
हरिद्वार : उत्तराखंड विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Chunav 2022) में प्रचार तेज हो गया है। इसी कड़ी में बेटी अनुपमा के लिए वोट मांगने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत (Harish Rawat) हरिद्वार पहुंचे। इस दौरान कांग्रेस समर्थकों से बातचीत के दौरान एक वाकया ऐसा भी आया, जब हरीश रावत इमोशनल हो गए और उनकी आंखों से आंसू छलकने लगे। पुराने लोगों को देख रावत को 2017 में इस सीट पर मिली हार की याद आ गई और वे इमोशनल हो गए।
पिता को भावुक देख अनुपमा भी रोने लगी
इधर पिता हरीश रावत को इमोशनल देख अनुपमा रावत की आंखों में भी आंसू आ गए। पिछले चुनाव में हरिद्वार ग्रामीण सीट पर मुस्लिमों के वोट बंट जाने के कारण चुनाव हारे। इस सीट से इस बार उनकी बेटी मैदान में है। हरीश रावत इस बार इस सीट से अपनी बेटी अनुपमा के लिए वोट मांगने पहुंचे, तो उनका दर्द छलक पड़ा। उन्होंने कहा, जिस दिन मेरी बेटी आपकी सेवा से इनकार करेगी, आदर्श मूल्यों के लिए लड़ने से इनकार करेगी, तो मैं अपनी बेटी को त्याग दूंगा। अगर मैंने इंसानों की सेवा की है, तो हिंदू हों या मुसलमान, सभी मेरी बेटी को जिताएं।
पुराने दिन याद आ गए - रावत
हरीश रावत ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि हमारे बहुत पुराने-पुराने साथी आए थे तो मैं भावनाओं में आकर थोड़ी बहुत बात कर गया। मैंने जो भी कहा हरिद्वार से जो मेरा संबंध है, उसे देखते हुए कहा। मैं 22 साल से हरिद्वार और इस धरती की सेवा कर रहा हूं। उन्होंने कहा कि 2017 में जो हार हुई थी उसका बदला मेरी बेटी चुकाएगी। भावुक होने की बात है तो मैंने अपने एक पुराने साथी को देखा तो रोक नहीं पाया, बड़ी मुश्किल से कंट्रोल किया वो भी रोने लगे थे।
BSP को बताया 'सुपारी किलर'
उत्तराखंड की आबादी में 14 फीसदी मुस्लिम हैं, जिनमें से सबसे ज्यादा आबादी हरिद्वार जिले में ही है। यहां बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने एक मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट दिया है, जिसे कांग्रेस (Congress) के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इस बारे में हरीश रावत ने कहा कि हमारे विषय में एक पार्टी सुपारी किलर का काम कर रही है। पिछली बार भी कांग्रेस को ध्यान में रखकर उम्मीदवार उतारा था, इस बार भी उम्मीदवार इसलिए बदला, जिससे भाजपा प्रत्याशी का जीतना आसान हो। BSP सोचे की BJP को हराना लक्ष्य है या कांग्रेस को।
अनुपमा ने भी मांगा आशीर्वाद
वहीं अनुपमा रावत ने कहा कि जीत-हार मेरी परिपाटी कभी भी नहीं रही कि मैंने बदला लेना है, लेकिन मेरा उद्देश्य हमेशा से राजनीति में आने का रहा है। मेरी जो शिक्षा और दीक्षा रही मेरा यह रहा है कि मैं काम करूं। इसीलिए मैंने राजनीति को चुना कि मुझे लोगों की सेवा करनी है और युवा होने के नाते भी महिला होने के नाते भी अगर मैं कुछ नया बदलाव ला सकती हूं और अपने राज्य के लिए कुछ कर सकूं, यहां के लोगों के लिए कुछ कर सकूं तो मेरा जीवन उसमें बहुत सार्थक मानूंगी।
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