जिसके पति की हत्या का लगा है आरोप, उसी की बीवी के खिलाफ दानापुर से चुनाव लड़ रहा रीतलाल

Published : Nov 02, 2020, 04:48 PM ISTUpdated : Nov 09, 2020, 12:26 PM IST

पटना (Bihar ) । बिहार में रीतलाल (Reetlal) का नाम बाहुबलियों में लिया जाता है, जो डेढ़ माह पहले ही जमानत पर जेल से बाहर आया है और उसके ऊपर इस समय भी हत्या, हत्या की कोशिश और रंगदारी जैसे 14 केस चल रहे हैं। इतना ही नहीं पांच साल में उसकी संपत्ति 1.24 करोड़ से बढ़कर 12.03 करोड़ हो गई है। मतलब 10.79 लाख रुपए बढ़ गए, जबकि 2010 से जेल में बंद था। वो इस बार दानापुर विधानसभा सीट (Danapur Assembly Seat) से तीन बार विधायक बन चुकी बीजेपी प्रत्याशी आशा देवी (BJP candidate Asha Devi) के खिलाफ आरजेडी से चुनाव लड़ रहा है। बता दें कि यह वही आशा देवी हैं, जिनके पति सत्य नारायण सिंह (Satya Narayan Singh) की हत्या का आरोप रीतलाल पर ही लगा है।   

PREV
17
जिसके पति की हत्या का लगा है आरोप, उसी की बीवी के खिलाफ दानापुर से चुनाव लड़ रहा रीतलाल

दानापुर विधानसभा क्षेत्र से हैट्रिक लगाकर आशा देवी ने वहां भाजपा का गढ़ बना दिया है। इस बार उन्होंने 1.58 करोड़ रुपए की संपत्ति बताई है। आशा देवी और रीतलाल की भिड़ंत 2010 में भी हो चुकी है। उस समय रीतलाल ने निर्दलीय ताल ठोकी थी और हार का सामना करना पड़ा था। इस बार रीतलाल ने लालटेन थामा है। मुकाबले में 17 और प्रत्याशी हैं, पर टक्कर आमने-सामने की है। 

27

रीतलाल पटना के कोठवां गांव के रहने वाले हैं। 90 के दशक में पटना से लेकर दानापुर तक उनका वर्चस्व था। बताते हैं कि रेलवे के दानापुर डिवीजन से निकलने वाले हर टेंडर पर उनका कब्जा रहता था। कहा तो यह भी जाता है कि उनके खिलाफ जाने की कोशिश करने वाला जान की कीमत चुकाता था।

(फाइल फोटो)

37

रीतलाल पहले अपने गांव के मुखिया हुआ करते थे। बताते हैं कि 30 अप्रैल 2003 को जब आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने तेल पिलावल-लाठी घुमावल रैली कर रहे थे, इसी दौरान रीतलाल ने खगौल के जमालुद्दीन चक के पास दिनदहाड़े भाजपा नेता सत्यनारायण सिंह को उनकी ही गाड़ी में गोलियों से भून दिया था, जिनके पत्नी आशा देवी के खिलाफ इस बार चुनाव भी लड़ रहा है।

47

भाजपा नेता की हत्या के बाद रीतलाल तब और सुर्खियों में आ गया जब चलती ट्रेन में बख्यिारपुर के पास दो रेलवे ठेकेदारों की हत्या का आरोप लगा। इसके बाद रीतलाल ने अपने विरोधी नेऊरा निवासी चून्नू सिंह की हत्या छठ पर्व के समय घाट पर उस समय कर दी थी जब वो घाट बना रहे थे।

57

चुन्नू को पुलिस का मुखबिर बताया गया था, जिसके बाद पुलिस और एसटीएफ उसके पीछे पड़ गई। लेकिन, रीतलाल तक कभी नहीं पहुंच सकी। हालांकि साल 2010 में खुद आत्म समर्पण कर दिया और निर्दलीय चुनाव लड़ा। वह बीजेपी प्रत्याशी से हार गया। बाद में जेल से ही एमलसी बन गया था। साल 2012 में रीतलाल पर मनी लॉन्ड्र्रिंग का केस भी दर्ज किया गया था।

67

भाजपा नेता की हत्या के बाद वो डॉन के नाम से जाना जाने लगा। इस घटना के बाद उसके गुर्गों ने एकबार फिर शिक्षण संस्थान के मालिक से एक करोड़ रुपए रंगदारी की मांग की थी। बता दें कि ये रंगदारी तब मांगी गई थी, जब वह पटना के बेऊर में जेल में बंद था।
 

77

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में लालू प्रसाद यादव की बेटी मीसा भारती पाटलिपुत्र सीट से लड़ रही थीं। भाजपा ने उनके खिलाफ लालू के ही पुराने साथी राम कृपाल यादव को उतारा था। देश भर में जिन सीटों की चर्चा थी उनमें ये सीट भी थी। रीतलाल भी यहां से लड़ने की तैयारी में थे। ऐसे में मीसा की मुश्किले बढ़ गई थी। कहते हैं कि लालू ने रीतलाल से मदद मांगी थी। उन्हें राजद का महासचिव भी बना दिया गया था। हालांकि, उसके बाद भी मीसा यहां से जीत नहीं सकीं थीं। साल 2016 में रीतलाल विधान परिषद से निर्दलीय पर्चा भर दिया और वो जीत भी गए। उस समय जेल में था और इसी साल अप्रैल में जमानत पर रिहा किया गया है।

बिहार की राजनीति, सरकारी योजनाएं, रेलवे अपडेट्स, शिक्षा-रोजगार अवसर और सामाजिक मुद्दों की ताज़ा खबरें पाएं। पटना, गया, भागलपुर सहित हर जिले की रिपोर्ट्स के लिए Bihar News in Hindi सेक्शन देखें — तेज़ और सटीक खबरें Asianet News Hindi पर।

Recommended Stories