Published : Mar 14, 2021, 07:10 PM ISTUpdated : Mar 14, 2021, 07:14 PM IST
बिजनेस डेस्क। वित्त वर्ष 2020-21 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख 31 मार्च है। अगर किसी व्यक्ति की आमदनी टैक्स छूट की सीमा के अंदर आती है, तो उसके लिए आईटीआर फाइल करना जरूरी नहीं है। वहीं, अगर ऐसा व्यक्ति भी इनकम टैक्स रिटर्न पाइल करता है, तो उसे कई तरह के फायदे होते हैं। इनकम टैक्स रिटर्न कोई भी फाइल कर सकता है। यह किसी भी व्यक्ति की आमदनी का प्रूफ होता है। इनकम टैक्स रिटर्न भरने से बैंक से लोन लेने में आसानी होती है। इससे अपना बिजनेस शुरू करने में मदद मिल सकती है।
(फाइल फोटो)
सभी निजी और सरकारी संस्थान इनकम टैक्स रिटर्न को आमदनी के प्रमाण के तौर पर स्वीकार करते हैं। अगर कोई व्यक्ति किसी बैंक से लोन लेना चाहता है, तो ज्यादातर बैंक या नॉनबैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां (NBFC) पिछले 3 साल का आईटीआर रिसीप्ट मांगती है। इसलिए जो लोग नियमित तौर पर आईटीआर भरते हैं, उन्हें आसानी से लोन मिल जाता है। (फाइल फोटो)
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अगर कोई दूसरे देश की यात्रा करना चाहता है, तो वीजा के लिए आवेदन करते समय इनकम टैक्स रिटर्न मांगा जा सकता है। कई देशों में वीजा देने के लिए 3 से 5 साल तक आईटीआर मांगा जाता है। इसके जरिए यह देखा जाता है कि जो व्यक्ति देश में आ रहा है, उसकी वित्तीय स्थिति क्या है। (फाइल फोटो)
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इनकम टैक्स रिटर्न की रसीद किसी भी व्यक्ति के रजिस्टर्ड पते पर भेजी जाती है। इसलिए इसका इस्तेमाल ऐड्रेस प्रूफ के तौर पर भी किया जा सकता है। वहीं, इनकम प्रूफ के तौर पर तो यह मान्य होता ही है। (फाइल फोटो)
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अपना बिजनेस शुरू करने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न भरना बहुत जरूरी है। अगर कोई किसी सरकारी विभाग से कॉन्ट्रैक्ट हासिल करना चाहता है, तो आईटीआर दिखाना जरूरी होता है। किसी भी सरकारी विभाग का कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए कम से कम 5 साल का आईटीआर देना पड़ता है। (फाइल फोटो)
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अगर कोई बहुत बड़ी रकम का बीमा लेना चाहता है, तो इसके लिए भी आईटीआर दिखाना जरूरी होता है। अगर कोई 1 करोड़ रुपए का टर्म प्लान लेना चाहता है, तो बीमा कंपनी आईटीआर मांग सकती है। दरअसल, किसी भी व्यक्ति के इनकम का सोर्स और उसकी नियमितता के बारे में जानने का यही एक तरीका है कि आईटीआर के डिटेल्स देखे जाएं। (फाइल फोटो)
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जो लोग इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आते हैं और आईटीआर फाइल करते हैं, तो इससे उन्हें भविष्य में फायदा हो सकता है। वहीं, जानकारी के अभाव में या जागरूकता की कमी से ज्यादा लोग ऐसा नहीं करते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, साल 2017-18 में ऐसे लोगों की संख्या 2016-17 के मुकाबले 29 फीसदी बढ़ी थी, जो टैक्स के दायरे में नहीं आते, लेकिन जिन्होंने आईटीआर फाइल किया। वहीं, 2020-21 में यह घट कर 7 फीसदी रह गया। इसके पीछे एक बड़ी वजह कोरोना महामारी हो सकती है। (फाइल फोटो)
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