राज ठाकरे ने विवेक ओबेरॉय और आर. माधवन पर निशाना साधा और पूछा कि अगर भारत इतना बदल गया है तो वे परिवार समेत दुबई में क्यों रह रहे हैं? उनका बयान चर्चा में है।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने एक बार फिर अपने बेबाक अंदाज से सुर्खियां बटोरी हैं। महाराष्ट्र नवनिर्माण विद्यार्थी सेना (एमएनवीएस) के 20वें स्थापना दिवस कार्यक्रम में उन्होंने एक्टर विवेक ओबेरॉय और आर. माधवन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश में हुए विकास की इतनी तारीफ करते हैं तो अपने परिवार के साथ दुबई में क्यों रहते हैं। अपने भाषण में राज ठाकरे ने विदेश पलायन, शिक्षा, रोजगार, युवाओं की समस्याओं और नीट परीक्षा विवाद जैसे कई मुद्दों पर भी सरकार को घेरा।

राज ठाकरे ने विवेक ओबेरॉय और आर. माधवन पर क्या कहा?

सभा को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने कहा, "विवेक ओबेरॉय, जिन्होंने नरेंद्र मोदी के जीवन पर बनी फिल्म में उनका किरदार निभाया था, अब दुबई में रहते हैं। आर. माधवन, जो लगातार मोदी की तारीफ करते हैं और कहते हैं कि देश बदल गया है, वे भी दुबई में बस गए हैं। अगर आपको भारत से इतना प्यार है और आप मानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने देश बदल दिया है, तो फिर आप विदेश में क्यों रह रहे हैं? अपने परिवार के साथ दुबई में क्यों रह रहे हैं?" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऐसे लोग भारत में सिर्फ सरकार समर्थित फिल्मों में काम करने आते हैं और फिर वापस विदेश लौट जाते हैं।

भारतीयों के विदेश पलायन पर राज ठाकरे ने क्या दावा किया?

राज ठाकरे ने दावा किया कि संसद में पेश आंकड़ों के मुताबिक भारतीय परिवारों का विदेश में पढ़ाई पर खर्च तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा, "आज हमारे बच्चे विदेश जाकर पढ़ाई कर रहे हैं और इस पर करीब 5.85 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। यह पैसा देश से बाहर जा रहा है।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हजारों उद्योगपति भी भारत छोड़कर विदेशों में बस चुके हैं।

युवाओं के NEET पेपर लीक जैसे मुद्दों पर क्या बोले राज ठाकरे?

राज ठाकरे ने कहा कि देशभर में नीट परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर हुए प्रदर्शन केवल परीक्षा तक सीमित नहीं हैं। उनके मुताबिक, "ये प्रदर्शन सिर्फ नीट का मुद्दा नहीं हैं। इसके पीछे युवाओं में बेरोजगारी, बुनियादी सुविधाओं की कमी, निजीकरण और शिक्षा के सीमित अवसरों को लेकर बढ़ती नाराजगी भी है।" उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से समझने की जरूरत है।

शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर क्या आरोप लगाए?

राज ठाकरे ने शिक्षा बजट और सरकारी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका दावा था कि 2004 में शिक्षा पर सरकारी खर्च 3.2% था, जो 2026 में घटकर 2.8% रह गया है। उन्होंने कहा कि आज भी कई स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं, बुनियादी सुविधाओं की कमी है और शिक्षा व्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है।