लेकिन उपचुनाव में कांग्रेस के रघु देसाई से हार गए थे। इस बार के चुनाव में स्थानीय भाजपा नेता उनकी उम्मीदवारी का विरोध कर रहे हैं।

25. लिंबायत: यहां से बीजेपी की संगीता पाटिल 2012 से जीत रही हैं। यह सीट गुजरात बीजेपी अध्यक्ष सीआर पाटिल की नवसारी लोकसभा सीट के अंतर्गत आती है। इस विधानसभा क्षेत्र में अच्छी खासी मुस्लिम आबादी है।

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