कोरोना से पिता की मौत, बेटे ने शव लेने से इंकार किया..मुस्लिम ने युवक बेटा बन किया अंतिम संस्कार

Published : Apr 11, 2021, 01:45 PM IST

दरभंगा (बिहार). देश में कोरोना संक्रमण एक बार फिर डराने लगा है, जहां लोग ना चाहकर भी अपनों से दूर होते जा रहे हैं। वायरस के खतरे से वह अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं। वहीं इसी बीच बिहार के दरभंगा से महामारी के खौफ में एक ऐसी हृदयविदारक घटना देखने को मिली है, जहां एक बेटा इंसानियत तो दूर पुत्र धर्म ही भूल गया। जब उसके बुजुर्ग पिता की संक्रमित होने के बाद अस्पताल में मौत हो गई, तो उसने शव लेने से इंकार कर दिया। इतना ही नहीं  प्रशासन को लिखित देते हुए शव लेने और अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। जब बात में जिला के अधिकारियों ने उससे संपर्क किया तो बेटे ने अपना मोबाइल नंबर ही बंद कर लिया। लेकिन मानवता अभी मरी नहीं थी....

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कोरोना से पिता की मौत, बेटे ने शव लेने से इंकार किया..मुस्लिम ने युवक बेटा बन किया अंतिम संस्कार

जब अपनों ने साथ छोड़ा तो दूसरे धर्म के लोग मानवता दिखाते हुए आगे आए। जब इसकी सूचना कबीर सेवा संस्थान को मिली तो बुजुर्ग के अंतिम संस्कार का फैसला लिया। संस्था के मुस्लिम युवक ने एक बेटे का फर्ज निभाते हुए हिंदू रीति रिवाज से बुजुर्ग का अंतिम संस्कार किया।
 

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अंतिम संस्कार करने के बाद मुस्लिम युवक उमर ने एक वीडियो भी जारी किया। उसने कहा कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, कोरोना से डरने की नहीं, बल्कि सावधान रहने की जरुरत है। कोरोना गाइडलाइन का पालन करिए ना कि अपना का साथ छोड़िए। युवक ने कहा कि कोरोना डर के कारण बेटा ने अपना फर्ज नहीं निभाया, लेकिन हमारी संस्था के लोगों ने मानव धर्म निभाया। में मुस्लिम होने से पहले एक इंसान हूं और यही इंसानियत वाला काम आज मैंने किया है।

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उमर ने कहा कि दाह संस्कार के बाद में एक सप्ताह तक अपने घर मैं यानि होम आइसोलेशन रहूंगा। सभी कोरोना की गाइडलाइन का पालन करूंगा। उसने कहा कि मेरे साथ-साथ कबीर सेवा संस्थान के संरक्षक नवीन सिन्हा , दीपक, सुरेंद्र और रंजीत की भूमिका भी सराहनीय है। उनके योगदान से ही यह नेक काम किया गया है।

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बता दें कि यह पूरा मामला दरभंगा के DMCH अस्पताल का है, जहां रेलवे से रिटायर और पीडारुच गांव के रहने वाले एक बुजुर्ग संक्रमित होने के बाद भर्ती थे। लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। मृतक के एक बेटे को छोड़कर उसके तीनों बेटे और  पत्नी भी संक्रमित हैं। परिवार को जब शव लेने की सूचना दी गई तो बेटे ने इनकार किया और अस्पताल प्रशासन को लिख कर भी दिया कि वह पिता का अंतिस संस्कार नहीं करेगा।

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अंतिम संस्कार करने के बाद मुस्लिम युवक उमर ने एक वीडियो भी जारी किया। उसने कहा कि मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है, कोरोना से डरने की नहीं, बल्कि सावधान रहने की जरुरत है। कोरोना गाइडलाइन का पालन करिए ना कि अपना का साथ छोड़िए। युवक ने कहा कि कोरोना डर के कारण बेटा ने अपना फर्ज नहीं निभाया, लेकिन हमारी संस्था के लोगों ने मानव धर्म निभाया। में मुस्लिम होने से पहले एक इंसान हूं और यही इंसानियत वाला काम आज मैंने किया है।

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