Peddi: जान्हवी कपूर के बोल्ड सीन से हिली इंडस्ट्री, बॉलीवुड से साउथ तक हीरोइनों ने खोली पोल!

Published : Jun 08, 2026, 01:23 PM IST
peddi janhvi kapoor controversy

सार

पेद्दी विवाद या साउथ-बॉलीवुड टकराव? क्या जान्हवी कपूर को लेकर छिड़ा मामला इंडस्ट्री की सच्चाई खोल रहा है? क्यों एक्ट्रेसेस सिस्टम पर सवाल उठा रही हैं? क्या महिला किरदारों के ऑब्जेक्टिफिकेशन पर लगे आरोप सही हैं? क्या अनु अग्रवाल, नित्या मेनन और डिंपल हयाती के बयान इंडस्ट्री में बड़ा बदलाव लाएंगे? कौन है असली जिम्मेदार—एक्टर या सिस्टम?

राम चरण की हालिया रिलीज फिल्म 'पेद्दी' में जान्हवी कपूर के एंट्री और रोमांटिक सीन्स पर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं रहा है। भले ही फिल्म के डायरेक्टर बुच्ची बाबू सना ने इस सीन्स को लेकर माफ़ी मांग ली हो और इन्हें ट्रिम भी करा दिया हो, लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में अब भी उनकी आलोचनाओं का दौर जारी है। पूरे मामले में जान्हवी कपूर को खुला सपोर्ट मिल रहा है और फिल्ममेकर्स के खिलाफ गुस्सा फूट रहा है। साउथ सिनेमा से लेकर बॉलीवुड तक एक्ट्रेसेस खुलकर इंडियन फिल्म इंडस्ट्री की पोल खोल रही हैं और बता रही हैं कि कैसे यहां हीरोइनों को वस्तु की तरह इस्तेमाल कर उनके शरीर को दिखाने की होड़ मची रहती है। नज़र डालिए ऐसी ही चार एक्ट्रेसेस के बयानों पर...

अनु अग्रवाल बोलीं- दर्शक, फिल्ममेकर्स के साथ कलाकार भी जिम्मेदार

आशिकी जैसी फिल्मों में नज़र आईं अनु अग्रवाल ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक मैगजीन के लिए अपने शूट की झलक शेयर की और लिखा, "मैं इस इंडस्ट्री में पूरी तरह से एक मिसफिट हूं। जो फैसले मुझे तब मिसफिट बनाते थे, वही आज मुझे अपने साथ सहज रहने की वजह देते हैं।" जान्हवी कपूर विवाद पर रिएक्ट करते हुए अनु अग्रवाल ने लिखा, "‘पेद्दी’ को लेकर हाल ही में हो रही चर्चाओं ने मुझे मेरे पुराने एक फैसले की याद दिला दी। मैं आज के दर्शकों की सराहना करती हूं कि वे आगे आकर महिलाओं के चित्रण में अधिक सम्मान की मांग कर रहे हैं। लेकिन जिम्मेदारी सिर्फ दर्शकों की नहीं है और न ही केवल फिल्म निर्माताओं की। इसकी जिम्मेदारी हम कलाकारों की भी है।”

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अनु अग्रवाल ने आगे लिखा “‘आशिकी’ के बाद, 30 साल से ज्यादा पहले मैंने फिल्म साइन करने से पहले कहानी सुनना जरूरी बना लिया था। उस समय महिलाओं का वस्तुकरण (objectification) सामान्य बात थी। मैंने उस प्रवृत्ति के खिलाफ काम करने का निर्णय लिया। जिन फिल्मों में मैंने काम किया, वे मेरे उस फैसले की गवाही देती हैं। कई मायनों में यही वजह रही कि मैंने अंततः फिल्मों से दूरी बना ली। आज मैं युवा कलाकारों से कहती हूं कि वे पहले कहानी सुनें, सवाल पूछें, और अगर कोई चीज मानवीय गरिमा के खिलाफ हो तो उसे करने से मना करने का साहस रखें। कहानियां तब बदलेंगी जब दर्शक बेहतर की मांग करेंगे, लेकिन वे तब भी बदलेंगी जब कलाकार उन चीजों का हिस्सा बनने से इनकार करेंगे जिन पर उन्हें विश्वास नहीं है।”

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कलाकारों को अपने लिए सीमाएं तय करनी चाहिए : नित्या मेनन

