13 साल में सीखा साइकिल चलाना,15वें साल किया ऐसा काम, बन गई बिहार की ये बेटी साइकिल गर्ल

Published : Oct 19, 2020, 04:23 PM ISTUpdated : Jan 25, 2021, 10:31 AM IST

दरभंगा (Bihar) । बिहार के लाल की अगर बात होगी तो एक बेटी का नाम जरूर लिया जाएगा। वो नाम 15 साल की साइकिल गर्ल ज्योति पासवान का है, जो लॉकडाउन में अपने बीमार पिता को 1200 किलोमीटर साइकिल पर बैठाकर गुरूग्राम से दरभंगा लेकर आई थी। इसके बाद वो दुनियाभर में पहचान बना ली। यहां तक की अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ने भी बिहार के इस बेटी के साहस और इच्‍छाशक्ति की तारीफ की थी। सरकार और कई संगठनों ने ज्‍योति को सम्‍मानित किया। साथ ही उनकी पढ़ाई-लिखाई का जिम्‍मा भी लिया है। बता दें कि ज्योति बताती है कि वो 13वें साल में साइकिल चलाना सीखी थी।  

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13 साल में सीखा साइकिल चलाना,15वें साल किया ऐसा काम, बन गई बिहार की ये बेटी साइकिल गर्ल

सिंघवारा ब्लाक के सिरहुल्ली गांव निवासी मोहन पासवान गुरुग्राम में ई-रिक्शा चलाते थे। ई रिक्‍शा उनका खुद का नहीं बल्कि किराए पर था और वहां झोपड़ी में रहते थे। लॉकडाउन से कुछ महीने पहले उनका  एक्सिडेंट हो गया था। जिससे उनकी तबीयत खराब रहने लगी थी। इसी दौरान कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन कर दिया गया था। इससे उनका काम ठप हो गया था और खाने के लाले पड़ने लगे।

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बेटी ज्‍योति पासवान से पिता की ये मजबूरी देखी नहीं जा रही थी। उसने बीमार पिता को साइकिल पर बैठाकर 7 दिनों तक 1200 किमी की यात्रा तय कर उन्हें अपने गांव सिरहुल्ली लेकर लाई। जिसके बाद वो मीडिया के माध्यम से भारत ही नहीं अमेरिका तक अपनी पहचान बना ली। 

(उस समय का ट्टीट)

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बता दें कि ज्योति की ही बदौलत झोपड़ी में रहने वाला मोहन पासवान का परिवार अब तीन मंजिला मकान में रहता है। इसमें चार कमरे हैं, जो तीन महीने में ही बनकर तैयार हुआ है। हालांकि अभी इस पर रंग-रोगन नहीं हुआ है। इतना ही नहीं अब ज्योति के पास खुद की आठ साइकिलें हैं, जो एक से बढ़कर एक हैं।

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बताते हैं कि ज्योति ने अपनी बुआ की शादी का खर्च भी उठाया है। अब ज्योति की जिंदगी बिल्कुल अलग हो गई है। आज वो दुबली-पतली लड़की एक सेलिब्रिटी सी बन गई है। लोग उन्हें 'साइकिल गर्ल' कहते हैं। यहां तक की उसके संघर्ष पर आधारित फिल्म बन रही है, जिसमें वह खुद लीड रोल कर रही है।

(फाइल फोटो)

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ज्‍योति बताती है कि, रास्‍ते में कई ट्रक वाले थे, जो लोगों को ले जा रहे थे, हमने जब मदद मांगी तो उन्‍होंने 6000 रुपए की मांग किए थे।  लेकिन, हमारे पास इतने पैसे नहीं थे। इसलिए हम साइकिल से ही 10 मई को गुरूग्राम से चल पड़े थे और 16 मई की शाम घर आ गए थे।

(फाइल फोटो)

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ज्‍योति के पिता मोहन पासवान ने बताते हैं कि आज बेटी की वजह से उन्हें सब लोग जानने लगे। हम इतनी गरीबी में जी रहे थे, मगर बेटी की वजह से लोग हमारी मदद के लिए आगे आए। बेटी अभी बोर्ड की परीक्षा देगी। उसे और आगे पढ़ाऊंगा। 

(फाइल फोटो)

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