क्या है वह वो गंभीर बीमारी जो अलका याज्ञनिक को हुई, लक्षण से लेकर बचाव के उपाय तक जानिए

Published : Jun 25, 2026, 02:19 PM IST
Rare hearing disorder Alka Yagnik

सार

पद्म भूषण से सम्मानित दिग्गज सिंगर अलका याज्ञनिक ने 2 साल बाद अपनी गंभीर सुनने की बीमारी पर खुलकर बात की। जानिए क्या है Sensorineural Hearing Loss और इसके लक्षण।

हाल ही में भारतीय संगीत जगत की दिग्गज सिंगर अलका याज्ञनिक को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्म भूषण से सम्मानित किया। इस खास सम्मान के बाद अलका ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल मैसेज शेयर करते हुए पिछले दो सालों की अपनी हेल्थ जर्नी पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि वह एक दुर्लभ सुनने की बीमारी से जूझ रही हैं, जिसके कारण लंबे समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों और लाइमलाइट से दूर थीं। अलका की इस पोस्ट के बाद उनके चाहने वाले चिंता में पड़ गए हैं।

पद्म भूषण मिलने के बाद अलका याज्ञनिक का भावुक संदेश

राष्ट्रपति भवन में पद्म भूषण सम्मान प्राप्त करने के बाद अलका याज्ञनिक ने सोशल मीडिया पर लिखा, "पिछले दो सालों से मैं लाइमलाइट, सार्वजनिक कार्यक्रमों और अपनी निजी यात्रा को साझा करने से दूर रही हूं। आपमें से कई लोग जानते हैं कि मैं कठिन स्वास्थ्य परिस्थितियों से गुजर रही हूं। इस दौरान आपका प्यार, दुआएं, संदेश और अटूट समर्थन हर कदम पर मेरे साथ रहा है।"

अलका याज्ञनिक ने 2024 में किया था बीमारी का खुलासा

करीब दो साल पहले अलका याज्ञनिक ने बताया था कि उन्हें एक दुर्लभ बीमारी "सेंसोरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस" (Sensorineural Hearing Loss) हो गई है। उन्होंने तब लिखा था, "कुछ सप्ताह पहले फ्लाइट से उतरते समय अचानक मुझे सुनाई देना बंद हो गया। काफी हिम्मत जुटाने के बाद अब मैं इस बारे में बात कर रही हूं। डॉक्टरों ने बताया कि वायरल अटैक की वजह से मुझे दुर्लभ सेंसोरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस हुआ है। यह अचानक आया बड़ा झटका था, जिसकी मैंने कभी कल्पना नहीं की थी।" उन्होंने युवाओं को तेज संगीत और लंबे समय तक हेडफोन इस्तेमाल करने से भी सावधान रहने की सलाह दी थी।

क्या है Sensorineural Hearing Loss?

सेंसोरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस (SNHL) सुनने की क्षमता से जुड़ी सबसे आम स्थायी समस्याओं में से एक मानी जाती है। यह तब होती है जब कान के अंदर मौजूद बेहद संवेदनशील हेयर सेल्स या आवाज को दिमाग तक पहुंचाने वाली श्रवण नसें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। एक बार नुकसान होने के बाद ये सेल्स और नसें सामान्य रूप से खुद को ठीक नहीं कर पातीं। यह समस्या एक कान या दोनों कानों में हो सकती है और धीरे-धीरे या अचानक विकसित हो सकती है।

कैसे और किन्हें हो सकती है सेंसोरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस?

यह बीमारी जन्मजात, बढ़ती उम्र के कारण, अचानक, शोर की वजह से हो सकती है। यह खासतौर पर बढ़ती उम्र, लगातार तेज़ आवाज़ में काम करने, ज्यादा हेअद्फों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को हो सकती है। वायरल संक्रमण, सिर या कान की चोट, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर, कुछ दवाओं के ज्यादा इस्तेमाल, धूम्रपान या ख़राब हार्ट हेल्थ की वजह से हो सकती है। ज्यादा तेज़ म्यूजिक सुनने से बचने या शो शराबे वाली जगह में ईयर प्रोटेक्शन से इससे बचा जा सकता है। समय-समय पर जांच कराना और कानों से जुड़ी समस्या को नज़रअंदाज़ ना करना इससे बचने में मदद कर सकता है।

क्या है सेंसोरीन्यूरल नर्व हियरिंग लॉस का इलाज

ज्यादातर मामलों में यह समस्या स्थायी मानी जाती है, लेकिन कई उपचार उपलब्ध हैं, जिनमें हियरिंग एड्स, कॉक्लियर इम्प्लांट , स्टेरॉयड आधारित उपचार (अचानक सुनने की क्षमता कम होने पर) और स्पीच और ऑडिटरी थेरेपी शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर पहचान और इलाज से स्थिति को बेहतर तरीके से नियंत्रित किया जा सकता है।

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