Post Office की स्मॉल सेविंग्स स्कीम में निवेश से मिलेगा मुनाफा, नहीं घटी है ब्याज दर

Published : Jul 22, 2020, 01:38 PM ISTUpdated : Jul 22, 2020, 01:41 PM IST

बिजनेस डेस्क। कम निवेश पर अच्छे मुनाफे के लिए पोस्ट ऑफिस की स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स सबसे अच्छी मानी जाती हैं। इनमें जहां रिटर्न बढ़िया मिलता है, वहीं किसी तरह का कोई रिस्क नहीं होता। पोस्ट ऑफिस में किया जाने वाला निवेश हर तरह से सुरक्षित होता है। पोस्ट ऑफिस की ऐसी कई स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स हैं, जिनमें सुविधानुसार निवेश किया जा सकता है। खास बात यह है कि सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 की जुलाई-सितंबर तिमाही के लिए छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया है। 

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Post Office की स्मॉल सेविंग्स स्कीम में निवेश से मिलेगा मुनाफा, नहीं घटी है ब्याज दर

डाक विभाग ने जारी किया सर्कुलर
डाक विभाग ने एक सर्कुलर जारी कर के यह ऐलान किया है कि वित्त वर्ष 2020-21 की दूसरी तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इन योजनाओं में निवेश करने पर पहले की तरह मुनाफा मिलता रहेगा। 

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सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम में सबसे ज्यादा ब्याज
सर्कुलर के मुताबिक, पीपीएफ पर 7.10 फीसदी ब्याज मिलेगा, वहीं सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम (SCSS) पर 7.40 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा। पोस्ट ऑफिस में टाइम डिपॉजिट पर ब्याज की दर 5.5 से 6.5 फीसदी रहेगी। 

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कब तक लागू रहेंगी ये ब्याज दरें
पोस्टल डिपार्टमेंट के सर्कुलर के मुताबिक, ये ब्याज दरें 1 जुलाई 2020 से 30 सितंबर 2020 की अवधि के लिए लागू रहेंगी। इसके बाद ही ब्याज दरों के बारे में कोई नई घोषणा हो सकती है।

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किस स्कीम में कितनी है ब्याज दर
पोस्ट ऑफिस की 1 साल की टाइम डिपॉजिट स्कीम में ब्याज दर 5.5 फीसदी है। 2 साल के टाइम डिपॉजिट स्कीम में 5.5 फीसदी, 3 वर्षीय टाइम डिपॉजिट में 5.5 फीसदी, 5 वर्षीय टाइम डपॉजिट में 6.7 फीसदी, 5 वर्षीय रेकरिंग डिपॉजिट में 5.8 फीसदी, 5 वर्षीय सीनियर सिटिजन सेविंग स्कीम में 7.4 फीसदी, 5 वर्षीय मंथली इनकम स्कीम में 6.6 फीसदी, 5 वर्षीय नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट में 6.8 फीसदी, पीपीएफ में 7.1 फीसदी, किसान विकास पत्र में 6.9 फीसदी और सुकन्या समृद्धि योजना में 7.6 फीसदी ब्याज दर है। 
 

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पिछली तिमाही में घटी थीं दरें
पिछली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2020 के लिए सरकार ने छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कटौती कर दी थी। यह कटौती 70-140 बेसिस पॉइंट्स की थी। अगर सरकार ने यह कटौती जारी रखी होती तो पीपीएफ में ब्याज दर 7 फीसदी से भी नीचे चली जाती, जो 46 सालों में सबसे कम होती।

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कैसे तय होती हैं ब्याज दरें
सरकार हर तिमाही पर इन छोटी बचत योजनाओ की ब्याज दरों की समीक्षा करती है। छोटी बचत योजनाओं में ब्याज दरों को तय करने का फॉर्मूला श्यामला कमेटी ने दिया था। कमेटी ने यह सुझाव दिया था कि विभिन्न योजनाओं पर ब्याज दर समान मेच्योरिटी वाले सरकार के बॉन्ड्स के यील्ड से 0.25 फीसदी से लेकर 1 फीसदी ज्यादा होनी चाहिए। 

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