Published : May 10, 2026, 04:10 PM ISTUpdated : May 10, 2026, 04:20 PM IST
तमिलनाडु चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद थलापति विजय ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। दिलचस्प बात यह है कि पिछले एक दशक में उनकी कई फिल्मों में भ्रष्टाचार, सिस्टम और जनता के मुद्दे ज़ोरदार तरीके से उठाए जा चुके हैं।
थलापति विजय ने तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के साथ तमिलनाडु राजनीति में धमाकेदार एंट्री की और पहली ही बार में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर राज्य के मुख्यमंत्री बने। 51 साल के विजय की लोकप्रियता पहले फिल्मों तक सीमित मानी जाती थी, लेकिन अब उन्होंने साबित कर दिया कि उनकी पकड़ जनता के बीच भी उतनी ही मजबूत है। पिछले कई सालों से विजय अपनी फिल्मों में भ्रष्टाचार, सिस्टम, किसान, शिक्षा और जनता के अधिकार जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं। जानिए उनकी ऐसी ही 7 फिल्मों के बारे में…
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Thuppakki में देश के रक्षक बने थलापति विजय
2012 में रिलीज हुई Thuppakki में विजय ने जगदीश धनपाल नाम के इंटेलिजेंस ऑफिसर का रोल निभाया था। फिल्म सीधे चुनावी राजनीति पर नहीं थी, लेकिन इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और सिस्टम की जिम्मेदारी जैसे मुद्दों को दिखाया गया। विजय का किरदार देश को बचाने वाले हीरो के रूप में सामने आया। यही फिल्म उनके उस दौर की शुरुआत मानी जाती है, जहां उनकी फिल्मों में सामाजिक और राजनीतिक संदेश ज्यादा दिखाई देने लगे।
2014 की Kaththi विजय के करियर की सबसे चर्चित सोशल फिल्मों में गिनी जाती है। इसमें उन्होंने किसानों की जमीन और पानी हड़पने वाली कॉरपोरेट-पॉलिटिकल लॉबी के खिलाफ आवाज उठाई थी। विजय का किरदार ‘कथीरेसन’ गांव वालों को संगठित कर सिस्टम से लड़ता है। फिल्म ने किसानों के संकट, कॉरपोरेट दबाव और ग्रामीण भारत की समस्याओं को बड़े स्तर पर दिखाया। यही वजह रही कि फिल्म को सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, बल्कि एक मजबूत सामाजिक बयान माना गया।
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Mersal ने हेल्थ सिस्टम पर उठाए सवाल
2017 में आई Mersal ने सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था और मेडिकल सेक्टर के निजीकरण पर तीखी चोट की। विजय ने फिल्म में ट्रिपल रोल निभाया, लेकिन डॉक्टर ‘मारन’ वाला किरदार सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। फिल्म में दिखाया गया कि कैसे आम लोग महंगे इलाज और भ्रष्ट सिस्टम के बीच पिसते हैं। रिलीज के बाद फिल्म को लेकर राजनीतिक बहस भी हुई थी। कई लोगों ने इसे सरकार की नीतियों पर सीधा हमला बताया था।
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Sarkar में वोट चोरी से शुरू हुई बगावत
2018 की ब्लॉकबस्टर Sarkar में विजय ने सुंदर रामासामी का रोल निभाया था। फिल्म की कहानी तब शुरू होती है जब उन्हें पता चलता है कि उनका वोट कोई और डाल चुका है। इसके बाद उनका किरदार पूरे भ्रष्ट राजनीतिक सिस्टम के खिलाफ खड़ा हो जाता है। फिल्म में वोटर राइट्स, चुनावी गड़बड़ी और राजनीतिक भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे खुलकर दिखाए गए। इस फिल्म के बाद विजय की राजनीतिक एंट्री की चर्चाएं और तेज हो गई थीं।
2019 में रिलीज हुई Bigil सिर्फ स्पोर्ट्स फिल्म नहीं थी। विजय का किरदार महिला फुटबॉल टीम को आगे बढ़ाने के साथ-साथ सिस्टम की लापरवाही और जेंडर भेदभाव के खिलाफ भी लड़ता है। फिल्म में महिला सशक्तिकरण, ग्रासरूट डेवलपमेंट और युवाओं के सपनों को केंद्र में रखा गया। यही वजह रही कि ‘बिगिल’ को फैन्स ने सिर्फ मसाला फिल्म नहीं, बल्कि सामाजिक संदेश देने वाली फिल्म माना।
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Master में शिक्षा और जुवेनाइल सिस्टम पर फोकस
2021 की Master में विजय ने JD नाम के शराबी प्रोफेसर का रोल निभाया, जो बाद में खुद को बदलकर बच्चों के लिए लड़ता है। फिल्म में जुवेनाइल होम, शिक्षा व्यवस्था और अपराध की दुनिया में फंसे बच्चों की कहानी दिखाई गई। विजय का किरदार सिस्टम की कमियों को चुनौती देता नजर आता है। फिल्म ने यह सवाल भी उठाया कि अगर व्यवस्था सही हो, तो कई बच्चे अपराध की दुनिया में जाने से बच सकते हैं।
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Beast में दिखा विजय का सिस्टम से टकराव
2022 में रिलीज हुई Beast में विजय एक पूर्व इंटेलिजेंस एजेंट बने, जो आतंकियों से लड़ते हुए सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर करता है। वहीं उनकी अपकमिंग फिल्म ‘Jana Nayagan’ को लेकर कहा जा रहा है कि इसमें विजय एक आदर्शवादी पूर्व पुलिस अफसर के रोल में होंगे, जो भ्रष्ट और तानाशाही ताकतों से जनता को बचाने के लिए लड़ता है। फिल्म रिलीज से पहले ही राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बन चुकी है।
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