क्या निमोनिया से जूझ रहे सलीम कुमार की हालत अचानक इतनी गंभीर कैसे हो गई? क्या वेंटिलेटर पर जाने के बाद आया हार्ट अटैक उनकी मौत की सबसे बड़ी वजह बना? क्या मलयालम सिनेमा ने अपना सबसे बहुमुखी कॉमेडी और नेशनल अवॉर्ड विजेता सितारा खो दिया? क्या 'CID Moosa' और 'Meesha Madhavan' के यादगार अभिनेता की जगह अब कभी भर पाएगी?
Malayalam Actor Salim Kumar: भारतीय सिनेमा और विशेषकर मलयालम फिल्म इंडस्ट्री से एक बेहद दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग, बेमिसाल अदाकारी और जिंदादिली से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले दिग्गज अभिनेता और राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता सलीम कुमार (Salim Kumar) का निधन हो गया है। उन्होंने 56 साल की उम्र में कोच्चि के एक निजी अस्पताल में अंतिम सांस ली। इस दुखद खबर के सामने आते ही पूरी फिल्म इंडस्ट्री और सोशल मीडिया पर शोक की लहर दौड़ गई है। प्रशंसकों के लिए इस बात पर यकीन करना मुश्किल हो रहा है कि हमेशा चेहरे पर मुस्कान बिखेरने वाला सितारा अब हमारे बीच नहीं रहा।

वेंटिलेटर पर थे अभिनेता: आखिरी वक्त में क्या हुआ?
यह दुखद घटना शनिवार, 6 जून, 2026 की है। सलीम कुमार लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे थे। हाल ही में निमोनिया की शिकायत के बाद उन्हें कोच्चि के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के मुताबिक, शनिवार सुबह अचानक उनकी तबीयत बहुत ज्यादा बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें तुरंत लाइफ सपोर्ट यानी वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों की पूरी टीम उनकी जान बचाने की जद्दोजहद में जुटी थी, लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था। इलाज के दौरान ही उन्हें अचानक दिल का दौरा (Heart Attack) पड़ा। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उनके शरीर ने रिस्पॉन्स करना बंद कर दिया और शनिवार रात 10:43 बजे डॉक्टरों ने उन्हें आधिकारिक तौर पर मृत घोषित कर दिया।

शादी के मंडप से शुरू हुआ था सफर: किस्मत का अनोखा खेल!
सलीम कुमार के जीवन और उनके करियर की शुरुआत की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। 10 अक्टूबर 1969 को जन्मे सलीम कुमार बचपन से ही मिमिक्री के उस्ताद थे। कॉलेज के दिनों में उन्होंने लगातार तीन बार यूनिवर्सिटी स्तर पर मिमिक्री का गोल्ड मेडल जीता था। लेकिन उनके करियर का सबसे बड़ा ट्विस्ट साल 1996 में आया। जिस दिन सलीम कुमार अपनी प्रेमिका सुनीता के साथ शादी के बंधन में बंध रहे थे, ठीक उसी दिन उन्हें उनकी जिंदगी की पहली फिल्म 'इष्टमानु नूरु वट्टम' ऑफर हुई थी। शादी के मंडप से शुरू हुआ यह सफर आगे चलकर इतिहास रचने वाला था। साल 2000 में आई फिल्म 'थेनकासीपट्टनम' उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जिसने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया।
कॉमेडी के बादशाह, जिन्होंने अभिनय की परिभाषा बदल दी
सलीम कुमार सिर्फ एक कॉमेडियन नहीं थे, बल्कि वे अभिनय के एक पूरे स्कूल थे। उन्होंने 'कल्याणरमन', 'सीआईडी मूसा', 'मीशा माधवन' और 'मायावी' जैसी फिल्मों में ऐसे किरदार निभाए जिन्हें आज भी लोग देखकर लोटपोट हो जाते हैं। हालांकि, उनकी कला का असली लोहा दुनिया ने तब माना जब उन्होंने फिल्म 'अदामिन्ते मकान अबू' (Adaminte Makan Abu) में एक बेहद गंभीर और भावुक किरदार निभाया। इस फिल्म में उनकी बेहतरीन अदाकारी के लिए उन्हें देश के सबसे प्रतिष्ठित 'सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार' (National Film Award for Best Actor) से नवाजा गया था। अभिनय के अलावा उन्होंने 'कंपार्टमेंट' और 'करुथा जूथन' जैसी फिल्मों का शानदार निर्देशन भी किया था।

गृहनगर में अंतिम विदाई: मुख्यमंत्री भी देंगे श्रद्धांजलि
सलीम कुमार अपने पीछे पत्नी सुनीता और दो बेटों, चंदू और आरोमल को छोड़ गए हैं। रविवार, 7 जून, 2026 को उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए सुबह 9 बजे से परावुर टाउन हॉल में रखा जाएगा, जहाँ सिनेमा जगत की हस्तियां और उनके हजारों चाहने वाले उन्हें आखिरी विदाई देंगे। इस दुख की घड़ी में केरल के मुख्यमंत्री और दिग्गज नेता वी.डी. सतीसन भी दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि देने के लिए उनके गृहनगर परावुर पहुंच रहे हैं। दोपहर बाद पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। सलीम कुमार भले ही इस दुनिया से चले गए हों, लेकिन अपनी फिल्मों और किरदारों के जरिए वे हमेशा अमर रहेंगे।
एक कलाकार चला गया, लेकिन उसकी मुस्कान अमर रहेगी
सलीम कुमार का निधन केवल एक अभिनेता की मौत नहीं है, बल्कि मलयालम सिनेमा के एक ऐसे युग का अंत है जिसने लाखों लोगों को हंसाया, रुलाया और प्रेरित किया। उनकी फिल्मों के संवाद, उनकी अद्भुत कॉमिक टाइमिंग और उनकी मानवीय संवेदनाओं से भरी भूमिकाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा यादगार रहेंगी। पर्दा भले ही गिर गया हो, लेकिन सलीम कुमार का नाम भारतीय सिनेमा के इतिहास में हमेशा चमकता रहेगा।


