Published : Apr 12, 2020, 10:45 AM ISTUpdated : Apr 12, 2020, 10:54 AM IST
नई दिल्ली. कोरोना वायरस का कहर पूरे देश में फैला हुआ है। देश के अलग-अलग राज्यों में कोरोना के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है और सरकारें इसे कंट्रोल में करने के लिए हरसंभव कोशिशें कर रही हैं। इस बीच कोरोना वायरस के प्रकोप पर काबू पाने को लेकर 'भीलवाड़ा मॉडल' पूरे देश में चर्चा में है। दरअसल, खतरनाक कोरोना वायरस से लड़ने के लिए राजस्थान के इस जिले ने योजनाबद्ध तरीके से काम किया है। इस मॉडल के पीछे भीलवाड़ा के आईएएस अधिकारी का ब्रेन है। उन्होंने ही कोरोना से जंग में खुद को पूरी तरह मुस्तैद कर लिया है। आइए जानते हैं कि आखिर कौन हैं IAS राजेंद्र भट्ट ?
दरअसल, भीलवाड़ा डीएम राजेंद्र भट्ट 2007 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। राजेंद्र भट्ट एक पीसीएस अधिकारी रहे हैं। वह शुरू से ही आईएस अधिकारी नहीं थे, बल्कि राज्य सरकार द्वारा उन्हें 2007 में आईएएस में प्रमोट किया गया था। राजेंद्र भट्ट ने कहा, ‘वो सामान्य आईएएस अधिकारी नहीं हैं’. ‘ उन्हें राजस्थान राज्य सेवा से पदोन्नति देकर आईएएस अधिकारी बनाया गया है। मैं कहना चाहूंगा कि वो किसी भी सीधे तौर पर चुनकर आए आईएएस अधिकारी से बेहतर हैं।’
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आईएएस अधिकारी के करिअर में जिलाधिकारी या कलेक्टर के तौर पर पोस्टिंग, दूसरी होती है। इस पद के लिए सामान्य तौर पर 28-30 साल की उम्र होती है, लेकिन राजस्थान राज्य सेवा में होने के कारण भट्ट कई दशकों बाद डीएम के पद पर पहुंचे। उन्हें 2007 में पदोन्नति देकर आईएएस अधिकारी बनाया गया। अगले चार सालों में वो सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
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कोरोना के खिलाफ लड़ाई में राजेंद्र का मानना है कि जब तक आइसोलेशन, टेस्टिंग और क्वारंटाइनिंग की प्रक्रिया पूरी तरह नहीं हो जाती, हम कोरोना से जीत का दावा नहीं कर सकते। उन्होंने कोरोना को हराने के लिए पूरा एक मॉडल तैयार किया है। आइए उस पर भी बात करते हैं।
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'भीलवाड़ा मॉडल' की अब चारों ओर चर्चा हो रही है। कोरोना के खिलाफ जंग में अगर भीलवाड़ा मुस्तैदी से डटा रहा तो उसका पूरा क्रेडिट उस जिले के डीएम राजेंद्र भट्ट को जाता है। राजस्थान के जोधपुर में जन्मे 56 साल के आईएएस अधिकारी और भीलवाड़ा के जिला मजिस्ट्रेट राजेंद्र भट्ट की कार्ययोजना ने ही जिले में खतरनाक कोरोना वायरस के चेन को तोड़ने में का काम किया।
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शुरू में एक समय ऐसा आया, जब भीलवाड़ा 27 संक्रमित केसों और दो मौत के बाद राजस्थान में कोरोना वायरस का हॉटस्पॉट बन गया। कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ने लगी। डीएम राजेंद्र भट्ट ने कमान संभाली और अपने अंदाज से काम किया और तब जाकर प्रशासन और स्वास्थ्यकर्मियों की मुस्तैदी ने कोरोना के प्रसार को रोकने में कामयाबी हासिल की।
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एक तरह से देखा जाए तो कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में भीलवाड़ा में न सिर्फ डीएम की सक्रियता दिखी, बल्कि शासन-प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस महकमे के बीच एक टीम वर्क देखने को मिला। कुल मिलाकर कोरोना के खिलाफ जंग में जो टीम भावना दिखी, उसी का नतीजा है कि आज पूरे देश में इस मॉडल को लागू करने की बात हो रही है।
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भीलवाड़ा में बढ़ते मामले को देखते हुए जांच की गति बढ़ा दी गई, सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन किया जाने लगा और घर-घर जाकर लोगों की स्क्रीनिंग की जाने लगी। जिले की सीमाओं को सील कर दिया गया, हर किसी की आवाजाही को रोक दिया गया और फिर सरकार द्वारा गठित रैपिड रिस्पॉन्स टीम का जिला प्रशासन ने सही से इस्तेमाल किया। लोगों में कोरोना के लक्षण मिलते ही, उन्हें क्लारंटाइन किया गया, उन पर कड़ी निगरानी रखी गई।
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अधिकारी ने कहा कि हॉस्पॉट की मैंपिंग के लिए जिले को पृथक करना, घर-घर जाकर स्क्रीनिंग करना, कॉनटेक्ट ट्रेसिंग, क्वारेंटाइन और आइशोलेसन की व्यवस्था ताकि ग्रामीण क्षेत्र में पूरी तरह से निगरानी हो सके- डीएम दफ्तर की तरफ से समय के अनुसार निर्देश मिलते रहे। उन्होंने कहा, ‘पूरी तरह से कर्फ्यू का एलान करने से पहले हमने अपने लोगों को डेयरियों में भेजा, ये पता करने के लिए की प्रत्येक घर में कितना दूध का इस्तेमाल होता है। ताकि जब हम कर्फ्यू लगाए तो सभी घरों में हम इसे पहुंचा पाएं……फिर से यही कि ये कोई रॉकेट साइंस नहीं था।’ इस मॉडल से उन्होंने राज्य में कोरोना को हराने की लड़ाई को मजबूत बना लिया है। इस स्ट्रेटजी की चर्चा हर क्षेत्र में हो रही है। साथ ही आईएएस अफसर राजेंद्र भट्ट की तारीफों के भी पुल बांधे जा रहे हैं।
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