पटना/ मुंगेर। रातभर कई ड्रामे के बावजूद आखिरकार सात साल बाद निर्भया के चार दोषियों को फांसी की सजा मिल गई। हालांकि फांसी से एक दिन पहले दोषियों के वकील एपी सिंह ने बचाने की बहुत कोशिश की। पहले पटियाला कोर्ट, फिर हाई कोर्ट गए। मामला खारिज होने के बाद देर रात सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
लेकिन निर्भया के दोषियों को कहीं राहत नहीं मिली। इसके बाद चारों दोषियों को सुबह 5.30 बजे फांसी पर लटका दिया गया।
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भारत के लगभग सभी बड़े जेलों में फांसी घर है। मगर जिस फंदे पर अपराधियों को लटकाया जाता वह केवल एक ही जेल में बनता है।
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फांसी का फंदा बनाने वाला भारत का इकलौता जेल बिहार में है। अंग्रेजी राज से ही यहां फांसी के लिए फंदा बनाया जाता है। फंदों देश भर की जेलों में यहीं से आपूर्ति की जाती है। ये इकलौता जेल बिहार के बक्सर जिले में है।
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इस कारागार को बक्सर सेंट्रल जेल के नाम जाना जाता है। देश में आखिरी बार संसद पर हमला करने के आरोप में जम्मू-कश्मीर के आतंकी अफजल गुरु को यहीं के फंदे से फांसी की दी गई थी।
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अफजल से पहले मुंबई आतंकी हमले में जिंदा पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब को भी बक्सर में बने फंदे पर फांसी दी गई थी।
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फांसी के फंदे कोई और नहीं बल्कि बक्सर जेल के कैदी और कुशल तकनीकी जानकार ही तैयार करते हैं। इसमें सूत का धागा, फेविकोल, पीतल का बुश, पैराशूट रोप का इस्तेमाला किया जाता है।
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बक्सर जेल में अंग्रेजों के जमाने की एक पावरलूम मशीन भी है, जिस पर धागों की गिनती कर अलग किया जाता है। कहा जाता है कि फांसी के एक फंदे में 72 सौ धागों का प्रयोग होता है।
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यहां के बने फंदे पर करीब 150 किलोग्राम के वजन वाले व्यक्ति को लटकाया जा सकता है। (सभी तस्वीरों का इस्तेमाल स्टोरी प्रेजेंटेशन के लिए किया गया है।)
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