IAS के इंटरव्यू में पूछे जाते हैं किस-किस तरह के सवाल? इस टॉपर ने खोले सारे राज

Published : Feb 08, 2020, 02:08 PM IST

मेरठ: तमाम परीक्षाओं में अंग्रेजी का बहुत हौवा रहता है। खासकर यूपीएससी के सिविल सर्विसेज एग्जाम को लेकर यह भ्रम है कि अगर आप अंग्रेजी मीडियम से पढ़े नहीं हैं तो कहीं न कहीं फेल हो ही जाएंगे और आईएएस बनने में मुश्किल होगी। लेकिन निशांत जैन की कहानी इससे बिल्कुल अलग है। हिंदी मीडियम से यूपीएससी परीक्षा पास कर IAS बनने वाले निशांत जैन ने साबित कर दिया कि हिंदी के छात्रों की काबिलियत अंग्रेजी मीडियम के छात्रों से कम नहीं होती है। आइए जानते हैं निशांत जैन के बारे में, साथ ही जानते हैं कैसा रहा उनका IAS इंटरव्यू का अनुभव।  

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IAS के इंटरव्यू में पूछे जाते हैं किस-किस तरह के सवाल? इस टॉपर ने खोले सारे राज
निशांत जैन ने सिविल सेवा परीक्षा 2014 में दी थी। जिसमें उन्होंने 13वीं रैंक हासिल की थी। एक इंटरव्यू में उन्होंने इस परीक्षा से जुड़े कई राज खोले हैं।
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उन्होंने बताया- 'अक्सर ऐसा माना जाता है कि जो उम्मीदवार यूपीएससी की तैयारी कर रहे हैं वह लगातार 20 से 22 घंटे पढ़ते रहते हैं, लेकिन ये सच नहीं है।
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इस परीक्षा की तैयारी के लिए 7 से 8 घंटे की पढ़ाई काफी है। एक नॉर्मल इंसान इतने ही घंटे की ही पढ़ाई कर सकता है। चाहे वह यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी कर रहा हो या फिर किसी और विषय की।''
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निशांत जैन ने बताया- 'मेरे मामले में अच्छी बात ये थी कि जब मैंने ग्रेजुएशन पूरी की थी उस दौरान फेसबुक और वाट्सएप इतना नहीं था। वहीं उस समय नॉलेज के लिए यूट्यूब पर भी ज्यादा वीडियो नहीं देखते थे। हम सारा ज्ञान किताबों से लेते थे।'
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उन्होंने बताया ''जब मैं मेरठ से दिल्ली आया था और यहां तैयारी कर पहली बार यूपीएससी परीक्षा दी थी तो उस समय मैं प्रीलिम्स में ही फेल हो गया था। इसके बाद काफी निराश हो गए और संसद में अनुवादक की जॉब नौकरी जॉइन कर लिया। लेकिन कुछ समय बाद निशांत ने फिर हिम्मत जुटाई और दोबारा आईएएस की परीक्षा में बैठे। इस बार तैयारी अच्छी थी और निशांत ने प्री मेंस इंटरव्यू क्वालिफ़ाई कर लिया।
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निशांत जैन ने यूपीएससी उम्मीदवारों के लिए ''मुझे बनना है यूपीएससी टॉपर' के बाद 'रुक जाना नहीं' नाम की एक किताब भी लिखी है। फेल होने के बाद निराशा और तनाव ने मुझे घेर लिया था। वो स्थिति मेरे लिए तनावपूर्ण रही थी, लेकिन उस स्थिति से दोस्तों, परिवार की मदद से उभरा। इसके बारे में मैंने एक किताब लिखने के बारे में सोचा। जिसका नाम है 'रुक जाना नहीं।''

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