Vijay Sangeetha Divorce: क्या संगीता को मिलेगी 600 करोड़ की आधी प्रॉपर्टी? जानें क्या कहता है कानून?

Published : Mar 02, 2026, 08:08 PM IST

एक्टर विजय की पत्नी संगीता ने कथित एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर के आधार पर तलाक की अर्जी दी है। इस मामले में क्या संगीता को विजय की 600 करोड़ की संपत्ति में 50% हिस्सा मिलेगा? भारतीय कानून इस बारे में क्या कहता है, आइए जानते हैं।

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विजय और संगीता के मामले में, संगीता ने इमोशनल, मेंटल और फिजिकल तौर पर नजरअंदाज करने और एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर का आरोप लगाया है। कोर्ट 27 साल की शादी, दो बच्चों और विजय की फिल्मों-राजनीति से हुई कमाई को ध्यान में रखेगा।
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साउथ सुपरस्टार थलपति विजय से तलाक के लिए संगीता ने तमिलनाडु की चेंगलपट्टू फैमिली कोर्ट में अर्जी दी है। उन्होंने विजय पर एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर का आरोप लगाया है और उनकी इनकम व सोशल स्टेटस के आधार पर गुजारा भत्ता मांगा है। हालांकि, भारतीय कानून के तहत 600 करोड़ की संपत्ति का 50% हिस्सा देना अनिवार्य नहीं है।
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सोशल मीडिया पर यह सवाल खूब चर्चा में है कि अगर फैसला संगीता के पक्ष में आता है, तो क्या विजय को अपनी 50% संपत्ति देनी होगी? हाल में श्रीधर वेम्बू और प्रमीला श्रीनिवासन का तलाक सबसे महंगा माना गया, जिसमें 15,000 करोड़ की संपत्ति शामिल थी। इसी तरह, 2014 में ऋतिक रोशन और सुजैन खान के तलाक में करीब 380 करोड़ की संपत्ति का मामला सामने आया था। इसी को देखते हुए विजय की 600 करोड़ की संपत्ति में संगीता के 50% हिस्से पर बहस छिड़ गई है।
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भारतीय कानून तलाक के बाद पत्नी को पति की संपत्ति का 50% हिस्सा देने का आदेश नहीं देता। '50-50 संपत्ति बंटवारे' का मॉडल कुछ पश्चिमी देशों में आम है, लेकिन भारत में कानून अलग हैं। यहां 'कम्युनिटी प्रॉपर्टी' का कॉन्सेप्ट नहीं है, यानी शादी के दौरान हासिल की गई ज्यादातर संपत्ति को बराबर नहीं बांटा जा सकता। शादी से पहले या निजी नाम पर खरीदी गई संपत्ति आमतौर पर उसी व्यक्ति के पास रहती है।
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भारतीय अदालतों का मुख्य फोकस न्याय और हालातों पर होता है। कोर्ट दोनों पक्षों की इनकम, घर में उनके योगदान, बच्चों की जरूरतों और शादी के दौरान के लाइफस्टाइल जैसी चीजों को देखता है और उसी के हिसाब से फैसला करता है। गुजारा भत्ता (Maintenance) संपत्ति के बंटवारे से अलग है। यह ज्यादा कमाने वाले पार्टनर की तरफ से दूसरे पार्टनर को दी जाने वाली आर्थिक मदद है, ताकि उसकी फाइनेंशियल सिक्योरिटी बनी रहे।
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हिंदू मैरिज एक्ट (या स्पेशल मैरिज एक्ट) की धारा 25 के तहत, कोर्ट को स्थायी गुजारा भत्ते के रूप में एक 'उचित' रकम देने का अधिकार है। कुछ मामलों में, कोर्ट ने पति की मासिक आय का 25% तक गुजारा भत्ता दिया है, लेकिन कोई तय फॉर्मूला नहीं है। हर मामले को उसकी अपनी योग्यता के आधार पर आंका जाता है। भारत में ऐसा कोई बड़ा उदाहरण भी नहीं है, जहां कोर्ट ने पति को अपनी कुल संपत्ति का 50% भुगतान करने का आदेश दिया हो।

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