अक्षय कुमार के साथ 'मिशन मंगल' जैसी बॉलीवुड और विजय देवरकोंडा के साथ 'गीता गोविंदम' तेलुगु फिल्म कर चुकीं साउथ इंडियन एक्ट्रेस नित्या मेनन का कहना है कि उन्होंने अभी तक 'पेद्दी' नहीं देखी है, लेकिन वे जान्हवी कपूर विवाद को लेकर चल रही बहस से सहमत हैं। उन्होंने वैरायटी से बातचीत में कहा, " मुझे लगता है कि कलाकारों को अपने लिए बेहतर सीमाएं तय करनी चाहिए। जो कलाकार किसी सीन को परफॉर्म कर रहा है, उसे इतना अधिकार होना चाहिए कि वह अपनी बात रख सके और साफ कह सके कि वह किसी भी तरह के ऑब्जेक्टिफिकेशन से सहज नहीं है।”

डिंपल हयाती ने उठाए सिस्टम सवाल

'अतरंगी रे' जैसी हिंदी फिल्मों में काम कर चुकीं साउथ इंडियन एक्ट्रेस डिंपल हयाती ने रविवार को सोशल मीडिया पर लिखा, “आज मुझे यह देखकर बहुत अच्छा लग रहा है कि आज हम सभी इस बात पर खुलकर चर्चा कर रहे हैं कि फिल्मों में एक्ट्रेसेस के किरदार कैसे लिखे जाते हैं। आमतौर पर पहला रिएक्शन यह होता है कि जो किरदार दिया गया, उसे निभाने वाली एक्ट्रेस को ही दोष दे दिया जाता है, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। जिम्मेदारी उन लोगों की है जो यह मानते हैं कि ऐसा कंटेंट ही बिकता है। एक्टर-एक्ट्रेसेस उन्हीं मौकों के भीतर काम करते हैं जो उन्हें मिलते हैं, ताकि वे बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बन सकें और ज्यादा दर्शकों तक पहुंच बना सकें। अगर किसी किरदार को ठीक से नहीं लिखा गया है, तो इसकी जिम्मेदारी लेखन और फिल्ममेकिंग के फैसलों पर जाती है, न कि उस महिला कलाकार पर जो उसे निभा रही है।”

 

 

डिंपल आगे लिखती हैं, “ दुर्भाग्य से, हमें अक्सर एक तय छवि में बांध दिया जाता है और किरदारों को उसी नजर से देखा जाता है, जबकि पुरुष-केंद्रित कहानियों में किरदारों को ज्यादा खुलकर दिखाने की आज़ादी मिलती है। असल में हम वही देखते हैं, जो हमें दिखाया जाता है और उसी पर विश्वास कर लेते हैं। फिल्ममेकिंग किसी एक व्यक्ति के नियंत्रण में नहीं होती, लेकिन हम सभी मिलकर इस बात पर सहमत हो सकते हैं कि हमें बेहतर कहानियों और बेहतर सिनेमाई अनुभवों का हक है।”

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डिंपल हयाती को जब उनके बयान के लिए ट्रोल किया गया तो उन्होंने करारा जवाब देते हुए X पर लिखा, "मेरा मानना ​​है कि किसी महिला का अपनी आवाज़ उठाना कोई बड़ी खबर या हेडलाइन नहीं, बल्कि एक आम बात होनी चाहिए।" उन्होंने आगे लिखा, "दोस्तों, शांत हो जाइए और अपनी ज़िंदगी पर ध्यान दीजिए... मेरी अपनी ज़िंदगी है; ज़रूरी नहीं कि मेरी राय या मेरे अनुभव आपसे मेल खाएं या मैं आप में से हर एक को जवाब दूं। अपनी ज़िंदगी जीओ।"

 

 

 

अशिका रंगनाथ ने दिया इंडस्ट्री के सिस्टम को दोष

साउथ इंडियन एक्ट्रेस अशिका रंगनाथ ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर स्पष्ट किया कि महिलाओं कलाकारों को दोष नहीं दिया जाना चाहिए, बल्कि उस व्यवस्था और फिल्म निर्माताओं से सवाल पूछने चाहिए जो ऐसे कंटेंट को सफल मानते हैं। उन्होंने कहा कि एक्टर-एक्ट्रेस अक्सर उन्हीं अवसरों के भीतर काम करते हैं जो उन्हें मिलते हैं, ताकि वे बड़े प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बन सकें और व्यापक दर्शकों तक पहुँच बना सकें। अगर महिला किरदार कमजोर या अधूरे ढंग से लिखे जाते हैं, तो उसकी जिम्मेदारी लेखन और फिल्म निर्माण से जुड़े फैसलों की होती है, न कि उन अभिनेत्रियों की जो उन भूमिकाओं को निभाती हैं।

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