
'पवित्र रिश्ता' में सास के किरदार से घर-घर पहचान बनाने वाली ऊषा नाडकर्णी 80 साल की उम्र में भी काम कर रही हैं और पूरी तरह आत्मनिर्भर जिंदगी जी रही हैं। हाल ही में रियलिटी शो 'तुम हो ना घर की सुपर' में उन्होंने अपने संघर्ष, अकेले रहने की आदत और एक्टिंग के प्रति जुनून पर खुलकर बात की। एक्ट्रेस ने बताया कि उन्होंने चौथी कक्षा में पहली बार एक्टिंग की थी और तब से आज तक लगातार काम कर रही हैं। दिलचस्प बात यह है कि शुरुआती दिनों में उनकी मां एक्टिंग के खिलाफ थीं, लेकिन ऊषा ने समाज और लोगों की बातों की परवाह किए बिना अपने सपनों को चुना। आज उनका आत्मविश्वास लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है।
'पवित्र रिश्ता' जैसे शोज में नज़र आ चुकीं ऊषा नाडकर्णी ने बताया कि उनका एक्टिंग करियर बेहद कम उम्र में शुरू हो गया था। उन्होंने कहा, "मैं चौथी क्लास में थी, तभी एक्टिंग की थी। आज मेरी उम्र 80 चल रही है, मैं अभी भी काम कर रही हूं।" छह दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने फिल्म, टीवी, थिएटर और रियलिटी शोज़ में अपनी अलग पहचान बनाई है। एक्ट्रेस ने बताया कि बचपन से ही उन्हें एक्टिंग का शौक था, लेकिन उनकी मां इस क्षेत्र में जाने के पक्ष में नहीं थीं। उन्होंने कहा, "एक्टिंग मेरा काम है। बचपन से ही मुझे एक्टिंग की बहुत चाहत थी। मां को पसंद नहीं था। मां टीचर थीं, इसलिए उन्हें यह सब अच्छा नहीं लगता था। उनके हिसाब से वह सही थीं, क्योंकि हम मिडिल क्लास परिवार से थे और आसपास के लोग तरह-तरह की बातें करते थे।"
समाज की सोच पर बात करते हुए ऊषा नाडकर्णी ने बेबाक अंदाज में कहा, "मेरा तो कहना है भाड़ में गए लोग। अपने को जो करना है, वो करना है। वहां जाकर हम कुछ गलत नहीं करते। ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए जिससे मां-बाप का नाम खराब हो।" उनके मुताबिक़, उन्होंने हमेशा अपने फैसले खुद लिए और आलोचनाओं को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।
ऊषा नाडकर्णी का अनुशासन आज भी युवाओं को प्रेरित कर सकता है। उनके मुताबिक़, वे अकेली रहती हैं और अपने काम खुद करती हैं। उन्होंने बताया, "शूटिंग होती है तो मैं सुबह पांच बजे उठती हूं। अपना टिफिन मैं खुद बनाती हूं। घर से सब्जी, रोटी, चावल, दाल और छाछ लेकर जाती हूं।" उनका कहना है कि काम की आदत ऐसी पड़ गई है कि अब जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा घर और काम के बीच ही गुजरता है।" एक्ट्रेस ने स्वीकार किया कि एक समय ऐसा था जब उन्हें अकेले रहने से डर लगता था। उन्होंने कहा, "पहले मैं डरती थी। ऊपर जाते समय वॉचमैन को साथ लेकर जाती थी। दरवाजा खोलने तक उसे खड़ा रहने को कहती थी। दरवाजा खोलते समय पीछे मुड़-मुड़कर देखती थी, जैसे कोई भूत मुझे पकड़ने वाला हो। लेकिन अब आदत हो गई है। अब वॉचमैन को नहीं बुलाती।"
इंडस्ट्री में संघर्ष को लेकर ऊषा नाडकर्णी ने कहा, "इंडस्ट्री में तुम्हारा काम अच्छा होगा तभी काम मिलेगा। वो भी गारंटी नहीं है। और मुझे भीख मांगने की आदत नहीं है।" जब उनसे पूछा गया कि जिंदगी में उनके लिए कौन खड़ा रहता है, तो उनका जवाब पूरे इंटरव्यू की सबसे ताकतवर लाइन बन गया। उन्होंने कहा, "ऊषा के लिए खड़े होने की जरूरत नहीं है। ऊषा, ऊषा के लिए खड़ी है।" इससे पहले पिंकविला को दिए एक इंटरव्यू में ऊषा ने कहा था कि उनका बेटा भी उन्हें मां नहीं मानता, क्योंकि उसका पालन-पोषण उसकी नानी ने किया है।
ऊषा नाडकर्णी ने अपने लंबे करियर में कई यादगार प्रोजेक्ट्स में काम किया है। वह 'जिस देश में गंगा रहता है', 'रुस्तम', 'भूतनाथ रिटर्न्स', 'ग्रेट ग्रैंड मस्ती' और चर्चित मराठी फिल्म 'देऊल' का हिस्सा रही हैं। टीवी दर्शकों के बीच उन्हें सबसे ज्यादा लोकप्रियता 'पवित्र रिश्ता' में अंकिता लोखंडे की ऑनस्क्रीन सास और दिवंगत एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की ऑनस्क्रीन मां के किरदार से मिली।
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