
स्वतंत्रता दिवस वीकेंड पर सिनेमाघरों में उतरी सनी देओल की 'बंटवारा 1947' को दर्शकों से काफी पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिल रहा है। राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी यह फिल्म भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि में इंसानियत, विस्थापन और रिश्तों की कहानी पेश करती है। सनी देओल एक बार फिर बड़े पर्दे पर अपने दमदार अंदाज में नजर आए हैं, लेकिन दर्शकों के मुताबिक इस बार उनके किरदार में इमोशनल साइड भी खास तौर पर देखने को मिलता है। शबाना आजमी के अभिनय को फिल्म की सबसे बड़ी ताकत बताया जा रहा है। वहीं, प्रीति जिंटा की हिंदी सिनेमा में वापसी और करण देओल के काम की भी तारीफ हो रही है।
फिल्म देखने वाले शुरुआती दर्शक इसकी राइटिंग, इमोशनल कहानी और कलाकारों की परफॉर्मेंस की तारीफ कर रहे हैं। कई दर्शकों ने खास तौर पर कहा कि फिल्म सिर्फ सनी देओल के ‘मास’ अवतार पर निर्भर नहीं रहती, बल्कि उनके किरदार के भीतर चल रहे बदलाव को भी दिखाती है।
एक दर्शक ने लिखा, “अभी Batwara 1947 देखी और सच कहूं तो मैं अभी तक हैरान हूं। हम सोचते थे कि Gadar उनका शिखर था, लेकिन यह सनी देओल की शानदार और जबरदस्त वापसी है! जिस तरह वह स्क्रीन पर छा जाते हैं, वह पूरी तरह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। पूरा थिएटर हिला देने वाला अनुभव, बिल्कुल मास्टरक्लास!”
Just watched #Batwara1947 and honestly bro, main abhi tak shock mein hoon. We used to think #Gadar was his peak, but this is a legendary, Great comeback for #SunnyDeol! The way he dominates the screen is pure GOOSEBUMPS stuff. What a POWERHOUSE performance, especially in the… pic.twitter.com/X4sR2tPK6I
— Suresh Parmar® (@iamSureshParmar) August 14, 2026
एक अन्य दर्शक ने लिखा, “फिल्म खत्म होने के बाद Batwara 1947 मेरे साथ इतनी रह जाएगी, इसकी उम्मीद नहीं थी। मैं सनी देओल के सामान्य पावर मोमेंट्स की उम्मीद करके गया था, लेकिन जिन दृश्यों के बारे में अब भी सोच रहा हूं, वे शांत दृश्य हैं। सिकंदर का धीरे-धीरे माई को अपनी मां की तरह देखने लगना बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। वहां सनी की आंखें ही ज्यादातर काम करती हैं।”
Didn’t expect #Batwara1947 to stay with me this much after the film ended. I went in expecting the usual Sunny Deol power moments, but the scenes I’m still thinking about are the quieter ones. Sikandar slowly beginning to see Mai as his own mother is beautifully done. Sunny’s… pic.twitter.com/FK54UUPeGM
— Sweta Chowdhury (@iSwetaChowdhury) August 14, 2026
एक दर्शक ने लिखा, “अगर आप सनी देओल के फैन हैं, तो यह फिल्म निश्चित तौर पर आपके लिए है। और अगर आपको भाईचारे और एकता वाली कहानी पसंद है, तो आपको यह और भी ज्यादा पसंद आएगी। फिल्म की लेखनी सच में बहुत अच्छी है। पहला भाग थोड़ा समय लेता है, लेकिन जैसे ही विभाजन की घोषणा होती है, फिल्म काफी मजबूत हो जाती है। रेलवे स्टेशन वाला सीक्वेंस खास तौर पर बेहद प्रभावशाली था। हमें सनी पाजी का एक ज्यादा भावुक पक्ष भी देखने को मिलता है, जो मुझे बहुत पसंद आया। लेकिन इस फिल्म की सबसे बड़ी आत्मा शबाना आजमी हैं। वह बिल्कुल शानदार हैं। प्रीति जिंटा को बड़े पर्दे पर दोबारा देखना भी अच्छा लगा और करण देओल ने भी अच्छा काम किया है।”
#Batwara1947 - 4/5
If you’re a Sunny Deol fan.. this one is definitely for you. And if you like the whole brotherhood and unity angle, you’re going to enjoy it even more. Otherwise, you can skip it.
