सालों 5 KM पैदल चल पढ़ने जाता था ये शख्स, इजरायल में PM मोदी से मुलाकात हुई तब चर्चा में आए विजय

Published : Sep 27, 2020, 03:34 PM ISTUpdated : Sep 27, 2020, 03:53 PM IST

पटना (Bihar) । बिहार में गरीबी से संघर्ष के बाद मंजिल पाने और देश का नाम रोशन करने वालों की संख्या बहुत ज्यादा है। इनमें सिरसिया बाजार गांव के डॉ. विजय कुमार (Dr.Vijay Kumar) का भी विशेष स्थान हैं, जो गरीबी से लड़ते हुए इजरायल (Israel)की विश्व प्रसिद्ध विज्ञान संस्था तक पहुंचे। जिन्हें वहां सर्वोत्तम स्नातक अवार्ड तक मिला और पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने भी उनसे लंबी बातचीत की थी। बिहार के इस लाल ने पूरे आठ साल तक रोजाना पैदल पांच किमी चलकर पढ़ाई करने के बाद यह मंजिल हासिल की है। वो अब इजरायल में पीएचडी के बाद वहीं बतौर रिसर्च एसोसिएट की नौकरी कर रहे हैं। अब तक उनके 52 से ज्यादा रिसर्च पेपर प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में छप चुके हैं।

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सालों 5 KM पैदल चल पढ़ने जाता था ये शख्स, इजरायल में PM मोदी से मुलाकात हुई तब चर्चा में आए विजय

विजय ने शुरूआती पढ़ाई सिरसिया बाजार गांव से पांच किमी दूर सरकारी स्कूल में की थी। वे बताते हैं, गरीबी प्रतिदिन परीक्षा लेती थी, क्योंकि वे आठ साल तक लगातार पैदल स्कूल जाते थे। आज भी उनका परिवार सिरसिया बाजार में रहता है। हालांकि टूटा-फूटा खपरैल मकान की जगह अब पक्के मकान ने ले ली है।(फाइल फोटो)

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विजय के अलावा परिवार में कोई सदस्य ग्रेजुएट नहीं है। पिता मैट्रिक तो भाई सिर्फ इंटर पास हैं। ऐसे परिवेश में उन्होंने बीडी ईवनिंग कॉलेज, पटना से इंटर के बाद बिहार विवि के देवचंद कॉलेज, हाजीपुर से 2008 में बीएससी की डिग्री ली थी। उसी साल तेजपुर विश्वविद्यालय में मास्टर ऑफ साइंस में अध्ययन के लिए प्रवेश परीक्षा दी थी और टॉपर बने थे।
(फाइल फोटो)

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एमएससी के बाद हैदराबाद विवि से नैनोटेक्नोलॉजी में मास्टर ऑफ इंजीनियरिंग (2010-12) की। पीएचडी के लिए इजरायल की यूनिवर्सिटी से प्रस्ताव मिला और वहां चले गए।
 (फाइल फोटो)

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करीब तीन साल पहले जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल दौरे पर गए थे तो वहां उनसे मिलने वालों में विजय भी शामिल थे। परिवार के लोग बताते हैं कि प्रधानमंत्री से विजय की कई विषयों पर बात हुई थी। इसमें भारत में रिसर्च एंड डेवलपमेंट भी शामिल था।
 (फाइल फोटो)

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विजय का सपना एक सफल वैज्ञानिक के रूप में भारत लौटने का है। वह अनुसंधान और शिक्षा में देश की सेवा करने की चाह भी रखते हैं।  (फाइल फोटो)

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