
'दृश्यम 3' साल की सबसे चर्चित मलयालम फिल्मों में शामिल है और फैंस को इससे बड़े लेवल की उम्मीदें थीं। पहले दो पार्ट्स ने जिस तरह सस्पेंस, थ्रिल और चौंकाने वाले क्लाइमैक्स से दर्शकों को बांधे रखा था, तीसरे पार्ट से भी वैसी ही उम्मीद की जा रही थी। हालांकि फिल्म इस बार वैसा असर छोड़ने में पूरी तरह सफल नहीं दिख रही। फिल्म की कहानी काफी हद तक पुराने फॉर्मूले पर चलती नजर आती है और क्लाइमैक्स भी अपेक्षित शॉक वैल्यू नहीं दे पाता। यह फिल्म पूरी तरह मोहनलाल के कंधों पर सवार है।
'दृश्यम 3' एक बार फिर उसी दुनिया और किरदारों को आगे बढ़ाती है, जिन्हें दर्शक पहले दो फिल्मों में देख चुके हैं। यह कहानी फिल्म के दूसरे पार्ट की एंडिंग के साढ़े चार बाद सेट है, जहां एक बार फिर केस री-ओपन होता है और जॉर्ज कुट्टी के सामने अपने परिवार को बचाने की चुनौती है। फिल्म की टैगलाइन है, 'साल गुजर गए. अतीत नहीं गुजरा।' हालांकि, जिस तरह दूसरे पार्ट को नयेपन के साथ पेश किया गया था, तीसरा पार्ट में उसकी कमी महसूस होती है।
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मोहनलाल ने एक बार फिर अपने किरदार को ईमानदारी से निभाने की कोशिश की है और उनकी स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म की बड़ी ताकत मानी जा रही है। बाकी कलाकारों ने भी अपने हिस्से का काम ठीक तरीके से किया है। हालांकि, इस बार स्क्रिप्ट कलाकारों को ज्यादा नया या चुनौतीपूर्ण करने का मौका नहीं देती। यही वजह है कि मजबूत एक्टिंग के बावजूद किरदार पहले जैसी गहरी छाप छोड़ने में थोड़े कमजोर महसूस होते हैं।
बतौर डायरेक्टर जीतू जोसेफ अपनी फिल्मों के शानदार ट्विस्ट और क्लाइमैक्स के लिए जाने जाते हैं। लेकिन इस बार उनका वही जादू पूरी तरह दिखाई नहीं देता। फिल्म की जांच-पड़ताल, सस्पेंस और इमोशनल बीट्स काफी हद तक पुराने पार्ट्स जैसे लगते हैं। फिल्म फ्रेंचाइजी को नए स्तर पर ले जाने के बजाय नॉस्टैल्जिया और पुराने फॉर्मूले पर ज्यादा निर्भर करती है। यही वजह है कि कहानी कई जगह प्रेडिक्टेबल महसूस होती है।फिल्म का पहला हाफ काफी धीमा है और लंबे समय तक कहानी खास आगे बढ़ती नजर नहीं आती। हालांकि इंटरवल ब्लॉक कुछ हद तक उत्सुकता पैदा करता है। दूसरे हाफ में रहस्य खुलना शुरू होता है, लेकिन पूरी कहानी कभी भी उस स्तर का थ्रिल नहीं बना पाती, जिसके लिए ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी जानी जाती है।
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'दृश्यम 3' तकनीकी रूप से अच्छी बनी फिल्म मानी जा रही है। बैकग्राउंड स्कोर कई सीन्स में तनाव बनाने की कोशिश करता है और सिनेमैटोग्राफी भी फिल्म के गंभीर माहौल को सपोर्ट करती है। हालांकि म्यूजिक और बैकग्राउंड स्कोर वैसा यादगार असर नहीं छोड़ते, जैसा पहले दो फिल्मों में देखने को मिला था। कुल मिलाकर तकनीकी स्तर पर फिल्म मजबूत है, लेकिन कंटेंट उस स्तर का असर नहीं बना पाता।
अगर आप'दृश्यम' फ्रेंचाइजी के बड़े फैन हैं और मोहनलाल को फिर उसी किरदार में देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म आपको कुछ हिस्सों में पसंद आ सकती है। लेकिन अगर आप पहले दो पार्ट्स जैसी चौंकाने वाली कहानी और दमदार क्लाइमैक्स की उम्मीद लेकर जा रहे हैं, तो थोड़ा निराशा हाथ लग सकती है। फिल्म कई जगह रिपीटेटिव और प्रेडिक्टेबल महसूस होती है। हमारी ओर से इसे 5 में से 2.5 स्टार।
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