क्या सिर्फ 3 महीने में ₹89 की बढ़ोतरी महंगाई की नई बड़ी चेतावनी है, या अभी और झटका बाकी है? क्या ₹703 प्रति सिलेंडर नुकसान का दावा भविष्य में LPG की कीमतों को और ऊपर ले जाएगा? पेट्रोल, डीजल, CNG और LPG सभी महंगे-क्या आम परिवारों का मासिक बजट अब बड़े संकट में है? क्या आगे और बड़ा प्राइस शॉक आने वाला है?
LPG Price Hike: देश की आम जनता पर एक बार फिर महंगाई का एक ऐसा चाबुक चला है, जिसने हर घर के बजट की रीढ़ तोड़कर रख दी है। अगर आप सोच रहे थे कि इस महीने सब कुछ सामान्य रहेगा, तो आपके पैरों तले जमीन खिसकने वाली है। बिना किसी पूर्व चेतावनी के, अचानक घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतों में भारी इजाफा कर दिया गया है। नई दरें आज रात 12 बजे से पूरे देश में लागू हो चुकी हैं। यह झटका इतना बड़ा है कि मध्यमवर्ग के चूल्हे की आग अब जेब को झुलसाने लगी है।

किन शहरों में सबसे ज्यादा असर? दिल्ली से पटना तक मची खलबली!
सरकारी तेल कंपनियों ने घरेलू रसोई गैस (14.2 किलोग्राम) की कीमतों में ₹29 प्रति सिलेंडर की सीधी बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में हाहाकार मच गया है। राजधानी दिल्ली में जो सिलेंडर कल तक ₹913 में मिल रहा था, वह अब बढ़कर ₹942 का हो चुका है। वहीं, बिहार की राजधानी पटना में तो कीमतें आसमान छू रही हैं, जहां उपभोक्ताओं को अब एक सिलेंडर के लिए ₹1040 जैसी भारी-भरकम रकम चुकानी होगी। कोलकाता में नई कीमत ₹968, मुंबई में ₹941.50 और चेन्नई में ₹957.50 हो गई है।
3 महीने के भीतर दूसरी बार 'सर्जिकल स्ट्राइक', क्या है असली खेल?
जनता अभी पिछले झटके से संभल भी नहीं पाई थी कि यह दूसरा हमला बोल दिया गया। आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले 3 महीने के भीतर यह दूसरी बार है जब गैस के दाम बढ़ाए गए हैं। इससे पहले 7 मार्च को रसोई गैस की कीमतों में ₹60 की बड़ी बढ़ोतरी की गई थी। अगर दोनों को जोड़ दिया जाए, तो महज 90 दिनों के भीतर घरेलू गैस सिलेंडर ₹89 महंगा हो चुका है।
चौंकाने वाला सच: सिर्फ बड़े सिलेंडर ही नहीं, बल्कि छोटे परिवारों और मजदूरों के काम आने वाले 5 किलोग्राम वाले छोटे एलपीजी सिलेंडर पर भी ₹11 का बोझ बढ़ा दिया गया है, जिसके बाद इसकी कीमत ₹821.50 के पार पहुंच गई है।
पर्दे के पीछे की कहानी: तेल कंपनियों को हो रहा था ₹703 का नुकसान?
आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि आधी रात को दाम बढ़ाने पड़े? न्यूज एजेंसी PTI के सूत्रों ने जो खुलासा किया है, वह बेहद हैरान करने वाला है। पर्दे के पीछे की कहानी यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की लागत (Global Energy Costs) में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। सूत्रों का दावा है कि इस बढ़ोतरी से पहले सरकारी तेल कंपनियों को हर एक घरेलू सिलेंडर बेचने पर करीब ₹703 का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। तेल कंपनियों का कहना है कि ₹29 की यह बढ़ोतरी तो सिर्फ एक 'आंशिक भरपाई' है, यानी आने वाले दिनों में और भी बड़े झटके देखने को मिल सकते हैं!
सिर्फ गैस ही नहीं... पेट्रोल, डीजल और CNG ने भी बिगाड़ा खेल!
LPG का महंगा होना तो सिर्फ एक शुरुआत है, असल में महंगाई का यह जाल बहुत गहरा है। पिछले कुछ हफ्तों के भीतर पेट्रोल, डीजल और सीएनजी (CNG) की कीमतों ने भी आम आदमी की कमर तोड़ दी है:
- पेट्रोल-डीजल: अकेले मई के महीने में ही पेट्रोल और डीजल की कीमतें ₹7.50 प्रति लीटर तक बढ़ चुकी हैं।
- CNG: पर्यावरण अनुकूल मानी जाने वाली सीएनजी भी करीब ₹6 प्रति किलो महंगी हो चुकी है।
कंपनियों का दावा है कि वे अब भी पेट्रोल पर ₹11 प्रति लीटर और डीजल पर ₹33.6 प्रति लीटर का नुकसान खुद झेल रही हैं और वैश्विक महंगाई का पूरा बोझ जनता पर नहीं डाला गया है।
कैसे और कौन तय करता है आपके रसोई गैस की कीमत?
आम उपभोक्ता हमेशा यह सोचता है कि ये कीमतें अचानक कैसे बदल जाती हैं? इसके पीछे पांच बड़े फैक्टर्स काम करते हैं:
- इंटरनेशनल मार्केट: वैश्विक बाजार में एलपीजी की क्या कीमत चल रही है।
- करेंसी वॉर: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की क्या स्थिति है।
- लॉजिस्टिक्स खर्च: गैस का आयात, उसकी ढुलाई, बॉटलिंग प्लांट का खर्च और डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन।
- टैक्स और सब्सिडी: केंद्र और राज्य सरकारों की टैक्स नीतियां।
फिलहाल, इस नए इजाफे ने देश के करोड़ों परिवारों को कड़ाके का झटका दिया है और अब देखना यह है कि क्या आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार शांत होता है या फिर जनता को ऐसे ही और झटके सहने पड़ेंगे।