The writing is genuinely very good. The first half takes a little time but once… pic.twitter.com/UZb11m5JhO— Gill (@Hanjigill) August 14, 2026
एक दर्शक ने फिल्म की चरित्र-लेखन की तारीफ करते हुए लिखा, “मुझे अच्छा लगा कि #Batwara1947 ने भावुक करने से पहले मुझे असहज किया। सिकंदर और हमीदा दोनों पहले भाग में ऐसे फैसले लेते हैं, जिनसे मैं परेशान हुआ। किसी को नैतिक रूप से पूरी तरह सही नहीं दिखाया गया है। लेकिन जैसे-जैसे उनका डर, विस्थापन और असुरक्षा समझ आने लगती है, आप उन्हें अलग नजर से देखने लगते हैं। अच्छा किरदार-लेखन यही करता है।”
I liked that #Batwara1947 made me uncomfortable before it made me emotional. Sikandar and Hamida both make choices in the first half that frustrated me. Nobody is presented as morally perfect. But as their fear, displacement and insecurity start making sense, you judge them… pic.twitter.com/uQwZLRjCZ9
— Mukul jee 🇮🇳 (@imukuljee) August 14, 2026
एक X यूजर ने लिखा, “राजकुमार संतोषी की Batwara 1947 सिर्फ एक और विभाजन पर बनी फिल्म नहीं है—यह विस्थापन, नुकसान, सांप्रदायिक नफरत और सबसे बढ़कर इंसानियत की बेहद भावुक कहानी है। सनी देओल खास तौर पर इसलिए शानदार हैं क्योंकि वह अपने जाने-पहचाने बड़े व्यक्तित्व वाले अंदाज से बचते हैं। शबाना आजमी बेहतरीन हैं। प्रीति जिंटा की हिंदी सिनेमा में वापसी शानदार और स्वागत योग्य है।”
#Batwara1947: SOLID. ⭐️⭐️⭐️✨
3.5/5#RajkumarSantoshi ’s Batwara 1947 is not just another Partition drama—it is a deeply emotional story about displacement, loss, communal hatred and, above all, humanity. While many films set against Partition often rely on loud nationalism or… pic.twitter.com/tb3q9Hk6Hj— 🌹हम_बेपरवाह🌹 (@hum_beparwaah) August 14, 2026
एक अन्य यूजर ने कहा, “एक पल सनी देओल थिएटर को दहाड़ने पर मजबूर कर देते हैं, अगले ही पल पूरा हॉल शांत हो जाता है। #Batwara1947 साबित करती है कि मास एक्टिंग और इमोशनल एक्टिंग एक ही परफॉर्मेंस का हिस्सा हो सकती हैं।”
Ek moment Sunny Deol theatre ko roar karwate hain, next moment 🔥👏 poora hall silent. #Batwara1947 proves that mass acting and emotional acting can belong in the same performance. #Batwara #Batwara1947Review
— Mousumi Deshpande. (@mousumi4988) August 14, 2026
एक दर्शक ने लिखा, “Batwara 1947 में मेरी पसंदीदा बात यह है कि सिकंदर को पहली फ्रेम से एक परफेक्ट हीरो नहीं बनाया गया है। पहले भाग में कई ऐसे पल थे जहां मैं उससे सच में असहमत था। फिर फिल्म धीरे-धीरे उसे अपने गुस्से और पूर्वाग्रहों का सामना करवाती है। क्लाइमैक्स तक मैं पूरी तरह उसके साथ था। यह बदलाव मेरे लिए बहुत काम करता है।”
My favourite thing about #Batwara1947 is that Sikandar is not written as a perfect hero from the first frame. There were moments in the first half where I genuinely disagreed with him. Then the film slowly makes him confront his own anger and prejudices. By the climax, I was… pic.twitter.com/M84u9TsD90
— Sourabh Bakshi (@SourabhBakshi_) August 14, 2026
राजकुमार संतोषी और सनी देओल की जोड़ी लंबे समय बाद साथ आई है। दोनों इससे पहले 'घायल', 'दामिनी' और 'घातक' जैसी फिल्मों में काम कर चुके हैं। इस बार संतोषी ने विभाजन को सिर्फ राष्ट्रवादी या हिंसक नजरिए से पेश करने के बजाय आम लोगों के डर, घर छूटने की पीड़ा और रिश्तों के जरिए कहानी कहने की कोशिश की है। फिल्म असग़र वजाहत की चर्चित किताब 'Jis Lahore Nai Dekhya O Jamyai Nai' पर आधारित है। कहानी में एक मुस्लिम व्यक्ति विभाजन के दौरान पाकिस्तान पहुंचता है, लेकिन वहां उसे एक हिंदू महिला मिलती है, जो अपना घर छोड़ने को तैयार नहीं है। सिकंदर उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेता है और धीरे-धीरे उसे अपनी मां जैसा मानने लगता है।
मनोरंजन जगत की सबसे खास खबरें अब एक क्लिक पर। फिल्में, टीवी शो, वेब सीरीज़ और स्टार अपडेट्स के लिए Bollywood News in Hindi और Entertainment News in Hindi सेक्शन देखें। टीवी शोज़, टीआरपी और सीरियल अपडेट्स के लिए TV News in Hindi पढ़ें। साउथ फिल्मों की बड़ी ख़बरों के लिए South Cinema News, और भोजपुरी इंडस्ट्री अपडेट्स के लिए Bhojpuri News सेक्शन फॉलो करें — सबसे तेज़ एंटरटेनमेंट कवरेज यहीं।